मस्तिष्क में बढ़ रहे प्लास्टिक के सूक्ष्म कण      Publish Date : 26/07/2025

          मस्तिष्क में बढ़ रहे प्लास्टिक के सूक्ष्म कण

                                                                                                                                         डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

इंसानी शरीर में बढ़ते प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नया खुलासा किया है। एक नए अध्ययन से पता चला है कि इंसानी दिमाग में प्लास्टिक के इन महीन कणों का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। इससे मस्तिष्काघात और ट्यूमर का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।

यह अध्ययन मानव के शरीर में बढ़ते प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों का स्तर एक बड़े खतरे को उजागर करता है। शोध में इस बात का भी खुलासा हुजा है कि गुर्दे और जिगर की तुलना में मानवीय मस्तिष्क में प्लास्टिक के कहीं अधिक महीन कण जमा हो रहे हैं। इस अध्ययन के नतीजे अंतर्राष्ट्रीय जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुए हैं। इस अध्ययन में वर्ष 1997 से 2024 के बीच किए दर्जनों पोस्टमार्टम में मस्तिष्क के ऊतकों में प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों की बढ़ती प्रवृत्ति देखी गई है। इतना ही नहीं, शोधकर्ताओं को जिगर और गुर्दे के नमूनों में भी प्लास्टिक के महीन कण प्राप्त हुए हैं।

                                                           

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने जिगर, गुर्दे और मस्तिष्क के नमूनों में प्लास्टिक के सूक्ष्म और नैनोकणों का अध्ययन करने के लिए नए तरीकों की मदद ली है। शोधकताओं ने अपने इस अध्ययन में मस्तिष्क के 52 नमूनों का विश्लेषण किया है। इस दौरान वर्ष 2016 में 28 नमूनों का जबकि वर्ष 2024 में 24 नमूनों का विश्लेषण किया गया। जिगर और गुर्दे के जो नमूने लिए गए थे, उनमें प्लास्टिक का स्तर करीब-करीब एक समान ही था। हालांकि, मस्तिष्क के नमूने जो फ्रंटल कॉर्टेक्स के हिस्से लिए गए थे, उनमें प्लास्टिक का स्तर बहुत अधिक था।

विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2024 के जिगर और मस्तिष्क के नमूनों में प्लास्टिक के महीन कणों का स्तर वर्ष 2016 की तुलना में बहुत अधिक था। उन्होंने इन निष्कर्षों की तुलना वर्ष 1997 से वर्ष 2013 के बीच लिए मस्तिष्क के ऊतकों के नमूनों से भी की है और पाया है कि हाल के नमूनों में प्लास्टिक के कणों का स्तर उस समय से कहीं अधिक है।

                                                          

इसी तरह स्वस्थ लोगों की तुलना में डिमेशिया से पीड़ित 12 लोगों के मस्तिष्क में प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों की कहीं अधिक मौजूदगी का भी पता चला है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि डिमेशिया से पीड़ित लोगों के मस्तिष्क के नमूनों में प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों का स्तर छह गुना अधिक था। शोधकर्ताओं के अनुसार डिमेंशिया से होने वाले नुकसान से इन कणों की संख्या बढ़ सकती है। हालाकि वह यह पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि यह डिमेशिया का कारण बनता है। गौरतलब है कि पिछले पांच दशकों में प्लास्टिक एक बड़े खतरे के रूप में उभरा है। यही वजह है कि ऊंचे पहाड़ों से लेकर गहरे समुद्र तक आज धरती की शायद ही ऐसी कोई स्थान हो, जहां प्लास्टिक की मौजूदगी न हों।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।