दीपावली पर लापरवाही हो सकती है- घातक पटाखे छुड़ाते समय रहे सतर्क      Publish Date : 07/11/2026

दीपावली पर लापरवाही हो सकती है- घातक पटाखे छुड़ाते समय रहे सतर्क

                                                                                                       डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एव मुकेश शर्मा

दीपावली का पर्व खुशियों का प्रतीक माना जाता है, लेकिन पटाखे छुड़ाते समय यदि थोड़ी सी भी असावधानी रहती है तो वह परेशानी का कारण भी बन सकती है। इसके अलावा, अत्यधिक पटाखे छुड़ाए जाने के कारण पटाखों का धुआं धूल और बढ़ता वायु प्रदूषण स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालता है और यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी हानिकारक होता है। पटाखे से होने वाली दुर्घटनाओं से बचाव को लेकर ध्यान रखना होगा। जरा सी सतर्कता आपको गंभीर बर्न और स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है। - डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर, चिकित्सा अधिकारी प्यारे लाल शर्मा, जिला अस्पताल मेरठ ने बताया कि यदि थोड़ी सी सावधानी रखी जाए तो आप अपने शरीर को पटाखे छुड़ाते समय होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर ने बताया कि जलने पर बर्फ का प्रयोग करना घातक होता है।

  • तेज ध्वनि के पटाखों से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए सतर्क रहकर दीपावली पर पटाखे चलाएं।

                                 

पटाखे कैसे कर सकते हैं नुकसान

  • पटाखे तेज आवाज और हवा के फैले प्रदूषण, धुएं, धूल और अगरबत्ती धूप के कणों के कारण कान, नाक और गले से जुड़ी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
  • पटाखों, फल्लझड़ियों और घरों में जलाए जाने वाली अगरबत्तियों का धुआं नाक, गले में तेज जलन, खरास, खांसी और सांस लेने की परेशानी बन सकता है।
  • तेज आवाज के कारण कान के अन्दर मौजूद कॉकिलियर हेयर सेल्स को नुकसान हो सकता है।कानों में लगातार सिटी घंटी या भनभनाहट जैसी आवाज सुनाई दे सकती है।
  • सौ डेसिबिल से अधिक तीव्र आवाज वाले पटाखों से कानों को काफी नुकसान हो सकता है। इससे सुनने की क्षमता भी कम हो सकती है इसलिए इनसे दूरी बनाकर रखें।
  • पटाखों के धुएँ से आँखों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। ये आंखों में ड्राइनेस और बेचैनी पैदा कर सकते हैं।
  • यदि आँख में चिंगारी चली जाए तो उसे भूलकर भी हाथों से आंखों को मसले नहीं। इससे आँखों की नसें डैमेज हो सकती हैं और पुतली पर्दे को भी नुकसान पहुंच सकता है।
  • चिंगारी आँख में जाने के तुरंत बाद आई लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करें। आतिशबाजी के दौरान बच्चों को प्रोटेक्टिव ग्लास अर्थात सुरक्षात्मक चश्मे को पहनाए, जिससे बच्चों के साथ आप स्वयं पटाखे चलाएं।
  • बच्चों की आंखों को नुकसान न पहुंचे और कोशिश करनी चाहिए कि जब बच्चे पटाखे चला रहे हो तो उस दौरान घर के बड़े लोग भी उनके साथ मौजूद रहे।
  • अत्यधिक धुएँ और प्रदूषण से आँखों में जलन, लालिमा, और पानी आने की समस्या हो सकती है।धुएं से दूर रहें और आंखों को साफ पानी से सोने से पहले अच्छी तरह से धो ले।
  • पटाखे के धुएँ और धूल से तुचा में लालिमा, खुजली भी हो सकती है। इसके लिए आप नारियल तेल या अच्छे मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • पटाखे के धुएँ और धूल से तुचा में लालिमा, खुजली भी हो सकती है। नारियल तेल या अच्छे मॉइस्चराइजर का उपयोग करें।
  • पटाखों में मौजूद खतरनाक केमिकल त्वचा को जला सकते हैं, जिससे सूखापन, खुजली और लाल चत्ते जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
  • जले हुए इस स्थान को ठंडे पानी से धोएं व कोई एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं बर्फ टूथपेस्ट या घी का इस्तेमाल न करें, बर्फ लगाने से खून के थक्के बन सकते हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल ना करें।
  • शरीर पर किसी भी प्रकार की एलर्जी, खुजली या जलन होने पर स्वयं उपचार करने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लें और उसके उपरांत ही कोई इलाज प्रारंभ करें।

                                        

डॉ॰ दिव्यांश सेंगर ने बताया यदि दीपावली पर उपरोक्त बातों को ध्यान में रखा जाएगा तो आप अपने शरीर को स्वस्थ बनाकर रख सकेंगे। इसलिए दीपावली पर पटाखे छुड़ाते समय लापरवाही न बरतें, क्योंकि यह काफी घातक भी साबित हो सकती है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।