
खाद एवं औषधि मशरूम उत्पादन तकनीकी पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन Publish Date : 08/12/2025
खाद एवं औषधि मशरूम उत्पादन तकनीकी पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आज उद्यमता विकास विषय पर 21 दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण खाद एवं औषधि मशरूम उत्पादन तकनीकी पर रक्षा मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली के सहयोग से सेना के जवानों के लिए आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के उपरांत सेना से रिटायर्ड होने के बाद जवान अधिक आय हेतु कृषि क्षेत्र में मशरूम उत्पादन का कार्य प्रारंभ कर सकेंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर के. के. सिंह ने किया।
कम खर्च में अधिक आय हेतु मशरूम व्यवसाय उपयोगी
-डॉक्टर के. के. सिंह
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर के. के. सिंह ने कहा कि मशरूम उत्पादन एक ऐसा क्षेत्र है जो कम लागत से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। मशरूम स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। आजकल बाजार में विभिन्न प्रकार की मशरूम को बेचकर काफी अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है और लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रोटीन की पूर्ति हेतु मशरूम अपने भोजन में शामिल कर ली गई है। इससे धीरे-धीरे देश में मशरूम की मांग भी बढ़ रही है।

उन्होंने कहा की मशरूम की मार्केटिंग पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशिक्षण के आयोजन में सक्सेसफुल एंटरप्रेन्योर के द्वारा लेक्चर करने की बात भी कही।
इस अवसर पर कुलसचिव प्रोफेसर रामजी सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि मशरूम को आसानी से झोपड़ी या कम लागत से छोटे कमरों में भी उगाया जा सकता है। उन्होंने बायो फोर्टीफाइड मशरूम को पैदा करने की बात कही, उन्होंने कहा कि अब ऐसी मशरूम को पैदा किया जा रहा है, जिसमें विटामिन डी की मात्रा अधिक होती है। मशरूम में विटामिन डी को यूवी किरणों की सहायता से बढ़कर तैयार किया जा रहा है। इस तरह की मशरूम के सेवन करने से बॉडी में कैल्शियम को अवशोषित करने की क्षमता बढ़ जाती है।

इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ गोपाल सिंह ने बताया कि इस उद्यमिता विकास पर आयोजित प्रशिक्षण में सेवा के 45 जवान भाग ले रहे हैं। इसमें उनका मशरूम की विभिन्न तकनीकों का प्रयोगात्मक रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वह भविष्य में एक अच्छे मशरूम उत्पादक साबित हो सके। कार्यक्रम में स्वागत भाषण अधिष्ठाता कृषि डॉक्टर विवेक धामा, संचालन डॉक्टर गोपाल सिंह तथा धन्यवाद प्रस्ताव निदेशक शोध डॉ कमल खिलाड़ी द्वारा किया गया। इस अवसर पर निदेशक ट्रेंनिंग प्लेसमेंट डॉ आर. एस. सेंगर, विभागाध्यक्ष डॉक्टर प्रशांत मिश्रा एवं प्रोफेसर रमेश यादव आदि भी उपस्थित रहे।
