दूर होगा दर्द और शांति से चल सकेंगे आप      Publish Date : 28/08/2025

            दूर होगा दर्द और शांति से चल सकेंगे आप

                                                                                                                                            डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

पैरों में दर्द की समस्या के मामले दिन प्रति दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। इस समस्या से प्रभावित व्यक्ति की दिनचर्या पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पैरों में दर्द की समस्या के अनेक कारण हो सकते हैं, जिन्हें जानने के बाद ही उनके उपचार की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाती है। हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ0 दिव्यांशु सेंगर जानकारी प्रदान कर रहें हैं पैरों में होने वाले दर्द के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तार से-

आपने अक्सर अपने मित्रों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों को पैरों में दर्द होने की शिकायत करते सुना होगा। कुछ लोगों के पैरों में दर्द उनके चलने से शुरू हो जाता है और जब वे चलना बंद कर देते हैं तो विश्राम की अवस्था में पैरों का दर्द भी गायब हो जाता है और दोबारा चलने से फिर वही दर्द उभर जाता है। पैरों के विभिन्न भागों (जैसे पंजों, घुटनों व जांघों) में भी दर्द की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

                                                        

कभी-कभी हमारे बुजुर्ग भी पैरों में दर्द होने की शिकायत करते हैं। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनके पैरों में दर्द चलने से कम हो जाता है, पर लेटने पर दर्द की तीव्रता बढ़ जाती है। अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं या धूमपान जैसे सिगरेट, बीड़ी व हुक्का आदि के लती है या फिर तंबाकू और इससे बने पदार्थों जैसे जर्दायुक्त पान मसाला या किसी भी किस्म की तंबाकू का सेवन करते हैं और इसके साथ ही पैरों व इसके अन्य भागों में दर्द को लेकर परेशान हैं तो सचेत हो जाएं, अन्यथा देर-सवेर पैरों की यह समस्या गंभीर भी हो सकती है।

भ्रांतियों को करें दूर

अक्सर अनेक लोग इस बात को लेकर भ्रमित रहते है कि मधुमेह (डायबिटीज) का पैरों व इसके अन्य भागों से कोई संबंध नहीं होता है। वे इस तरह की गलतफहमी के शिकार है कि डायबिटीज का दुष्प्रभाव सिर्फ हृदय पर ही पड़ता है। इसी तरह धूमपान के आदी यह समझते हैं कि धूमपान से सिर्फ फेफड़ों को ही प्रभावित करता है परन्तु लोग यह नहीं जानते कि धूमपान और तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों में पैरों में गैंगरीन होने का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। डायबिटीज का मरीज अगर धूमपान करता है या तंबाकू का सेवन करता है तो यह वही कहावत चरितार्थ हो जाती है कि ‘एक तो करेला और वह भी नीम चढ़ा’। डायबिटीज औरव धूमपान दोनों मिलकर पैरों व इसके अन्य भागों को कमजोर कर देते हैं। इसलिए पैरों को स्वस्थ एवं क्रियाशील रखने के लिए ब्लड शुगर को नियंत्रित करना और धूमपान पर अंकुश लगाना अति आवश्यक है।

पैरों की धमनियों में समस्या

                                                        

पैरों की रका धमनियों का ठीक से काम न करने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे डायबिटीज का मर्ज, जिसमें रक्त धमनी की दीवारों पर लगातार वसा व कैल्शियम जमा होने लगता है। इस कारण रक्त प्रवाह बाधित ही जाता है।

रक्त धमनी के बीमार होने का दूसरा कारण धूमपान व तंबाकू का सेवन है। तंबाकू में एक रासायनिक तत्व निकोटीन पाया जाता है जो धमनी की छोटी-छोटी शाखाओं में सिकुड़न ला देता है और पैर को जाने वाले रक्त प्रवाह को काफी हद तक कम कर देता है। अगर डायबिटीज च धूमपान के मरीज को पैर में दर्द होना शुरू हो जाए तो देरी किए बगैर उसे वैस्क्युलर व कार्डियो वैस्क्युलर सर्जन से परामर्श लेना चाहिए और रक्त धमनी की जांच करवानी चाहिए।

नसों के रोग

‘पैरों में दर्द होने का एक अन्य कारण वेन्स यानी शिराओं से संबंधित रोग है। जब पैरों और इसके अन्य भागों को रक्त धमनियों द्वारा पहुंचाया गया शुद्ध खून ऑक्सीजन देने के बाद अशुद्ध हो जाता है, तो यही वेन्स दोबारा से उस अशुद्ध खून को फेफड़ों तक पहुंचाने का काम करती है या फिर दूसरे शब्दों में कहें कि पैरों में डैनेज सिस्टम का निर्माण करती है। जब किसी वजह से ये वेन्स खून को पैरों एवं इसके अन्य भागों से ऊपर फेफड़े की तरफ नहीं पहुंचा पाती हैं तब ये अशुद्ध खून पैरों व इसके अन्य भागों में एकत्र होने लगता है और जब शिराओं के रोग से पीड़ित मरीज चलता है तो एकत्र हुए अगुद्ध खून की मात्रा और बढ़ जाने की वजह से पैरों में दर्द व थकान शुरू हो जाती है।

