
धीरे-धीरे बढ़ने वाली किडनी की बीमारियों को अनदेखा करना हो सकता है खतरनाक Publish Date : 08/11/2026
धीरे-धीरे बढ़ने वाली किडनी की बीमारियों को अनदेखा करना हो सकता है खतरनाक
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
किडनी मानव के शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो हमारे खून को साफ करने का काम करती है। इसके साथ ही यह शरीर से वेस्ट बाहर निकालना, बीपी कंट्रोल करना और पीएच लेवल संतुलित करने का काम भी हमारी किडनियां ही करती है। ऐसे में किडनी का ख्याल रखना और उसे गंभीर बीमारियों से बचाना बेहद जरूरी है। इतनी सब चीजों को ध्यान में रखते हुए हर साल जून महीने के तीसरे सप्ताह में वर्ल्ड किडनी कैंसर डे मनाया जाता है। किडनी से जुड़ी बीमारियों के संबंध में फोर्टिस अस्पताल नोएडा की डायरेक्टर और नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अनुजा पोरवाल कहती हैं कि बीते कुछ सालों में किडनी कैंसर के केस पहले से ज्यादा दिख रहे हैं। हर महीने करीब 10 से 15 मरीज ओपीडी में ऐसे आते हैं, जिनमें या तो बीमारी काफी पीछे हो चुकी होती है या लक्षण दिख रहे होते हैं।
समस्या के बढ़ जाने पर पता चलती है बीमारी
ज्यादातर मरीज 50 साल से ऊपर की आयु के लोग होते हैं, लेकिन वर्तमान समय में 40 से 45 की उम्र वाले लोग भी किडनी से जुड़ी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। कुछ में बीमारी उस वक्त पकड़ में आती है जब कोई और जांच चल रही होती है। जोखिम ज्यादातर मामलों में तब पता चलता है जब तकलीफ काफी बढ़ चुकी होती है। कई बार मरीज शुरुआत के लक्षणों को टाल देते हैं। जैसे पेशाब में खून, कमर में भारीपन या इलाज का खून, कमर में भारीपन या बीमारी ऑन्कोलॉजी जर्नल में एनआई (आनुवंशिक परामर्श) और ब्लड टेस्ट हल्का दर्द, थकान जो खत्म नहीं होती या अचानक वजन कम हो जाना। ये बातें अक्सर मामूली लगती हैं लेकिन इन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए।
हर महीने 10 से 15 किडनी कैंसर के सामने आ रहे मामले

डॉक्टरों की सलाह पेशाब में खून या लगातार थकान को हल्के में न लें
एनसीआर में बढ़ रही दिक्कत
नोएडा और आसपास के इलाकों में बढ़ता प्रदूषण, लोगों के धूम्रपान की आदत, बढ़ता वजन, शुगर और बीपी जैसी दिक्कतें आम हैं, जो धीरे-धीरे किडनी पर असर डालती हैं। कुछ फैक्ट्रियों में काम करने वालों में भी ऐसे केस देखे गए हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि डरने की जरूरत है लेकिन थोड़ा सतर्क रहना जरूरी है। डॉ. अनुजा पोरवाल कहती हैं कि बीमारी अगर समय रहते पकड़ में आ जाए तो इलाज संभव होता है। शुरुआती दौर में सर्जरी से ठीक किया जा सकता है और अगर ज्यादा फैल जाए तो दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है।
इन लक्षण पर कराएं जांच
अगर कभी पेशाब में खून दिखे, लगातार थकावट रहे, या वजन कम हो रहा हो तो बिना देरी जांच कराएं। मोटापा कम करें, धूम्रपान छोड़ें और पानी भरपूर मात्रा में पिएं। जिनके परिवार में पहले किडनी की बीमारी रही हो या जो स्मोकिंग करते हैं, उन्हें हर साल एक बार अल्ट्रासाउंड जरूर कराना चाहिए। जिससे कि समय रहते बीमारी का पता चल सके और समय पर ही इसका उपचार किया जा सके।
जीवन शैली में सुधार कर बच सकते हैं किडनी कैंसर से
एनसीआर में किडनी की समस्याओं से जूझने वाले लोगों की संख्या पर बढ़ रही है। इसमें सबसे अधिक किडनी कैंसर के मामले चिंताजनक हैं। बीते कुछ सालों में किडनी कैंसर के मामलों में इजाफा देखा जा रहा है। फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में नेफ्रोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. संकेत किशोर पाटिल के मुताबिक इसके पीछे सबसे बड़ी वजह धूम्रपान और बढ़ता मोटापा है। जैसे-जैसे लोगों में अनियमित वजन और तंबाकू के सेवन चलन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे किडनी कैंसर के मरीजों की गिनती भी बढ़ रही है।

पहले ये बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों में देखी जाती थी लेकिन अब बदलती जीवनशैली की वजह से 40-60 की उम्र में भी लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। पुरुषों में इसके होने की संभावना महिलाओं से लगभग दोगुनी रहती है। प्यारे लाल शर्मा, जिला अस्पताल मेरठ के डॉ0 दिव्यांशु सेंगर ने बताया कि वजन को कंट्रोल में रखें, तंबाकू से दूर रहें, फल-सब्जियां ज्यादा खाएं और ब्लड प्रेशर का सही स्तर बनाए रखें। छोटी-छोटी सावधानियां बड़ा खतरा टाल सकती हैं। अगर किसी तरह के लक्षण दिखें तो देरी न करें, अविलम्ब जांच जरूर करवाएं।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।