अपनी कही बातों को भूल जाना, क्या यह अल्जाइमर है      Publish Date : 26/08/2026

अपनी कही बातों को भूल जाना, क्या यह अल्जाइमर है

                                                                                              डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

आपके साथ भी ऐसा अक्सर होता होगा कि 5 मिनट कही बात आप भूल जाते होंगे, लेकिन फिर वह बात 1 घंटे बाद या कभी-कभी अगले दिन याद आती होगी। क्या यह अल्जाइमर के संकेत हो सकते हैं? इसके बारे में हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर आपको बता रहे है कि ऐसा किन कारणों के चलते हो सकता है।

5 मिनट पहले कही गई बात भूल जाना, लेकिन कुछ समय बाद इसका खुद ही याद आ जाना- यह सुनने में चिंताजनक लग सकता है, लेकिन हर बार इसे अल्जाइमर डिजीज का संकेत मान लेना भी सही नहीं है। याददाश्त से जुड़ी ऐसी समस्याएं कई कारणों से हो सकती हैं, जिनमें से अधिकांश सामान्य और अस्थायी होते हैं। प्यारे लाल शर्मा जिला अस्पताल मेरठ के मेडिकल ऑफिसर डॉ0 दिव्यांशु सेंगर बताते हैं कि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हमारी स्मरण शक्ति यानी कि मेमोरी कई स्तरों पर काम करती है जैसे शॉर्ट टर्म मेमोरी, वर्किंग मेमोरी और लॉंग टर्म मेमोरी।

यानी कि जब आप कोई बात कुछ मिनटों के लिए भूल जाते हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद याद आ जाती है, तो इसका मतलब अक्सर यह होता है कि जानकारी दिमाग में मौजूद है, बस तुरंत याद नहीं आ पा रही। यह स्थिति कई बार ध्यान भटकने, थकान या तनाव के कारण होती है। आइए हम थोड़ा विस्तार से जानते हैं कि कब स्थिति अल्जाइमर को और बढ़ती है।

हम छोटी-छोटी बातें क्यों भूल रहे हैं?

इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर सेंगर बताते हैं कि आज की तेज-रफ्तार जीवनशैली में मल्टीटास्किंग एक आम बात है। जब आप एक साथ कई काम कर रहे होते हैं, तो दिमाग किसी जानकारी को ठीक से एनकोड नहीं कर पाता। नतीजा यह होता है कि वह जानकारी कुछ समय के लिए भूल जाती है, लेकिन जैसे ही दिमाग को संकेत मिलता है, वह याद वापस आ जाती है। इसलिए अगर आप मीटिंग में सुनी हुई बात या किसी का नाम कुछ देर के लिए भूल जाते हैं, तो यह सामान्य हो सकता है।

तनाव और चिंता से बढ़ती है भूलने की आदत

तनाव और चिंता भी याददाश्त पर गहरा असर डालते हैं। जब आप मानसिक दबाव में होते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल हार्माेन बढ़ता है, जो मेमोरी फंक्शन को प्रभावित कर सकता है। इसी तरह नींद की कमी भी एक बड़ा कारण है। पर्याप्त नींद न मिलने पर दिमाग नई जानकारी को सही ढंग से स्टोर नहीं कर पाता, जिससे छोटी-छोटी बातें भूलने लगती हैं।

इसके अलावा, उम्र बढ़ने के साथ हल्की-फुल्की भूलने की समस्या भी सामान्य मानी जाती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, दिमाग की प्रोसेसिंग स्पीड थोड़ी कम हो जाती है, जिससे जानकारी को याद करने में थोड़ा समय लग सकता है। लेकिन यह सामान्य प्रक्रिया है और इसे बीमारी नहीं कहा जाता।

क्या अल्जाइमर और छोटी बातें भूलना सेम है?

डॉक्टर बताते हैं कि नहीं ऐसा नहीं है। अगर हम अल्जाइमर डिजीज के लक्षणों की बात करें तो इस बीमारी में सिर्फ चीजें भूलना ही नहीं, बल्कि याददाश्त का लगातार और बढ़ता हुआ नुकसान होता है। व्यक्ति बार-बार एक ही सवाल पूछता है, हाल ही की घटनाओं को पूरी तरह भूल जाता है, रोजमर्रा के कामों में परेशानी होने लगती है, और कभी-कभी समय, स्थान या लोगों को पहचानने में भी दिक्कत होती है। खास बात यह है कि अल्जाइमर में भूली हुई बात आमतौर पर बाद में भी याद नहीं आती।

याददाश्त को बेहतर बनाने के लिए क्या करें?

याददाश्त को बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ सरल आदतें अपनाई जा सकती हैं, जैसे पर्याप्त नींद लेना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, और मानसिक रूप से सक्रिय रहना (जैसे पढ़ना, पज़ल्स हल करना)। साथ ही, नोट्स बनाना या रिमाइंडर का इस्तेमाल करना भी मददगार हो सकता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।