
प्रदूषण एवं मौसम में बदलाव के कारण बढ़ सकती है सांस की समस्या Publish Date : 13/10/2025
प्रदूषण एवं मौसम में बदलाव के कारण बढ़ सकती है सांस की समस्या
डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
आजकल मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है, क्योंकि लगातार तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। तापमान में आ रही इस गिरावट के चलते कई लोगों को खासतौर से सांस के मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर दीपावली के बाद वायुमंडल में कई प्रकार के रसायनों के पहुंचने से सांस का अटैक तक पड़ सकता है। ऐसे में सभी को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। सर्दियों के समय में लोगों को अस्थमा एलर्जी और सांस की तकलीफें बढ़ जाती है।
वातावरण और तापमान में बदलाव के कारण ऐसा होता है। सांस के रोगियों को अपनी दवाइयां रेगुलर लेते रहना चाहिए, ठंडा उत्पाद खाने बंद कर देने चाहिए और गुनगुने पानी खली पेट पीने के साथ अपने दिन शुरूआत करें। यदि तकलीफ अधिक हो रही है तो अपने डॉक्टर से सलाह लेकर उपचार प्रारंभ कर सकते हैं।
अपने फेफड़ों को मजबूती देने के लिए रोजाना 5 से 8 बार 40 से 60 सेकंड तक लोकल व्यायाम करें। अस्थमा और टीवी के मरीजों को तुरंत आराम मिलेगा। स्वस्थ व्यक्ति के भी फेफड़े मजबूत बने रहेंगे और पेट रोगों की भी समस्याएं दूर हो सकती है। कुछ लोगों को देखा गया है कि प्रदूषण के कारण सांस लेने में दिक्कत महसूस की जाती है तो ऐसे में सबसे पहले दीपावली के नजदीक बाहर अधिक निकलना बंद कर देना चाहिए। एक बात पर ध्यान रखना है खासकर अस्थमा और टीवी के मरीज सुबह ठंडक से अपने को बचा कर रखें।

अस्थमा के रोगी एन 95 मास्क लगाकर ही बाहर निकलें। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी का प्रयोग करें और पौष्टिक आहार का सेवन करें, ताकि इम्यूनिटी अच्छी बनी रहे। पटाखों के धुएं से दूर रहने की आवश्यकता होती है यदि फाग दिख रहा है तो घर के बाहर कतई ना निकले पटाखों के धुएं से दूर अपने को रखें दीपावली के समय जब धुआ अधिक आकाश में दिखता है या प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ हो तो अस्थमा और टीबी के मरीज रेगुलर दवाई लें।
एक दिन भी दवाई को ना छोड़े पी एफ आर टेस्ट करते रहे यदि पटाखों के धुएं से सांस अधिक उखाड़ रहा है तो इनहेलर और नेबुलाइजर का प्रयोग करें अधिक तबीयत खराब होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
जिन लोगों को लंबे समय तक बलगम के साथ खांसी की शिकायत होती है तो वह टीबी के संकेत हो सकते हैं। अस्थमा क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज भी हो सकती है सीओपीडी अंतरालय फेफड़ों की बीमारी भी हो सकती है। अस्थमा सीओपीडी जैसी बीमारी मिलती है तो रेगुलर उपचार करना चाहिए।
कुछ लोगों को देखा गया है रात को सोते समय सांस लेने में दिक्कत होती है और सोते समय छाती में से घड़घड़ की आवाज आती है और जब चलते हैं तो सांस चढ़ जाता है। इसके लिए रोजाना सुबह शाम डेक्सोलिन 200 एमजी की एक-एक गोली लेनी चाहिए। 4 से 5 दिन तक इसको मरीज को दें। 5 दिन बाद आराम हो जाएगा तो ठीक है यदि आराम नहीं मिलता है तो उनके कुछ टेस्ट होते हैं।
नियमित उपचार करना होगा यह बीमारी गंभीर नहीं है इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है। कुछ लोगों को देखा गया है कि उनको अस्थमा होता है बलगम और पसलियों में भारीपन रहता है। इस मौसम में उनको सतर्क रहने की आवश्यकता होती है।

अस्थमा के मरीज को मौसम बदलने के दौरान ऐसा होता है जिससे पसलियों में भारीपन महसूस होता है, ऐसे में गुनगुना पानी खाली पेट पीना चाहिए। इनहेलर का प्रयोग करना चाहिए ए जी 500 और मोंटा एल सी गोली सुबह शाम 4 से 5 दिन खानी चाहिए। इससे शरीर में हो रहा भारीपन खत्म हो जाएगा। सर्दियों में गुनगुना पानी जरूर लेते रहे इससे मांसपेशियों को आराम मिलेगा और गले का भारीपन दूर हो जाएगा।
कुछ लोगों को खांसी जुकाम रहता है वह वायरल भी हो सकता है, जुकाम के कारण नाक बंद रहती है, ऐसी दशा में आग 500 और मोंटेक एलसी टेबलेट रोजाना सुबह-शाम लें। ऐसा 5 दिन तक लगातार करें यह दवाई एलर्जी संबंधी है 5 दिन के बाद यदि आराम नहीं मिलता है तो खून की जांच कराएं। इसके बाद आगे का उपचार किसी अच्छे डॉक्टर से इलाज कराये।
कुछ लोगों को पैदल चलते समय सांस फूलने की समस्या होती है उन लोगों को अस्थमा का टेस्ट कर लेना चाहिए और इसमें देरी नहीं करनी चाहिए।
इसके साथ ही मौसम बदलने के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। साथ ही एक फेफड़े संबंधित टेस्ट भी जरूर कर लेना चाहिए। साथ ही यदि फेफड़ों में सांस रोक कर रोजाना व्यायाम कर जाएगा तो फेफड़ों को मजबूती मिलती है और बदलते मौसम में आने वाली समस्याओं से अपने फेफड़ों को काफी सुरक्षित रखा जा सकता है यदि फेफड़ों की समस्या बढ़ रही हो तो अपने किसी नजदीकी अच्छे डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
