कंसीव नहीं कर पाने वाली महिलाओं के आवश्यक यह 5 टेस्ट      Publish Date : 18/10/2026

कंसीव नहीं कर पाने वाली महिलाओं के आवश्यक यह 5 टेस्ट

                                                                                              डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

क्या आप पिछले काफी समय से कंसीव करने के लिए प्रयास कर रही हैं, लेकिन आपके सारे प्रयास लगातार विफल हो रहे हैं? यदि हाँ, और ऐसा ही है तो आपको स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर के द्वारा बताए इन 5 टेस्ट को अवश्य ही करवाने चाहिए, जिससे कि आपको यह पता चल सके कि आखिर आप कंसीव कर पाने में क्यों सफल नहीं हो पा रही हैं।

कंसीन न कर पाने के प्रमुख कारण

यह एक अपने आप में प्राकृतिक ही है कि माँ बनना प्रत्येक महिला का बहुत बड़ा सपना होता है। लेकिन कई बार बहुत सी महिलाओं के सही उम्र के होते हुए भी गर्भधारण नहीं हो पाती है। अगर किसी महिला की उम्र 30 साल से कम है और 1 वर्ष तक लगातार प्रयास करने के बाद भी प्रेगनेंसी नहीं ठहर पा रही है, तो उन्हें डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है। ऐसे मामलों में कुछ महत्वपूर्ण जांचें इनफर्टिलिटी के कारणों का पता लगाने में आपकी मदद कर सकती है। तो आइए इसके सम्बन्ध में हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ और उनके सहयोगी से जानते हैं कि वह कौन से टेस्ट हैं जिनका इंफर्टिलिटी का पता लगाने के लिए करवाना बहुत जरूरी होता है।

हॉर्मोन्स प्रोफाइल टेस्ट

इसके लिए सबसे पहला टेस्ट है हार्मोन प्रोफाइल टेस्ट। विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं को गर्भधारण करने के लिए उनके शरीर में हॉर्मोन्स का संतुलित होना बहुत आवश्यक होता है। यह टेस्ट थायराइड हॉर्मोन्स, प्रोलेक्टिन, एफएसएच (FSH), एलएच (LH) और अन्य हॉर्मोन्स की जांच से पता चलता है कि ओवुलेशन सही तरीके से हो रहा है या नहीं। क्योंकि कई बार हॉर्मोनल असंतुलन भी कंसीव ना कर पाने का एक प्रमुख कारण हो सकता है।

एएमएच टेस्ट

                                          

एंटी-म्यूलरियन हॉर्मोन्स (AMH) टेस्ट, किसी महिला को कंसीव करने के लिए एक बेहद जरूरी टेस्ट माना जाता है। यह टेस्ट महिला के अंडाशय में मौजूद अंडों की संख्या और उनकी गुणवत्ता का पता लगाने में मदद करता है। यह टेस्ट विशेष रूप से ऐसी महिलाओं के लिए जरूरी होता है जो 30 वर्ष की उम्र के बाद गर्भ धारण करने की योजना बना रही होती हैं या जिन्हें लंबे समय से प्रयास करते रहने के बाद भी गर्भ धारण करने में सफलता नहीं मिल पा रही है।

पेल्विक अल्ट्रासाउंड

इसे ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड भी कहा जाता है। पेल्विक अल्ट्रासाउंड के जरिए यूट्रस, ओवरी और अन्य प्रजनन अंगों की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। इसी जांच से पीसीओएस, फाइब्रॉयड और सिस्ट आदि का भी पता लगाया जा सकता है, जो आपके गर्भधारण करने में एक बड़ी बाधा बन सकते है।

प्रोजेस्टेरोन टेस्ट

इस जांच से पता चलता है कि ओवुलेशन हुआ है या नहीं। आमतौर पर इस टेस्ट को पीरियड्स शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले कराया जाता है।

एचएसजी टेस्ट

                              

यह एक खास तरह की एक्स-रे जांच होती है, जिसके द्वारा यह देखा जाता है कि प्रभावित महिला की फैलोपियन ट्यूब खुली है या नहीं? अगर ट्यूब में ब्लॉकेज हो तो स्पर्म और अंडाणु का मिलान सही तरीके से नहीं हो पाता है, जिससे प्रेगनेंसी ठहरने में समस्या आती है।

ब्लड टेस्ट

इसके अलावा ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन, विटामिन D समेत अन्य जरूरी ब्लड टेस्ट कराने की सलाह मरीज विशेष के लिए दी जाती है। अनियंत्रित डाइबिटीज, एनीमिया, विटामिन डी की कमी आदि भी ऐसी ही स्वास्थ्य समस्याएं हैं जो कि आपकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।