एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया का पारम्परिक उपचार      Publish Date : 11/11/2025

एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया का पारम्परिक उपचार

                                                                                                 डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (Acute Lymphoblastic Leukemia- ALL) के उपचार में उपयोग की जाने वाली एलोपैथिक दवाइयाँ मुख्य रूप से कीमोथेरेपी (Chemotherapy) और टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy) का हिस्सा होती हैं। 

कुछ प्रमुख दवाइयों और उपचार के तरीकों की सूची दी गई है:

प्रमुख एलोपैथिक दवाइयाँ (ALL Treatment Medicines)

ये दवाइयाँ आमतौर पर डॉक्टर की सलाह पर ही उपयोग की जाती हैं, क्योंकि इनकी खुराक और संयोजन मरीज़ की स्थिति पर निर्भर करता है:

  • मर्कैप्टोप्यूरिन (Mercaptopurine): यह एक एंटीमेटाबोलाइट दवा है जिसका उपयोग अक्सर ALL के रखरखाव (maintenance) चरण के दौरान किया जाता है।
  • साइटाराबीन (Cytarabine): यह भी एक एंटीमेटाबोलाइट एजेंट है, जो कैंसर कोशिकाओं में डीएनए संश्लेषण को बाधित करता है। इसका उपयोग इंडक्शन और कंसोलिडेशन थेरेपी में किया जाता है।
  • मीथोट्रेक्सेट (Methotrexate): यह दवा मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी तक ल्यूकेमिया कोशिकाओं को फैलने से रोकने या इलाज करने के लिए उपयोग की जा सकती है।
  • विन्क्रिस्टाइन (Vincristine): यह एक कीमोथेरेपी दवा है जो अक्सर अन्य दवाओं के साथ संयोजन में दी जाती है।
  • कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (Corticosteroids): जैसे कि डेक्सामीथासोन (Dexamethasone) और प्रेडनिसोन (Prednisone), ये दवाइयाँ सूजन को कम करने और कैंसर कोशिकाओं को मारने में मदद करती हैं।
  • साइक्लोफॉस्फेमाइड (Cyclophosphamide): एक अन्य शक्तिशाली कीमोथेरेपी दवा, जिसका उपयोग विभिन्न उपचार चरणों में किया जाता है.।
  • एटोपोसाइड (Etoposide): इस दवा का उपयोग भी ALL के उपचार योजना में किया जा सकता है.।
  • नेलरैबीन (Nelarabine): यह दवा विशेष रूप से टी-सेल ALL (T-cell ALL) वाले रोगियों को दी जा सकती है.। 

उपचार के तरीके (Treatment Modalities)

                                       

दवाइयों के अलावा, ALL के इलाज में अन्य तरीके भी शामिल हो सकते हैं: 

  • कीमोथेरेपी (Chemotherapy): यह मुख्य उपचार है जिसमें कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दवाइयों का उपयोग किया जाता है।
  • टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy): इसमें ऐसी दवाएँ शामिल हैं जो कैंसर कोशिकाओं में विशिष्ट असामान्यताओं को लक्षित करती हैं, जैसे कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज़ (Monoclonal Antibodies) या टायरोसिन काइनेज इनहिबिटर (Tyrosine Kinase Inhibitors)।
  • इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy): यह शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने में मदद करती है (उदाहरण: CAR-T सेल थेरेपी)।
  • रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy): उच्च-ऊर्जा एक्स-रे का उपयोग कैंसर कोशिकाओं को मारने और उनके विकास को प्रतिबंधित करने के लिए किया जाता है।
  • स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (Stem Cell Transplant): कुछ मामलों में, रोगी के अस्थि मज्जा (bone marrow) को स्वस्थ अस्थि मज्जा से बदल दिया जाता है। 

महत्वपूर्ण नोट:

कैंसर का उपचार एक विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजिस्ट (oncologist) या हेमेटोलॉजिस्ट (hematologist) की देखरेख में होना चाहिए। उपचार योजना व्यक्तिगत रोगी की स्थिति, आयु और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए, किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श करना सबसे अच्छा है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।