कृषि विश्वविद्यालय में वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन तकनीकी पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन      Publish Date : 16/03/2026

कृषि विश्वविद्यालय में वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन तकनीकी पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

मृदा विज्ञान विभाग, कृषि महाविद्यालय, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा 30 दिवसीय वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन तकनीकी विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम सेना की विभिन्न कोर के जवानों एवं अधिकारियों के लिए शुभारम्भ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 मार्च से 15 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जाना है।

कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि माननीय कुलपति महोदय डॉ. त्रिवेणी दत्त जी ने वर्मीकम्पोस्ट के उत्पादन एवं महत्व पर प्रकाश डाला तथा उन्होंने कृषि की भूमिका में वर्मीकम्पोस्ट के महत्व को विस्ता पूर्वक बताया। माननीय कुलपति जी ने प्रशिक्षार्थियों एवं अन्य शिक्षकों व वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के परिवेश में वातावरण को स्वच्छ एवं संतुलित बनाए रखने, उच्च गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न, फल, सब्जियाँ, दूध उत्पादन तथा मृदा की जैविक, रासायनिक एवं भौतिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वर्मीकम्पोस्ट अत्यंत महत्वपूर्ण जैविक खाद है, जो पौधों को संतुलित मात्रा में पोषक तत्व उपलब्ध कराती है।

               

इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. रामजी सिंह जी ने माननीय कुलपति जी का स्वागत किया तथा अपने संबोधन में वर्मीकम्पोस्ट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आजकल शहरों में भी सजावटी पौधों एवं किचन गार्डन के लिए इसकी अत्यधिक मांग है।

निदेशक शोध डॉ. कमल खिलाडी जी ने वर्मीकम्पोस्ट पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती एवं जैविक खेती के लिए वर्मी कम्पोस्ट अत्यंत महत्वपूर्ण है।

निदेशक प्रसार डॉ. पी. के. सिंह जी ने बताया कि विकसित भारत/2047 के दृष्टिकोण से वर्मीकम्पोस्ट की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है।

डॉ. एस. पी. सिंह, विषय समन्वयक ने विस्तारपूर्वक 30 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि दस प्रदेशों से आये प्रशिक्षार्थी इस कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विषय से संबंधित व्याख्यान, प्रयोगशालाओं में प्रयोग तथा भ्रमण भी कराया जाएगा।

                   

मृदा विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. यू. पी. शाही जी ने वर्मीकम्पोस्ट पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए कहा कि पशु-पक्षियों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जैविक खादों की महत्वपूर्ण भूमिका है। डॉ. यू. पी. शाही जी ने प्रशिक्षण में आए मुख्य अतिथि माननीय कुलपति महोदय, कुलसचिव, सभी अधिकारियों, प्रशिक्षार्थियों, कर्मचारियों एवं प्रेस मीडिया का धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. रामजी सिंह, निदेशक शोध डॉ. कमल खिलाडी, निदेशक प्रसार डॉ. पी. के. सिंह, डॉ. सतेन्द्र कुमार, डॉ. योगेश कुमार, डॉ. नीरज कुमार तथा कृषि संकाय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं सदस्य आदि सभी लोग उपस्थित रहे।