
डायबिटीज की जांच के लिए नैनो सेन्सर विकसित Publish Date : 11/08/2026
डायबिटीज की जांच के लिए नैनो सेन्सर विकसित
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
डायबिटीज की जांच के लिए बार बार उंगलियों में सुंई की सहायता से खून निकालने की जरूरत अब भविष्य में कम हो सकती है। डायबिटीज की जांच के लिए अब काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग और ताईवान के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसा नैनो सेन्सर विकसित किया है, जो केवल सांस की जांच के माध्यम से डायबिटीज के स्तर का पता लगाने में सहायक हो सकेगा। यह तकनीक मरीज की सांस में मौजूद एसिटोन गैस की मात्रा को मापती है। एजिटोन वह गैस है जो हमारे शरीर में वसा या फैट टूटने पर बनती है और सांस के साथ बाहर निकल जाती है।
मधुमेह के मरीजों की सांस में सामान्य लोगों की तुलना में इसका स्तर अधिक होता है। हाल के समय में देश में 10,00,00,000 से अधिक डायबिटीज के रोगियों की संख्या को देखते हुए, यह तकनीक सस्ती, आसान और दर्द रहित जांच का प्रभावी विकल्प बन सकती है। अभी इस तकनीक का पेटेंट कराने की प्रक्रिया चल रही है। यह सेंसर सेलेनियम, ग्राफिन और कार्बन नैनो कण जैसे विशेष पदार्थों से तैयार किया गया है। इन पदार्थों की मदद से सेंसर बेहद कम मात्रा में मौजूद एसिस्टोन गैस के स्तर की पहचान भी तुरंत ही कर लेता है। शोधकर्ता सचिन कुमार यादव ने बीएचयू के प्रोफेसर नीरज मेहता के मार्गदर्शन और ताईवान की मिंगची यूनिवर्सिटी की प्रो0 मैंगफैंग लिन के सहयोग से यह तकनीक विकसित की है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि शरीर में जब इंसुलिन नामक हॉर्मोन की कमी होती है तो ऊर्जा के लिए ग्लूकोज के स्थान पर वसा टूटने लगती है। इस प्रक्रिया में एसीटोन गैस बनती है और सांस के साथ बाहर निकलती है। नया सेन्सर इसी गैस की मात्रा को माप कर डायबिटीज के स्तर का संकेत देता है। इस सेन्सर की संवेदनशीलता इतनी अधिक होती है कि यह एसीटोन की बेहद सूक्ष्म मात्रा भी पढ़ सकता है। भविष्य में इसे स्मार्टफोन या स्मार्ट वॉच आदि उपकरणों के साथ जोड़कर मरीज की रिपोर्ट सीधे डॉक्टर तक रियल टाइम से भेजी जा सकेगी। इस प्रकार से कहा जा सकता है कि आने वाले समय में बिना रक्त का प्रयोग किए ही यह नया नैनो सेन्सर डायबिटीज के स्तर का पता लगा सकेगा।
लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
