
मेटाबॉलिक जोखिम बढ़ा रहे गैर संचारी रोग का खतरा Publish Date : 31/10/2026
मेटाबॉलिक जोखिम बढ़ा रहे गैर संचारी रोग का खतरा
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
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शारीरिक गतिविधि की कमी, तंबाकू और शराब का सेवन जैसे तत्व हैं प्रमुख जोखिम के कारक:-
आज के समय में गैर-संचारी रोग (एनसीडी) लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। इनमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी बीमारियां शामिल हैं। इन बीमारियों का खतरा बढ़ाने वाले कई कारण हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली से जुड़े हुए होते हैं। खराब खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, तंबाकू और शराब का सेवन तथा बढ़ता वजन ऐसे प्रमुख जोखिम कारक हैं, जिन पर समय रहते ध्यान देकर एनसीडी से प्रभावी बचाव किया जा सकता है। राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग निगरानी सर्वेक्षण (एनएनएमएस) 2017-18 के माध्यम से वयस्क आबादी में एनसीडी से जुड़े जोखिम कारकों की राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति का आकलन किया गया। सर्वे में 18 से 69 वर्ष की आयु वर्ग के वयस्कों को शामिल किया गया था। इस सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि देश में मेटाबॉलिक जोखिम कारकों का स्तर चिंता का विषय है।

सर्वे के अनुसार, 28.5 प्रतिशत वयस्कों का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ पाया गया। वहीं 9.3 प्रतिशत लोगों में ब्लड ग्लूकोज का स्तर बढ़ा हुआ था। इसके अलावा 26.1 प्रतिशत लोग ओवरवेट जबकि 6.2 प्रतिशत मोटापे से प्रभावित पाए गए। सेंट्रल ओबेसिटी यानी पेट के आसपास अधिक चर्बी की समस्या 32.2 प्रतिशत वयस्कों में देखी गई। पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी को कई मेटाबॉलिक बीमारियों के बढ़ते खतरे से जोड़कर देखा जाता है।
सर्वे में केवल वजन और ब्लड प्रेशर जैसे मेटाबॉलिक जोखिम ही नहीं बल्कि जीवनशैली से जुड़े दूसरे पहलुओं की भी जानकारी जुटाई गई। इसमें सामने आया कि 32.8 प्रतिशत वयस्क तंबाकू का सेवन कर रहे थे, जबकि 15.9 प्रतिशत लोगों ने शराब के सेवन की जानकारी दी। इससे यह साफ होता है कि एनसीडी की रोकथाम के लिए केवल दवाओं पर निर्भर रहना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि अपनी जीवनशैली में व्यापक बदलाव करने भी उतने ही जरूरी है।

शारीरिक सक्रियता की कमी भी एक बड़ी चिंता के रूप में सामने आई। सर्वे में 41.3 प्रतिशत वयस्क शारीरिक रूप से निष्क्रिय पाए गए। यानी बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा की जिंदगी में पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं कर रहे थे। खानपान की स्थिति भी बेहतर नहीं थी। करीब 98.4 प्रतिशत वयस्क रोजाना पांच सर्विंग लगभग (400-500 ग्राम) से कम फल और सब्जियां खा रहे थे। वहीं, आबादी का औसत नमक सेवन करीब 8 ग्राम प्रतिदिन पाया गया।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।