शिराओं से संबंधित इन रोगों में सबसे बड़ा कारण सी.वी. आई. यानी क्रोनिक वीनस इनसफीशिएन्सी है। इस रोग में अशुद्ध खून ऊपर की और चढ़ता तो है लेकिन शिराओं के अंदर स्थित कपाटों के कमजोर होने की वजह से चढ़े हुए खून की कुछ या अधिक मात्रा फिर से नीचे आ जाती है और यही कारण है एकत्र हुए अशुद्ध खून की मात्रा बढ़ जाने का।

वेरिकोज वेन्स की समस्या

पैरों में दर्द होने का एक अन्य महत्वपूर्ण कारण वेरिकोज वेन्स नामक मर्ज है। वेरिकोज वेन्स मौजूद दौर में पैरों व इसके अन्य भागों की समस्या को बढ़ा रही है। जैसे-जैसे विलासितां और आरामतलबी के नए-नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं, वैसे-वैसे पैरों में वैरिकोस वैन्स विविध रूपों में प्रकट हो रही है। इसकी शुरुआत नीले रंग बाली मकड़ी के जालेनुमा रूप से शुरू होती है। ये जाले शुरुआती दिनों में जांघ पर या घुटने के पीछे पाए जाते हैं। अगर समय पर सावधानी न बरती गई तो उचित चिकित्सकीय परामर्श के अभाव में ये जाले विकराल रूप धारण कर लेते हैं और अंत में इसकी परिणति पैरों व इसके अन्य भागों में गहरे काले निशान व लाइलाज घाव के रूप में होती हैं। अगर पैर में ज्यादा देर बैठने से दर्द व भारीपन महसूस होने लगता हैं और पैरों में नीले रंग को नसें दिखने लगें तो समय व्यर्थ किए बगैर किसी वैस्क्युलर सर्जन से परामर्श लें।

पैरों में दर्द होने का एक अन्य कारण शिराओं यानी वेन्स के अन्दर खून के कतरों का जमा हो जाना है। इस वजह से शिराओं का काफी हिस्सा पूरी तरह से बंद हो जाता है। इक्त के ऊपर चढ़ने को क्रिया बाधित हो जाती है।

जांचें और इलाज

पैरों व इसके अन्य भागों में दर्द होने पर किसी जनरल सर्जन या अस्थि रोग विशेषज्ञ की बजाय किसी वैस्क्युलर सर्जन से परामर्श लें और उनकी निगरानी में रक्त धमनियों व शिराओं की जांचें कराएं। इन जांचों के अंतर्गत डॉप्लर स्टडी, एम. आर. योनोग्राम, एम.आर. आरटीरियोग्राफी व एजियोग्राफी, डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी शामिल है। इसलिए ऐसे किसी अस्पताल में जाएं जावं किसी वैस्क्युलर सर्जन की चौबीस घंटे उपलब्धता हो और इन सब जांचों की सुविधा हो क्योंकि इन सब जांचों के आधार पर ही इलाज की सही दिशा निर्धारित की जाती है।

दर्द के शुरुआती दिनों में ही किसी वैस्क्युलर सर्जन से परामर्श जरूर लेना चाहिए अन्यथा आगे चलकर पैर विकार ग्रस्त हो सकते हैं। अगर पैरों में दर्द के लिए विकार ग्रस्त धमनियां जिम्मेदार हैं तो पैरों में रक्त प्रवाह को पुनः बहाल करने के लिए कई विधियों का सहारा लेना पड़ता है। जैसे धमनी पुनर्निर्माण, धमनी बाईपास व एंजियोप्लास्टी और स्टेटिंग। अगर पैरों व इसके अन्य भागों में दर्द का कारण शिराओं का रोग है तो वाल्व पुनर्निर्माण व वीनस बाईपास सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है।

क्यों होता है पैरों में दर्द

रक्त धमनियों की बीमारी पैरों में दर्द होने का सबसे बड़ा कारण है। ये रक्त धमनियां पैरों व इसके अन्य भागों को ऑक्सीजन युक्त शुद्ध खून की सप्ताई करती हैं जिससे पैर और इसके अन्य भाग अपना कार्य सुचारु रूप से कर सकें और आवश्यकता पड़ने पर शुद्ध खून की ज्यादा मात्रा पैरों को उपलब्ध करा सकें, पर जब ये रक्त धमनियां किसी वजह से शुद्ध रक्त की आवश्यक मात्रा पैरों और इसके अन्य भागों को नहीं पहुंचा पाती है तो पैरों में चलने से दर्द शुरू हो जाता है क्योंकि चलने से या पैरों का व्यायाम नारने से शुद्ध ऑक्सीजन की मांग अचानक बढ़ जाती है जो विकारग्रस्त धमनी पूरा नहीं कर पाती है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।