
मोटापा कम करने वाली दवाओं के दुष्प्रभाव Publish Date : 05/10/2026
मोटापा कम करने वाली दवाओं के दुष्प्रभाव
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
- वजन घटाने वाली दवा से उखड़ रहे मरीजों के नाखून।
- मोटापा कम करने और टाइप-2 मधुमेह के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का असर नाखूनों पर भी पड़ रहा है।
यूरोपियन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी एंड वेनेरोलॉजी में पेश एक अध्ययन के अनुसार, ये दवाएं लेने वाले लोगों में नाखून दिखने होने की समस्या आम मरीजों की तुलना में चार गुना पाई गई। फ्रांस, अमेरिका, ब्राजील और मेक्सिको के विशेषज्ञों ने यह अध्ययन किया है। इसमें वजन घटाने वाली दवा लेने वाले 575 लोगों की तुलना 1,329 ऐसे लोगों से की गई, जिन्होंने कभी ये दवाएं नहीं ली थीं। नतीजों में 39 फीसदी दवा लेने वाले लोगों में नाखून अलग होने की समस्या मिली, जबकि दवा न लेने वालों में यह आंकड़ा 9 फीसदी था।

इसके अलावा, जीएलपी-1 दवा लेने वाले 66 फीसदी लोगों में नाखूनों से जुड़ी कम से कम एक समस्या देखी गई। इनमें नाखूनों का रंग बदलना भी शामिल था। विशेषज्ञों के अनुसार, ये दवाएं शरीर के ऊतकों में सूजन पैदा करती हैं और पोषण के अवशोषण को प्रभावित करती हैं, जिससे नाखूनों की जड़ों को पोषण मिलना कम हो जाता है और वे कमजोर होकर त्वचा छोड़ने लगते हैं।
इसी अध्ययन से जुड़ी एक अन्य रिसर्च में बालों से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। 50 फीसदी GLP-1 मरीजों ने सामान्य से ज्यादा बाल झड़ने की शिकायत की। कई लोगों में सिर की त्वचा में खुजली, लालपन और परत जमने जैसी समस्याएं देखी गईं।
चिकित्सकों ने सलाह दी है कि नाखून या बालों में बदलाव दिखने पर मरीज खुद से दवा बंद न करें। उन्हें डॉक्टर को जानकारी देनी चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब यह पता लगाने के लिए आगे अध्ययन कर रहे हैं कि ये समस्याएं कब शुरू होती हैं और क्या इलाज पूरा होने के बाद ठीक हो सकती हैं।
- ध्यान रहे कि सही डॉक्टरी मार्गदर्शन और एहतियात के साथ ही इन साइड-इफेक्ट से बचा जा सकता है।
भारत में तेजी से बढ़ रहा है इन दवाओं का दायरा
भारत में वजन घटाने वाली दवाओं (जीएलपी-1) का मासिक खर्च 14 से 26 हजार रुपये प्रति माह है। अत्यधिक महंगी होने के कारण ये दवाएं वर्तमान में केवल उच्च आय वर्ग और बड़े मेट्रो शहरों तक ही सीमित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत में इन दवाओं का इस्तेमाल का दायरा तेजी से बढ़ने की संभावना है। इनकी जेनेरिक कॉपियां जल्द बाजार में आ सकती हैं।
उम्र के अनुसार नियम

- 18–30 वर्ष: व्यायाम और संतुलित डाइट पर ध्यान दें।
- 30–40 वर्ष: फाइबर की मात्रा बढ़ाएं और मीठा कम करें।
- 40–50 वर्ष: प्रोटीन और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर ध्यान दें।
- 50–60 वर्ष: तेजी के बजाय धीरे-धीरे वजन कम करें।
- 60 वर्ष से ऊपर: मांसपेशियों और ताकत को बनाए रखें।
- हर उम्र में: पर्याप्त नींद, पानी और शारीरिक गतिविधि वजन नियंत्रित रखने में मददगार।
इनका रखें ध्यान
- नाखून टूटना या रंग बदलना दिखे तो डॉक्टर से सलाह लें।
- नाखूनों को बहुत छोटा काटने या बार-बार छीलने से बचें।
- ज्यादा केमिकल या हार्ड नेल प्रोडक्ट का इस्तेमाल न करें।
- जीएलपी-1 दवा लेते समय नाखून में बदलाव दिखे तो डॉक्टर को बताएं।
- 01 हजार से भी ज्यादा मरीजों के स्वास्थ्य डेटा का किया विश्लेषण।
- मरीजों में नाखूनों के अलग होने का खतरा चार गुना बढ़ा।
- चिकित्सकों की सलाह के बिना दवाएं न खाएं।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।