दवाएं सेवन करने के बाद कितना सुरक्षित है स्तनपान कराना      Publish Date : 08/08/2026

दवाएं सेवन करने के बाद कितना सुरक्षित है स्तनपान कराना

                                                                                                डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

आमतौर पर स्तनपान के दौरान अधिकतर दवाइयों का सेवन करना सुरक्षित माना जाता है। लेकिन, कुछ दवाइयां ऐसी भी है जो कि आपके शिशु को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। इसलिए आवश्यक सावधानी बरतना भी अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है।

जब एक मां अपने नवजात शिशु को स्तनपान करा रही होती है, तब उसकी हर छोटी-बड़ी आदत बच्चे की सेहत से जुड़ जाती है। ऐसे में अगर मां को बुखार, सिरदर्द, सर्दी-जुकाम, संक्रमण या किसी अन्य बीमारी के कारण दवा लेनी पड़े, तो उनके मन में सबसे पहला सवाल यही होता है कि क्या दवा लेने के बाद बच्चे को दूध पिलाना सुरक्षित है? कई महिलाएं इस डर से दवा लेना ही बंद कर देती हैं कि कहीं इसका असर बच्चे पर न पड़ जाए। हालांकि, हर दवा स्तनपान के दौरान नुकसानदायक नहीं होती है।

दवा लेने के बाद बच्चे को दूध पिलाना कितना सुरक्षित है?

प्यारे लाल शर्मा, जिला अस्पताल मेरठ, के मेडिकल ऑफिसर डॉ0 दिव्यांशु सेंगर बताते हैं कि अधिकतर दवाइयां स्तनपान के दौरान सुरक्षित मानी जाती हैं, क्योंकि दवाइयों की बहुत कम मात्रा ही मां के दूध में पहुंचती है। इसलिए बच्चे को इनसे नुकसान नहीं पहुंचता है। लेकिन, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि दवा किस प्रकार की है, उसकी खुराक कितनी है और साथ ही वह बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति कैसी है।

ऐसी कई दवाइयां हैं, जिन्हें मां स्तनपान के दौरान सुरक्षित रूप से ले सकती हैं। इनमें कुछ एंटीबायोटिक्स, पैरासिटामोल और रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) नियंत्रित करने वाली कई दवाइयां शामिल हैं।

वहीं, कुछ दवाइयां ऐसी भी होती हैं जिन्हें लेने के दौरान स्तनपान पूरी तरह से बंद करना जरूरी होता है। कीमोथेरेपी की दवाइयां, रेडियोधर्मी (रेडियोएक्टिव) दवाइयां और कुछ मनोरोग (साइकियाट्रिक) संबंधी दवाइयां लेने के दौरान स्तनपान न कराने की सलाह दी जाती है।

क्या दवा का असर मां के दूध तक पहुंचता है?

डॉ0 सेंगर बताते हैं कि दवा का असर मां के दूध तक पहुंचता है, लेकिन बेहद कम मात्रा में। यानी दवा की थोड़ी-सी मात्रा ही मां के दूध तक पहुंच सकती है। ज्यादातर दवाइयों का स्वस्थ और समय पर जन्मे शिशुओं पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ता है। दवा का असर इस बात पर निर्भर करता है कि आप दवा कितनी खुराक में ले रही हैं और कितने समय से ले रही है।

इन लक्षणों की न करें अनदेखी

अगर आपने कोई दवा लेनी शुरू की है, तो शुरुआती कुछ दिनों तक अपने बच्चे पर खासतौर पर नजर रखें। अगर बच्चे में ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।

  • जरूरत से ज्यादा नींद आना।
  • दूध कम पीना।
  • बार-बार उल्टी होना।
  • चिड़चिड़ापन।
  • सांस लेने में दिक्कत।
  • त्वचा पर रैश या एलर्जी।
  • कब बरतनी चाहिए सावधानियां

डॉ0 दिव्यांशु बताते हैं कि कुछ स्थितियों में स्तनपान के दौरान दवा लेते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

  • बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी नई दवा का सेवन न करें।
  • एंटीबायोटिक, दर्द निवारक, नींद की गोली, हर्बल सप्लीमेंट या आयुर्वेदिक दवा लेना शुरू कर रही हैं, तो पहले यह जान लें कि उसका असर ब्रेस्ट मिल्क के जरिए बच्चे तक पहुंच सकता है या नहीं।
  • अगर शिशु समय से पहले (प्रीमैच्योर) जन्मा है, उसका वजन बहुत कम है या उसे किडनी, लिवर या किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो दवा का प्रभाव उस पर अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। इन मामलों में डॉक्टर दवा बदलने, उसकी खुराक कम करने या दवा लेने का सही समय तय करने की सलाह दे सकते हैं।
  • अपनी कोई भी नियमित दवा केवल इस डर से बंद न करें कि आप स्तनपान करा रही हैं।

महत्वपूर्ण सलाहः अगर आप स्तनपान करा रही हैं, तो किसी भी दवा का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा की खुराक या समय में बदलाव न करें। कई मामलों में डॉक्टर दवा लेने का समय इस तरह तय कर सकते हैं कि आप बच्चे को दूध पिलाने के तुरंत बाद या उसके लंबे समय तक सोने से पहले दवा लें, जिससे बच्चे तक दवा की मात्रा और भी कम पहुंचे। इसलिए स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही किसी भी दवा का सेवन करना चाहिए।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।