
इकोकार्डियोग्राम परीक्षण क्या है और इसके लाभ Publish Date : 04/10/2026
इकोकार्डियोग्राम परीक्षण क्या है और इसके लाभ
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
इकोकार्डियोग्राम (जिसे इको या हार्ट अल्ट्रासाउंड भी कहा जाता है) एक ऐसा परीक्षण है जो आपके हृदय की संरचना और कार्यप्रणाली की जांच करता है। इको से हृदय की कई समस्याओं का निदान किया जा सकता है, जिनमें कार्डियोमायोपैथी और वाल्व रोग शामिल होते हैं। इको परीक्षण कई प्रकार के होते हैं, जिनमें ट्रांसथोरेसिक और ट्रांससोफेजियल शामिल हैं। अपने डॉक्टर से परामर्श करके पता करें कि आपके लिए कौन सा प्रकार सबसे अधिक उपयुक्त है।
इकोकार्डियोग्राम आपके हृदय का अल्ट्रासाउंड है। सबसे आम प्रकार, टीटीई, आपकी छाती की सतह पर किया जाता है। टीईई आपकी छाती के अंदर की तस्वीरें लेता है।
इकोकार्डियोग्राम क्या है?
इकोकार्डियोग्राम आपके हृदय का अल्ट्रासाउंड परीक्षण है। इसमें उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों का उपयोग करके हृदय की धड़कन की गतिशील तस्वीरें बनाई जाती हैं। यह परीक्षण आपके स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को जन्मजात और बाद में विकसित होने वाली हृदय संबंधी कई बीमारियों के निदान और उपचार में मदद कर सकता है। इस परीक्षण के अन्य नाम इको, हार्ट इको और हार्ट/कार्डियक अल्ट्रासाउंड आदि के नाम से भी जाना जाता हैं।
इकोकार्डियोग्राम से आपके हृदय की संरचना और पंप करने की क्षमता का पता चलता है। इससे हृदय के भीतर रक्त प्रवाह का भी पता चलता है, जिसमें इसके प्रत्येक वाल्व से होकर गुजरने वाला रक्त प्रवाह भी शामिल होता है।
हृदय रोग विशेषज्ञ कई कारणों से इकोकार्डियोग्राम कराने का आदेश देते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:
- अपने लक्षणों का कारण पता करें।
- निदान की पुष्टि करें।
- अपने हृदय की कार्यप्रणाली का आकलन करें।
- वाल्व रोग जैसी किसी स्थिति की निगरानी करें।
- आपको हृदय शल्य चिकित्सा के लिए तैयार करना।
- सर्जरी के परिणाम की जांच करें।
आपके डॉक्टर आपको बताएंगे कि आपको यह टेस्ट क्यों करवाना है और इससे आपको क्या लाभ हो सकता है। अधिकतर इकोकार्डियोग्राम नॉन-इनवेसिव होते हैं, यानी आपके शरीर में कुछ भी नहीं डाला जाता। कुछ मामलों में, आपको अधिक इनवेसिव प्रकार के इकोकार्डियोग्राम की भी आवश्यकता हो सकती है, जिसमें एक छोटा उपकरण आपके शरीर के अंदर से तस्वीरें लेता है।
इकोकार्डियोग्राम कितने प्रकार के होते हैं?

ट्रांसथोरासिक इकोकार्डियोग्राम (टीटीई): यह सबसे आम प्रकार है और अधिकतर लोग इकोकार्डियोग्राम करवाने का मतलब इसी से निकालते हैं। इसमें डॉक्टर आपके सीने पर एक छोटा सा उपकरण रखकर आपके दिल की तस्वीरें लेते हैं। यह प्रक्रिया त्वरित और दर्द रहित होती है।
ट्रांससोफेजियल इकोकार्डियोग्राम (टीईई): इस प्रकार की जांच में आपके शरीर के अंदर से आपके हृदय की तस्वीरें ली जाती हैं। डॉक्टर बेहोशी की दवा देकर एक छोटे से उपकरण को आपके गले से नीचे ले जाते हैं। यह परीक्षण टीटीई की तुलना में बेहतर गुणवत्ता वाली तस्वीरें देता है और आपके हृदय के पिछले हिस्से को बेहतर ढंग से दिखाता है।
व्यायाम तनाव इकोकार्डियोग्रामः यह परीक्षण दर्शाता है कि जब आपका हृदय कड़ी मेहनत कर रहा होता है तो वह कैसे कार्य करता है। हृदय गति बढ़ाने के लिए आप ट्रेडमिल या स्थिर साइकिल का उपयोग करते हैं। यह परीक्षण सक्रिय रहने के दौरान होने वाले लक्षणों के कारण का निदान करने में सहायक होता है।
डोबुटामाइन स्ट्रेस इकोकार्डियोग्रामः यह परीक्षण भी यह जांचता है कि तनाव की स्थिति में आपका हृदय कैसे काम करता है। लेकिन हृदय गति बढ़ाने के लिए व्यायाम का उपयोग करने के बजाय, आपका डॉक्टर आपको ऐसा करने के लिए दवा देता है। यह तब उपयोगी होता है जब आप ट्रेडमिल या साइकिल पर व्यायाम नहीं कर सकते।
इकोकार्डियोग्राफी कैसे काम करती है?
