कृत्रिमबुद्धिमत्ता, मशीनलर्निंग एवं डेटा एनालिटिक्स पर सात दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारम्भ      Publish Date : 23/07/2026

कृत्रिमबुद्धिमत्ता, मशीनलर्निंग एवं डेटा एनालिटिक्स पर सात दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारम्भ

सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (एसवीपीयूएटी), मेरठ के तकनीकी महाविद्यालय द्वारा मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआईईटी), मेरठ के सहयोग से 23 से 29 जुलाई, 2026 तक आयोजित सात दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम "एआई, मशीनलर्निंग एवं डेटा एनालिटिक्स: अवधारणाएँ, उपकरण एवं अनुप्रयोग" का शुभारम्भ 23 जुलाई को विश्वविद्यालय के तकनीकी महाविद्यालय में किया गया।

           

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) त्रिवेणी दत्त रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीनलर्निंग तथा डेटा एनालिटिक्स शिक्षा, अनुसंधान, कृषि एवं तकनीकी नवाचार के महत्वपूर्ण आधार बन चुके हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान एवं कौशल का उपयोग शिक्षण, अनुसंधान तथा समाजोपयोगी नवाचारों में करें।

उद्घाटन समारोह में माननीय कुल सचिव डॉ. वी. पी. सिंह, निदेशक अनुसंधान डॉ. कमल खिलारी, अधिष्ठाता, तकनीकी महाविद्यालय डॉ. जयवीरसिंह, तथा मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआईईटी), मेरठ के प्रो. अनुराग एरोन भी विशिष्ट रूप से उपस्थित रहे। तकनीकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. जयवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज के डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीनलर्निंग एवं डेटा एनालिटिक्स जैसी उभरती प्रौद्योगिकियाँ शिक्षा, अनुसंधान तथा उद्योग के स्वरूप को तेजी से परिवर्तित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए इन नवीनतम तकनीकों का ज्ञान एवं उनका प्रभावी उपयोग समय की आवश्यकता है।

                  

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संकाय विकास कार्यक्रम प्रतिभागियों के ज्ञान, तकनीकी दक्षता एवं अनुसंधान क्षमता को समृद्ध करेगा तथा उन्हें आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से कार्यक्रम के प्रत्येक सत्र में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया। कुल सचिव डॉ. वी. पी. सिंह ने बदलते तकनीकी परिवेश में सतत संकाय विकास, अंतर्विषयक सहयोग तथा उभरती प्रौद्योगिकियों को शिक्षण एवं अनुसंधान से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। निदेशक अनुसंधान डॉ. कमल खिलारी ने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डेटा आधारित अनुसंधान भविष्य की वैज्ञानिक प्रगति की आधारशिला हैं तथा इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शोध की गुणवत्ता को नई दिशा प्रदान करेंगे। मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआईईटी), मेरठ के प्रो. अनुराग एरोन ने अपने संबोधन में सात दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने सप्ताह भर आयोजित होने वाले विभिन्न तकनीकी सत्रों, विशेषज्ञ व्याख्यानों एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण की जानकारी देते हुए कृषि, शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा मशीन लर्निंग की बढ़ती उपयोगिता पर विशेष प्रकाश डाला।

                  

उन्होंने कहा कि इन उभरती हुई प्रौद्योगिकियों का प्रभावी उपयोग कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों के कुशल प्रबंधन तथा वैज्ञानिक निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस संकाय विकास कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के कुल 34 शिक्षकगण प्रतिभाग कर रहे हैं। सात दिवसीय कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीनलर्निंग एवं डेटा एनालिटिक्स के सिद्धांतों, आधुनिक उपकरणों तथा व्यावहारिक अनुप्रयोगों से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान, संवादात्मक सत्र एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की रजत जयंती वर्ष तथा "सरदार पटेल 150: एकता एवं प्रगति का उत्सव" के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों की तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ करना तथा शिक्षण, अनुसंधान एवं नवाचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना है।

                    

कार्यक्रम के आयोजन सचिव के रूप में डॉ. अजीत कुमार सिंह, डॉ. सावन रावत, इंजी. खुशबू राय, डॉ. उत्तम शर्मा तथा डॉ. अजय कुमार अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रेरणा शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए माननीय कुलपति, सभी विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन डॉ. कृतिका सिंह सोमवंशी द्वाराकियागया।

आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संकाय विकास कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए ज्ञानार्जन, शैक्षणिक आदान-प्रदान तथा व्यावसायिक कौशल विकास का एक उत्कृष्ट मंच सिद्ध होगा तथा उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान में उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग को नई दिशा प्रदान करेगा।