मिलावट और प्रदूषण बच्चों से बुजुर्गों तक के लिए खतरनाक      Publish Date : 20/10/2026

मिलावट और प्रदूषण बच्चों से बुजुर्गों तक के लिए खतरनाक

                                                                                                      डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

देश में मिलावटखोरी और प्रदूषण ने आम नागरिक की थाली और सांस दोनों को संकट में डाल दिया है। दूध, पनीर, मसाले, घी, तेल और अब नकली अंडों की जब्ती ने खाद्य सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

दूसरी ओर हवा में बढ़ता प्रदूषण और भोजन और पानी में माइक्रोप्लास्टिक व रसायनों की मौजूदगी ने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र को कैंसर, हार्ट डिजीज, लीवर और किडनी डैमेज और हार्मोनल डिसऑर्डर जैसे जोखिमों से दो-चार कर दिया है। अधिकृत सरकारी व वैश्विक संस्थाओं के आंकड़े इस खतरे की तीव्रता को स्पष्ट करते हैं।

                                 

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि भारत के सामने यह साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी है, जिसे अगर समय रहते न संभाला गया तो स्थिति आने वाले वर्षों में विस्फोटक रूप ले सकती है। भारत में खाद्य मिलावट का स्तर पिछले एक दशक में लगातार बढ़ा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में देशभर से लिए गए नमूनों में से लगभग 27% खाद्य पदार्थ मिलावटी या असुरक्षित पाए गए। सबसे ज्यादा असुरक्षित श्रेणियों में दूध व डेयरी उत्पाद, मसाले, खाद्य तेल, मिठाइयां, अनाज पाउडर और पैकेज्ड स्नैक्स शामिल हैं।

2010 से 2025 के बीच मिलावटखोरी में आई तेजी

                            

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और राज्य खाद्य सुरक्षा विभागों की वार्षिक रिपोर्टों के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि 2010 से 2025 के बीच खाद्य मिलावट के मामलों में लगातार और तेज वृद्धि हुई है। वर्ष 2010-11 में देशभर से कुल लगभग 55 हजार खाद्य नमूने जांचे गए थे, जिनमें से 12-13% नमूने असुरक्षित, निम्न-स्तरीय या मिलावटी पाए गए। अगले दशक में जांच की संख्या भी बढ़ी और उल्लंघन का प्रतिशत भी। 2015-16 तक जांचे गए नमूनों की संख्या बढ़कर लगभग 80 हजार हुई, जिनमें 20% से अधिक नमूने मिलावटी या असुरक्षित पाए गए। 2023-24 की नवीनतम रिपोर्ट बताती है कि देशभर में एक लाख से अधिक नमूने लिए गए और उनमें से 27% नमूने मिलावटी पाए गए।

प्रदूषण : सांसों में घुल रहा जहर

                                

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में भारत के 45 से अधिक शहर लगातार खतरनाक एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई-300 से ऊपर) में रहे। दिल्ली-एनसीआर, पटना, लखनऊ, कानपुर, मुजफ्फरपुर, फरीदाबाद और भिवाड़ी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2024 के अनुसार भारत में सूक्ष्म कण (पीएम-2.5) की मात्रा डब्लूएचओ की सुरक्षित सीमा से लगभग 7 गुना अधिक है। द लैंसेट के मुताबिक देश में हर साल लगभग 16 लाख समयपूर्व मौतें वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के कारण होती हैं।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।