तंबाकू व बदलती जीवनशैली से बढ़ता कैंसर का खतरा      Publish Date : 28/10/2026

तंबाकू व बदलती जीवनशैली से बढ़ता कैंसर का खतरा

                                                                                                  डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

कैंसर की बीमारी का होना आजकल लोगों में एक आम बात होती जा रही है, जिसका कोई एक अकेला कारण नहीं होता है। यह मुख्य रूप से जीवनशैली, पर्यावरण और आनुवांशिक कारणों से जुड़ा हुआ होता है। इसमें सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और तंबाकू का सेवन करने से मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण है।

चिकित्सक बताते हैं कि अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन, जंक फूड, और वजन बढ़ने (मोटापे) से कई तरह के कैंसर का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। प्रदूषित हवा में सांस लेना, सूरज की पराबैंगनी किरणों से सम्पर्क और रेडियोएक्टिव विकिरण कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। सरकारी के दिशा निर्देशों के अनुसार सरकारी अस्पतालों भी अब नियमित रूप से ओपीडी स्क्रीनिंग और कैंप लगाकर संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है।

अस्पतालों में कैंसर की जांच पर जोर

                               

हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ0 दिव्यांशु सेंगर ने बताया कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन 70 स्क्रीनिंग की जा रही है, जिसमें स्तन और गर्भाशय ग्रीवा की जांच 80 से 90, पीएपी जांच 165, ओपीएमडी 40, स्तन में गांठ की जांच 40 प्रति माह हो रही है। जिला अस्पताल, मेरठ में कैंसर की सुविधाओं में मैमोग्राम, प्रयोगशाला सुविधाएं, छाती का एक्स-रे शामिल है। जिसके लिए एक मेडिकल ऑन्कोलॉजी टीम काम कर रही है। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान में हर महीने 20 से 25 मरीज कैंसर पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। यहां पर सबसे अधिक मरीज मुंह के कैंसर के मरीज आ रहे हैं, स्मोक के मरीज गांव से आते हैं जो हुक्के का सेवन करते हैं।

                                       

डॉ0 सेंगर ने बताया कि जिन मरीजों में कैंसर की पुष्टि हो जाती है उनको बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिन मरीजों में कैंसर होने की संभावना होती है उनको दवा देकर उनका इलाज किया जा रहा है ताकि यह कैंसर का रूप न धारण कर सके।

डॉ0 नेहा शर्मा, गायनोलॉजिस्ट ने बताया कि महिलाओं के गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में होने वाला एक खतरनाक कैंसर है। यह बीमारी तब शुरू होती है जब सर्विक्स की सामान्य कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर होकर असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और वह एक ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। एचपीवी और हेपेटाइटिस बी या सी जैसे कुछ खास वायरस और बैक्टीरिया भी कैंसर का कारण बन सकते हैं। परिवार में किसी को पहले कैंसर होने पर, डीएनए में मिले दोषों के कारण अगली पीढ़ी में भी इसका जोखिम रहता है और ज्यादा मात्रा में शराब पीने से भी शरीर में कैंसर की कोशिकाएं पनप सकती हैं।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।