टाइट कपड़े पहनने से बढ़ जाती है ऐसीडिटी की समस्या      Publish Date : 15/09/2026

टाइट कपड़े पहनने से बढ़ जाती है ऐसीडिटी की समस्या

                                                                                                   डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

हम अक्सर एसिडिटी समस्या को गलत खानपान और जीवनशैली के तरीकों से जोड़कर हमेशा देखते हैं। लेकिन यह भी सच है कि कई बार टाइट कपड़े पहनने के कारण भी एसिडिटी रिफ्लेक्स के लक्षण बढ़ सकते हैं। हम लोग जब भी टाइट जींस और स्टाईलिश ड्रेस पहनते हैं तो इससे हम असहज तो होते ही हैं साथ ही यह एसिडिटी रिफ्लेक्स के लक्षणों के बढ़ने का कारण भी हो सकता है।

इस तरह की समस्या देखने को मिलती है। अगर आपको पेट से संबंधित कोई समस्या है तो हो सकता है कि यह फैशन स्टाइल आपकी परेशानी का कारण बन जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि जब बहुत टाइट कपड़े पहने जाते हैं, तब पेट और कमर दोनों पर दबाव पड़ता है। इस दबाव के कारण, एसिड फूड पाइप तक पहुंच सकता है और आपको कई तरह की परेशानियां का समाना भी करना पड़ सकता हैं।

टाइट कपड़े पहनने के बाद अगर फूलता है पेट

अगर खाना खाने के बाद आपका पेट फूलता है या टाइट बेल्ट लगाने के बाद पेट और कमर के आसपास ज्यादा कसाव महसूस होता है तो अपनी ड्रेसिंग पर गौर करें। खासतौर पर यह देखें कि किसी खास कपड़े को पहनने के बाद सीने में जलन, पेट में भारीपन या खट्टी डकार जैसी समस्या तो नहीं हो रही है।

टाइट कपड़ो के पहनने से महसूस होती है असहजता

यह समझना भी जरूरी है कि केवल टाइट कपड़े पहनना एसिड रिफ्लेक्स का एकमात्र कारण नहीं है। हालाँकि, अगर टाइट जींस, स्कर्ट या बेल्ट पहनने के बाद असहजता या सीने में जलन महसूस होती है, तो ढीले और आरामदायक कपड़ों को प्राथमिकता दें। कॉटन और लिनिन जैसे हल्के फैब्रिक भी बॉडी शेपर और टमी टकर्स को मजबूती दे सकते हैं।

इस समय अतिरिक्त चर्बी को छिपाने या शरीर को शेप देने के लिए बॉडी सेपर और टमी टकर्स का इस्तेमाल भी बढ़ा है। हालांकि इन्हें पहनने के बाद अगर पेट पर लगातार तनाव महसूस हो, यह एसिडिटी और सीने में जलन बढ़ने लगे तो इसकी फिटिंग पर ध्यान दें। शरीर को शेप देने के लिए बहुत ज्यादा कसे हुए कपड़ों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

अपने आपको बनाए रखें एक्टिव

एक अध्ययन के अनुसार, 176 महिलाओं में टाइटनाइलॉन सेंथेटिक अंडर गार्मेंट पहने का संबंध बार बार होने वाले संक्रमण की आशंका से 4.76 गुना अधिक पाया गया है। इस समस्या से बचने के लि आरामदायक विकल्प भी उपलब्ध होते हैं, अतः उनका प्रयोग अधिक से अधिक करें और स्वस्थ बने रहें।

भारत में दूध के पैकेटों के अलग अलग रंग दूध में मौजूद बसा, अर्थात फैट की मात्रा के बारे में बताते हैं समानता, नीले रंग, टोड, दूध, हरा रंग स्टैंडर्ड, दूध और नारंगी रंग फूल क्रीम दूध को दर्शाता है। हालाँकि, अलग अलग डेरी कंपनियों का रंग कोड अलग हो सकता है, इसलिए केवल रंग नहीं बल्कि सही जानकारी केवल बेहतर दूध का चयन करके ली जा सकती है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।