
टैटू बनवाने के दुष्परिणम Publish Date : 28/07/2025
टैटू बनवाने के दुष्परिणम
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
टैटू के शौकीन लोग जरा ध्यान दें, कहीं वह स्टाइलिश दिखने के चक्कर में मौत को तो नहीं दे रहे दावत; कहीं आपने भी तो नहीं की है यह भूल-
आजकल स्टाइलिश दिखने के लिए टैटू बनवाना युवाओं में बीमारी की वजह बन रहा है। अनजाने में यह लोग हेपेटाइटिस बी-सी के मरीज बन रहे हैं। जिला अस्पताल मेरठ के हेपेटाइटिस क्लीनिक में पहुंचे 10.10 फीसदी मरीजों की बीमारी की वजह टैटू बना है। इनमें 88 फीसदी लोगों की उम्र 20-35 साल है।
जिला अस्पताल मेरठ के मेडिकल ऑफिसर डॉ0 दिव्यांशु सेंगर ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में हेपेटाइटिस बी-सी के 1,881 मरीजों का इलाज चल रहा है। इसमें करीब 10.1 फीसदी यानी 189 लोगों में संक्रमित सुई से टैटू बनवाने से यह बीमारी हुई है। इन्होंने हाथ, गर्दन, कमर, पीठ समेत शरीर के अन्य अंगों पर टैटू बनवाए थे। सबसे ज्यादा 28 फीसदी यानी 526 लोग संक्रमित रक्त चढ़ने और संक्रमित सिरिंज के इस्तेमाल से बीमार हुए।

18 फीसदी यानी 338 लोग असुरक्षित यौन संबंध बनाने से संक्रमित हुए। इनमें 21-30 साल की उम्र के सबसे ज्यादा 52 फीसदी मरीज मिले। 31-40 साल के 18 फीसदी और बाकी के इससे अधिक उम्र के रहे हैं। हेपेटाइटिस-सी के 316 मरीज ठीक हो चुके हैं। हेपेटाइटिस-बी का इलाज तो जीवनभर चलता है।
जिला अस्पताल मेरठ में इसकी जांच, दवाएं समेत पूरा इलाज निशुल्क
राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम की नोडल प्रभारी डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि हेपेटाइटिस बी-सी के मरीजों की दवाओं का खर्च हर महीने 25-30 हजार रुपये, वायरल लोड की जांच 5-6 हजार रुपये में होती है। हेपेटाइटिस बी के मरीजों की जांच हर छह महीने या साल में कराई जाती है। हेपेटाइटिस-सी का तीन महीने इलाज चलता है, जिसका निजी अस्पताल में 1.50 लाख रुपये तक का खर्च आता है। मेडिसिन विभाग की इमारत की दूसरी मंजिल पर कमरा नंबर 52 में हेपेटाइटिस क्लीनिक बना है। यहां सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक पर्चा, जांच और इलाज की निशुल्क सुविधा है।
इन बातों का रखें ध्यानः
- हेपेटाइटिस-बी की वैक्सीन लगवाएं।
- असुरक्षित यौन संबंध न बनाएं।
- मान्यता प्राप्त ब्लड बैंक से ही रक्त लें।
- पुरानी सिरिंज का इस्तेमाल न कराएं।
- पीलिया होने पर हेपेटाइटिस की जांच अवश्य कराएं।
क्या हैं लक्षणः
- भूख कम लगना, वजन कम होना, बुखार होना।
- पेशाब, आंखों और त्वचा का रंग पीला पड़ना।
- लिवर में सूजन होना।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