इकोकार्डियोग्राम में अल्ट्रासाउंड तकनीक का उपयोग करके हृदय की गति की छवियां बनाई जाती हैं। ट्रांसड्यूसर नामक एक उपकरण आपके सीने से ध्वनि तरंगें भेजता है। ये तरंगें हृदय के ऊतकों से टकराकर प्रतिध्वनि उत्पन्न करती हैं। ट्रांसड्यूसर इन प्रतिध्वनियों को ग्रहण करता है और उन्हें कंप्यूटर पर वापस भेजता है।
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इन प्रतिध्वनियों का उपयोग करके आपके हृदय की तस्वीरें बनाता है। ये तस्वीरें गतिशील होती हैं, जिससे आपके स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को यह देखने में मदद मिलती है कि आपका हृदय कैसे धड़कता है। इन तस्वीरों को आसानी से सहेजा जा सकता है ताकि आपका प्रदाता इनकी समीक्षा कर सके और इन्हें आपके मेडिकल रिकॉर्ड के हिस्से के रूप में रख सके।
सभी इकोकार्डियोग्राम के लिए यही मूल तकनीक समान है। लेकिन डॉक्टर अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने या आपके हृदय के किसी विशिष्ट पहलू, जैसे कि वाल्वों के माध्यम से रक्त प्रवाह, की जांच करने के लिए कुछ विशेष तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं। ऐसी तकनीकों के उदाहरणों में शामिल हैं:
दो-आयामी (2D) अल्ट्रासाउंडः यह एक आम तकनीक है। इससे 2D छवियां बनती हैं जो कंप्यूटर स्क्रीन पर ‘स्लाइस’ के रूप में दिखाई देती हैं। इन स्लाइस को एक साथ जोड़कर 3D संरचना बनाई जाती है।
त्रिविमीय (3D) अल्ट्रासाउंडः प्रौद्योगिकी में प्रगति ने 3D इमेजिंग को अधिक कुशल और उपयोगी बना दिया है। नई 3D तकनीकें सटीकता में सुधार कर सकती हैं और आपके हृदय के विभिन्न भागों को अलग-अलग कोणों से दिखा सकती हैं।
डॉप्लर अल्ट्रासाउंडः यह तकनीक आपके रक्त प्रवाह की गति और दिशा को दर्शाती है। यह आपके हृदय की मांसपेशियों की गति को भी ट्रैक कर सकती है, जो आपके चिकित्सक को आपके हृदय की कार्यप्रणाली को समझने में सहायक हो सकती है।
स्ट्रेन इमेजिंगः यह तकनीक हृदय की मांसपेशियों के सिकुड़ने और शिथिल होने के तरीके में होने वाले परिवर्तनों को दर्शाती है। इससे हृदय संबंधी कुछ समस्याओं के शुरुआती लक्षणों का पता लगाया जा सकता है।
कॉन्ट्रास्ट इमेजिंगः आपका डॉक्टर आपकी नसों में से किसी एक में कॉन्ट्रास्ट डाई नामक पदार्थ इंजेक्ट करता है। यह पदार्थ छवियों में दिखाई देता है और आपके हृदय की बारीकियों को उजागर करता है।
इको स्कैन में विकिरण का उपयोग नहीं होता है, जिसे कई लोग एक लाभ मानते हैं। यह एक्स-रे और सीटी स्कैन जैसी जांचों से अलग है, जिनमें थोड़ी मात्रा में विकिरण का उपयोग होता है।
परीक्षण की तैयारी
तैयारी इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस प्रकार का इकोकार्डियोग्राम करवा रहे हैं। आपका डॉक्टर आपको विशिष्ट निर्देश देगा। आपको निम्नलिखित करने की आवश्यकता हो सकती हैः
- परीक्षा से कुछ समय पहले कैफीन, शराब, तंबाकू या अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
- अपनी कुछ दवाइयां लेना बंद कर दें (ऐसा कभी न करें जब तक कि आपका डॉक्टर आपको ऐसा करने के लिए न कहे)।
- अगर आप व्यायाम करने वाले हैं तो आरामदायक कपड़े और जूते पहनें।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।