कंसीव न कर पाने वाली महिलाओं को अवश्य करवाने चाहिए यह 5 टेस्ट      Publish Date : 02/08/2026

कंसीव न कर पाने वाली महिलाओं को अवश्य करवाने चाहिए यह 5 टेस्ट

                                                                                                   डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

क्या आप काफी समय से कंसीव करने के लिए ट्राई कर रही हैं, लेकिन आपके सारे प्रयास विफल हो रहे हैं? यदि हां, और ऐसा ही है तो आपको डॉक्टर के द्वारा बताए इन 5 टेस्ट को अवश्य ही करवाना चाहिए। ताकि आपको पता चल सके कि आखिर आप कंसीव क्यों नहीं कर पा रही हैं।

  • कंसीव न कर पाने वाली महिलाओं को आवश्यक रूप से करवाने चाहिए यह पांचों टेस्ट-

कंसीन न कर पाने के कारण

                              

मां बनना प्रत्येक महिला का सपना होता है। लेकिन कई बार बहुत सी महिलाओं के सही उम्र के होते हुए भी गर्भधारण नहीं हो पाता है। अगर किसी महिला की उम्र 30 साल से कम है और 1 साल तक लगातार कोशिश करने के बाद भी प्रेगनेंसी नहीं ठहर रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है। ऐसे मामले में कुछ महत्वपूर्ण जांचें इनफर्टिलिटी के कारणों का पता लगाने में मदद कर सकती है। तो आइए आज हम मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम के गायनिक एंड ऑब्सटेट्रिक्स की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पल्लवी बंसल से जानते हैं कि वह कौन से टेस्ट हैं जिनका करवाना बहुत जरूरी होता है।

हॉर्मोन प्रोफाइल टेस्ट

महिलाओं को गर्भधारण करने के लिए उनके अंदर हॉर्मोन्स का संतुलित होना बहुत जरूरी होता है यह थायराइड हॉर्मोन, प्रोलेक्टिन, एफएसएच (FSH) एलएच (LH) और अन्य हॉर्मोन्स की जांच से पता चलता है कि ओवुलेशन सही तरीके से हो रहा है या नहीं। कई बार हॉर्मोनल गड़बड़ी भी कंसीव ना कर पाने का एक प्रमुख कारण हो सकता है।

एएमएच टेस्ट

एंटी-म्यूलरियन हॉर्मोन (AMH टेस्ट एक बेहद जरूरी टेस्ट माना जाता है। यह टेस्ट महिला के अंडाशय में मौजूद अंडों की संख्या और गुणवत्ता का पता लगाने में मदद करता है। खासकर उन महिलाओं के लिए जरूरी है जो 30 साल की उम्र के बाद गर्भ धारण करने की योजना बना रहे हैं या जिन्हें लंबे समय से प्रयास करते रहने के बाद भी सफलता नहीं मिल पा रही है।

पेल्विक अल्ट्रासाउंड

इसे ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड भी कहा जाता है। पेल्विक अल्ट्रासाउंड के जरिए यूट्रस, ओवरी और अन्य प्रजनन अंगों की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। इसी जांच से पीसीओएस, फाइब्रॉयड और सिस्ट आदि का भी पता लगाया जा सकता है, जो आपके गर्भधारण में एक बाधा बन सकते है।

प्रोजेस्टेरोन टेस्ट

इस जांच से पता चलता है कि ओवुलेशन हुआ है या नहीं। आमतौर पर इस टेस्ट को पीरियड्स शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले कराया जाता है।

एचएसजी टेस्ट

यह एक खास तरह की एक्स-रे जांच होती है, जिसके द्वारा यह देखा जाता है कि फैलोपियन ट्यूब खुली है या नहीं? अगर ट्यूब में ब्लॉकेज हो तो स्पर्म और अंडाणु का मिलान नहीं हो पाता है, जिससे प्रेगनेंसी ठहरने में समस्या आती है।

ब्लड टेस्ट

                                 

इसके अलावा ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन, विटामिन D समेत अन्य जरूरी ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। अनियंत्रित डाइबिटीज, एनीमिया, विटामिन D की कमी भी स्वास्थ्य समस्याएं हैं जो कि आपकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।