धीरे-धीरे स्वाइन फ्लू पसार रहा है सावधानी रखकर करें बचाव      Publish Date : 05/09/2026

धीरे-धीरे स्वाइन फ्लू पसार रहा है सावधानी रखकर करें बचाव

                                                                                                   डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

स्वाइन फ्लू का वायरस फेफड़ों पर अटैक करता है, गंभीर निमोनिया और सांस लेने में भारी तकलीफ होती है। समय पर इलाज न मिलने पर शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने से मल्टी ऑर्गन फेल्योर का खतरा रहता है। स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। डॉ॰ दिव्यांशु सेंगर मेडिकल ऑफिसर ने बताया जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उन पर ज्यादा खतरा होता है गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा, डायबिटीज और हृदय रोगियों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।

भीड़भाड़ में जाएं तो एन 95 मास्क लगाएं

सर्दी जुकाम खांसी वाले मरीजों से दूरी बनाकर रखें। घर पर कुछ भी खाने से पहले हाथों की सफाई साबुन से कर लें। उसके उपरांत ही कोई वस्तु छुएं या खाएं। डॉ दिव्यांशु सेंगर ने बताया कि नाक बहना लगातार छिकियाना, गला खराब होना, तेज बुखार और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण भी हो सकते हैं तो तुरंत सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज या फिर निकट कोई चिकित्सक है तो उसे जांच अवश्य कराएं।

स्वाइन फ्लू संक्रामक:

श्वसन संक्रमण है जो संक्रमित व्यक्ति के हासने और छींकने से फैलता है, दरवाजे के हैंडल, टेबल या फोन को छूकर मुंह, नाक या आंखों पर हाथ लगाने से भी वायरस फैलने का खतरा होता है, संक्रमित व्यक्ति के हाथ मिलाने या पास रहने से भी बचें।

किसी को सर्दी, जुकाम और खांसी है तो खुद को अलग कमरे में उससे दूरी बनाकर अपने को रखें। परिवार के सदस्यों यदि किसी एक को होता है, तो पूरा परिवार संक्रमित हो जाता है, इसलिए अधिक सावधानी रखनी है। परिवार के सदस्यों से मास्क लगाने को कहें, जिससे वायरस से अन्य लोगों को बचाया जा सके, इलाज के लिए पर्याप्त स्वाइन फ्लू दवा उपलब्ध हैं जिनका उपयोग किया जा सकता है, लेकिन बिना चिकित्सक की सलाह से कोई दवाई न लें।

मरीजों को अचानक से तेज बुखार आना और शरीर में कपकपी महसूस होना, इसका सबसे आम लक्षण है।

  • लगातार सूखी खांसी आना और गले में खरास या दर्द महसूस होना।
  • शरीर की मांसपेशियों जोड़ों में तेज दर्द और सिर में भारीपन बना रहना।

स्वाइन फ्लू से कैसे करें बचाव

  • हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से कम से कम बीस सेकेंड तक धुएं या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
  • खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को टिशू पेपर या फिर रूमाल से हमेशा ढके और इस्तेमाल किए गए टिशू को तुरंत डस्टबिन में फेंक दें।
  • ठन्डे पानी का इस्तेमाल न करें, पीना हो, तो थोड़ा गुनगुना पानी करके पीएं।
  • गुनगुने पानी में नीबू टालकर सेवन करेंगे तो लाभ मिलेगा।

डॉ॰ दिव्यांशु सेंगर ने बताया कि स्वाइन फ्लू के खतरे को देखते हुए अस्पतालों में इमरजेंसी वार्ड में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अलग से बेडों की व्यवस्था की गई है। डॉ॰ दिव्यांशु सेंगर ने बताया कि हंस हॉस्पिटल कंकरखेड़ा रोड पर स्थित है। इसमें वार्ड में मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की व्यवस्था भी की गई है। आवश्यक दवाइयां और अन्य चिकित्सीय सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई है मरीजों के लिए अलग से बैड की व्यवस्था की गई है।

किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल में पूरी तैयारी की गई है। स्वाइन फ्लू की जांच के लिए समान वार्ड में स्वाइन फ्लू की अलग से ओपीडी भी शुरू कर दी गई है। इसमें खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों को परामर्श दिया जा रहा है।

वहां पर आने वाले मरीजों को जागरूक भी किया जा रहा है कि कैसे परिवार के अन्य सदस्य इस बीमारी से अपने को बचा के रखेंगे। इसके लिए पेशेंट के साथ आए हुए सदस्यों को जागरूक भी किया जा रहा है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।