कृषि विश्वविद्यालय में किया गया एन.पी.एस.एस कार्यशाला/प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन      Publish Date : 20/02/2026

कृषि विश्वविद्यालय में किया गया एन.पी.एस.एस कार्यशाला/प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

एक दिवसीय राष्ट्रीय नाशीजीव निगरानी प्रणाली (एन.पी.एस.एस) कार्यशाला/प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ आयोजन-

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के उप-कार्यालय क्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, लखनऊ द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय नाशीजीव निगरानी प्रणाली (एन.पी.एस.एस) कार्यशाला/प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ में किया गयाI

                                                                                                                                 

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डॉ त्रिवेणी दत्त, कुलपति, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, विशिष्ट अतिथि डॉ जे. पी. सिंह, वनस्पति संरक्षण सलाहकार, भारत सरकार, सम्मानित अतिथिगण डॉ राम जी सिंह, कुल सचिव एवं डॉ विवेक, अधिष्ठाता (कृषि), सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, डॉ. निरंजन सिंह, प्रधान वैज्ञानिक, एनआरआईआईपीएम, नई दिल्ली, डॉ. सुनीता पाण्डेय, संयुक्त निदेशक एवं योजना प्रभारी आई. पी. एम. और डॉ. जी. पी. सिंह, संयुक्त निदेशक एवं प्रभारी अधिकारी, क्षे. के. ए. ना. प्र. केंद्र, लखनऊ, ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया I

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ त्रिवेणी दत्त, कुलपति, ने विकसित भारत में कृषि के महत्व को बताते हुए समृद्धि के शताब्दी पर्व में एन पी एस एस ऐप एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैट बोट के इस्तेमाल पर जोर दिया। कुलपति महोदय ने बताया कि देश के कृषि क्षेत्र में आई नई तकनीकी से भारतीय कृषि को नई दिशा मिली है, अतः हम सभी लोगो का दायित्व है कि इसका पूर्ण रूप से पालन कर कृषि के डिजिटलीकरण के लक्ष्य की प्राप्ति में सहयोग करे। विशिष्ट अतिथि डॉ जे. पी. सिंह, वनस्पति संरक्षण सलाहकार, भारत सरकार ने विभिन्न जनपदों से आये हुए कृषि रक्षा, उद्यान विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र के तकनीकी अधिकारियों को बताया कि राष्ट्रीय नाशीजीव निगरानी प्रणाली भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है जो नवीनतम  एआई/एमएल तकनीकों का उपयोगकर कीटों एवं बीमारियों की पहचान कर तत्काल समाधान प्रदान करता है।

                                                                                                                                 

व्याख्यान के दौरान वनस्पति संरक्षण सलाहकार ने कहा कि भारत सरकार के विभिन्न संस्थानों द्वारा जारी रिपोर्ट के आधार पर बताया कि रासायनिक कीटनाशक अवशेष की मात्रा कृषि उत्पादों में तीव्र गति से बढ़ रहा है I जिसकी वजह से अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में भारत से विभिन्न कृषि उत्पादों के निर्यात में बाधा उत्पन्न हो रही है I डा सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि रासायनिक कीटनाशकों का अनुचित प्रयोग मानव शरीर पर दुष्परिणाम  के साथ-साथ पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदेह है I

डॉ राम जी सिंह, कुल सचिव वर्तमान में चल रही ए आई सम्मेलन को ध्यान में रखते हुए बताया कि आने वाला समय एआई का है ए आई आधारित एन पी एस एस ऐप का उपयोग करके किसानों की लागत को कम कर सकते है।

                                                                                                                                 

डॉ विवेक, अधिष्ठाता, कृषि ने उन्नत तकनीकी से कृषि करने पर जोर दिया एवं प्रशिक्षणार्थियों को एन पी एस एस के उपयोग पर जोर दिया।

डॉ. निरंजन सिंह, प्रधान वैज्ञानिक, एनआरआईआईपीएम, ने सभागार में तकनीकी सत्र में उपस्थित विभिन्न जनपदों से आये हुए प्रशिक्षुओं को  एन.पी.एस.एस. एप के डाऊनलोड से लेकर प्रयोग विधि, प्रविष्टि, फोटो अपलोड एवं सलाह जारी करने तक पूरी विधियों की प्रस्तुति ऑनलाइन करके दिखायाI

डॉ. सुनीता पाण्डेय, संयुक्त निदेशक एवं योजना प्रभारी, आई. पी. एम. ने वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के कार्यों के बारे में विस्तार पूर्वक बताया और एन पी एस एस ऐप के सैद्धांतिक पहलुओं पर चर्चा की। डॉ सुनीता के सभी सम्मानित अतिथियों एवं प्रतिभागियों की उपस्थिति के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

डॉ. जी. पी. सिंह, संयुक्त निदेशक, प्रभारी अधिकारी क्षे. के. ए. ना. प्र. केंद्र ने आये हुए सम्मानित अतिथियों का स्वागत किया। एन पी एस एस के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह ऐप नशीजीव की सही पहचान, समय पर निदान और नुकसान से होने वाले पूर्वानुमान के बारे में बताता है।

        

डॉ गजे सिंह, प्रोफेसर, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, ने कार्यक्रम में प्रतिभाग किया एवं कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

डॉ आर एस सेंगर, प्रोफेसर एवं डॉ दिग्विजय सिंह, विभागाध्यक्ष कीट विज्ञान, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ ने कार्यक्रम संपन्न करने में विशेष सहयोग प्रदान किया।

कार्यक्रम का सफल संचालन शैलेश कुमार, सहायक निदेशक, क्षे. के. ए. ना. प्र. कें. लखनऊ ने किया।