
कृषि विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर संगोष्ठी का आयोजन Publish Date : 26/02/2026
कृषि विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर संगोष्ठी का आयोजन
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ में आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का उद्घाटन कार्यक्रम के अध्यक्ष कुलपति डॉ त्रिवेणी दत्त एवं मुख्य अतिथि मेरठ हापुण लोकसभा क्षेत्र के सांसद अरुण गोविंद ने दीप प्रज्वलित कर प्रारंभ किया। मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए सांसद अरुण गोविल ने कहा कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान को सांस्कृतिक पहचान का आधार माना गया है। आज के समय में भारतीय ज्ञान संस्कृति एवं रामायण जैसे महान ग्रन्थों से प्राप्त जीवन मूल्य राष्ट्र निर्माण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने युवाओं से भारतीय परंपरा संस्कार एवं नैतिक मूल्यों को आत्म साध करने का आवाहन किया। उन्होंने कहा जब तक हम अपनी सोच और अपने एटीट्यूड को ठीक नहीं करेंगे, तब तक हमारा सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता। ज्ञान और बुद्धि को एक मान लिया जाता है लेकिन दोनों के मध्य अंतर है। इसलिए दोनों का समावेश करते हुए विकास को सोचना होगा। संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्य हमारी जड़े हैं, इस पर भी हमें ध्यान देना होगा। हमें अपनी परंपराओं तथा तकनीक को जोड़कर विकसित भारत का निर्माण करना होगा। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के विकास के लिए ज्ञान बहुत जरूरी है।
हमें समग्र विकास के लिए उसे अपने जीवन में उतरना होगा। उन्होंने कहा कि माननीय प्रभाव प्रधानमंत्री ने हमें गुलामी की मानसिकता से बाहर निकाला है और देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। हम सभी लोगों को मिलकर भारत की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत करना होगा। अरुण गोविल सांसद ने कहा कि किताबें का चालान एकेडमिक नॉलेज में काम होता जा रहा है।

कार्यक्रम के अध्यक्ष कुलपति डॉक्टर त्रिवेणी दत्त ने कहा नई शिक्षा नीति 2020 के आने के बाद विश्वविद्यालय में लागू कर दी गई है। इससे पूरे देश में बच्चों का अब सर्वांगीण विकास हो सकेगा इसमें भारतीय परंपरागत ज्ञान को जोड़ा जा रहा है। साथ ही संस्कृत वेद, पुराण, महाभारत, गीता और रामायण से भी छात्रों को परंपरागत ज्ञान देने की शुरुआत की जाएगी। इससे छात्रों का सर्वांगीण विकास हो सकेगा। साथ ही परंपरागत कृषि का ज्ञान पर्यावरण का ज्ञान आदि छात्राओं को देकर विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य किया जाएगा। साथ ही वैदिक मैथमेटिक्स, कल्चरल आर्ट आदि की शिक्षा भी छात्र-छात्राओं को दी जाएगी।

संगोष्ठी के दौरान डॉ मनोज कुमार अग्रवाल प्रोफेसर एवं प्रचार एन यू एस महाविद्यालय ने भारतीय ज्ञान परंपरा एक परिचय डॉक्टर गजेंद्र सिंह स्कूल आफ मैथमेटिकल एंड कंप्यूटेशनल साइंसेज जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने भारतीय प्राचीन गणित में एल्गोरिथिमक आधार आर्यभट्ट एवं आचार पिंगला विषय पर व्याख्यान दिए। अंतिम सत्र में डॉक्टर परमानंद, बर्मन वरिष्ठ वैज्ञानिक सिर निष्पद नई दिल्ली ने वैज्ञानिक रूप से मान्य भारतीय पारंपरिक ज्ञान विषय पर अपने विचार रखें। कार्यक्रम में स्वागत भाषण कुल सचिव प्रोफेसर रामजी सिंह द्वारा तथा धन्यवाद प्रस्ताव डॉ विजय कुमार सिंह एवं कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर कृतिका सिंह सोमवंशी द्वारा किया गया।
उद्घाटन सत्र के दौरान कार्यक्रम का संक्षिप्त परिचय डॉक्टर अर्चना आर्य आयोजन एवं अध्यक्ष न्यू एजुकेशन पॉलिसी समिति द्वारा प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति डॉक्टर त्रिवेणी दत्त ने कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा ने केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान है बल्कि यह आधुनिक समाज के लिए मार्गदर्शन का भी कार्य करती है।

इस कार्यक्रम के दौरान कुलसचिव डॉक्टर रामजी सिंह, कार्यक्रम की संयोजक डॉक्टर अर्चना आर्य, डॉक्टर हितेश कुमार, डॉ महेश कुमार भारतीय, डॉक्टर श्वेता यादव, अमित शर्मा, दीपक गुप्ता, सनी गुप्ता, निर्देशक अधिष्ठाता, शिक्षक तथा छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इस संगोष्ठी के अवसर पर घर-घर रामायण कार्यक्रम के अंतर्गत श्री रामायण की 200 प्रशन का विद्वत वितरण किया गया।
