मशरूम उत्पादन से आत्मनिर्भरता की राह, सेना-वायुसेना के जवानों का प्रशिक्षण संपन्न-      Publish Date : 18/09/2026

मशरूम उत्पादन से आत्मनिर्भरता की राह, सेना-वायुसेना के जवानों का प्रशिक्षण संपन्न-

मेरठ। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ में उद्यमिता विकास के अंतर्गत 19 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन 18 सितंबर को किया गया। यह प्रशिक्षण खाद्य एवं औषधीय मशरूम उत्पादन तकनीक पर केंद्रित था, जिसमें 21 सैनिक भाग लिए थे। प्रशिक्षण का उद्देश्य सेना एवं वायुसेना से जुड़े सैनिकों एवं अधिकारियों को कम लागत में मशरूम उत्पादन के माध्यम से स्वरोजगार एवं अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराना था।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशक  डॉ. आर. एस. सेंगर ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन कम लागत में अधिक उत्पादन एवं आय प्राप्त करने का एक उपयोगी व्यवसाय है। इसे सीमित स्थान में भी आसानी से शुरू किया जा सकता है तथा बाजार में मशरूम की मांग लगातार बढ़ रही है। मशरूम पोषण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है और इसमें प्रोटीन सहित अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान दिया गया । प्रशिक्षण में खाद्य एवं औषधीय मशरूम की उत्पादन तकनीक, उत्पादन प्रबंधन तथा उद्यमिता से संबंधित जानकारी दी गयी।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक डॉ. गोपाल सिंह, प्राध्यापक, पादप रोग विज्ञान विभाग एवं नोडल अधिकारी, मशरूम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र ने बताया कि प्रशिक्षण में खाद्य एवं औषधीय मशरूम पर व्याख्यान तथा प्रयोगात्मक कार्य कराए गए है। इसका लाभ प्रशिक्षण प्राप्त सेना एवं वायुसेना के सैनिकों तथा अधिकारियों को भविष्य में होगा।

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत मिश्रा, प्रोफेसर डॉ. रमेश सिंह, एवं  डॉ. मनोज सेंगर उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण की उपयोगिता एवं स्वरोजगार की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागी सैनिकों को मशरूम उत्पादन की विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुनील कुमार ने सभी अतिथियों, अधिकारियों, प्रशिक्षकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पीएच.डी. शोध छात्र रोहित कुमार, ज्योति कुमारी, शिवांशु मिश्रा, जाहन्वी रुहल एवं सुजीत सिंह का भी सहयोग प्राप्त हुआ।