क्या होती है प्री-डायबिटीज? क्या इसे बिना दवा के कंट्रोल किया जा सकता है      Publish Date : 31/07/2026

क्या होती है प्री-डायबिटीज? क्या इसे बिना दवा के कंट्रोल किया जा सकता है

                                                                                                  डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

आजकल गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या के चलते भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और अब भारत को डायबिटीज की वैशिवक राजधानी भी कहा जाने लगा है। ऐसे में अगर प्री डायबिटीज के मरीज अपनी समस्या को समय रहते कंट्रोल करे लें, तो आगामी डायबिटीज के खतरे से काफी हद तक बचा जा सकता है। ऐसे में हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ0 दिव्यांशु सेंगर आपको जानकारी दे रहे हैं प्री-डायबिटीज को मैनेज कर डायबिटीज के खतरे बचने के तरीकों के बार में विस्तार से-

वर्तमान समय में हमारे देश में लगातार डायबिटीज के मरीजों की संख्या बहुत तेजी के साथ बढ़ रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और द लंसेट में प्रकाशित की गई INDIAB स्टडी के अनुसार, देश में करोड़ों लोग डायबिटीज और प्री-डायबिटीज से प्रभावित हैं। ऐसे में कई लोग डायबिटीज और प्री डायबिटीज को एक ही समस्या समझ लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। प्री डायबिटीज वह स्थिति है, जब ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा होती है, लेकिन इतनी नहीं कि उसे टाइप-2 डायबिटीज की श्रेणी में शामिल किया जाए। अच्छी बात यह है कि अगर इस स्टेज पर सही कदम उठाए जाएं, तो डायबिटीज होने के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। अब कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या प्री-डायबिटीज को बिना किसी दवा के भी कंट्रोल किया जा सकता है?

क्या होती है प्री-डायबिटीज की समस्या?

                                  

अमेरिकन डायबिटीज एसोशिएशन के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति का फास्टिंग ब्लड शुगर 100-125 mg/dL, HbA1c 5-7 प्रतिशत से 6.4 प्रतिशत या खाना खाने के 2 घंटे बाद ब्लड शुगर 140-199 mg/dL के बीच है, तो उसे प्री-डायबिटीज की स्थिति माना जाता है। इस स्थिति में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।

सवाल है कि क्या प्री-डायबिटीज को बिना दवा के भी कंट्रोल किया जा सकता है?

सीधेतौर पर इसका जवाब हां है ऐसा किया जा सकता है, लेकिन यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। अगर समय रहते प्री-डायबिटीज का पता चल जाए और व्यक्ति अपनी लाइफस्टाइल में कुछ जरूरी बदलाव करे, तो कई मामलों में ब्लड शुगर को सामान्य स्तर पर वापस लाया जा सकता है।

क्या हर मरीज को दवा की जरूरत होती है?

नहीं, अमेरिकन डायबिटीज एसोशिएशन के मुताबिक, प्री-डायबिटीज के सभी मरीजों को दवा नहीं दी जाती है। सबसे पहले डॉक्टर खानपान में सुधार, वजन कम करने और नियमित शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने की सलाह देते हैं। हालांकि, जिन लोगों में डायबिटीज का खतरा बहुत ज्यादा होता है, उन्हें डॉक्टर मेटफॉर्मिन जैसी दवा लेने की सलाह भी दी जा सकती है।

प्री-डायबिटीज को कंट्रोल करने के आसान तरीकेः

                                 

अगर आप प्री डायबिटीज को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो कुछ चीजों पर ध्यान देकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं, जैसे-

1. रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज चाल से चलें या नियमित रूप से कोई भी एक्सरसाइज करें, इससे प्री डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।

2. शरीर का 5-7 प्रतिशत वजन कम करने का प्रयास करें।

3. मीठे ड्रिंक, मैदा और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड जैसे आहारों से उचित दूरी बनाकर रखें।

4. साबुत अनाज, दालें, हरी सब्जियां और फाइबर से भरपूर भोजन करें।

5. हर 6 से 12 महीने में ब्लड शुगर और HbA1c की जांच कराते रहना चाहिए।

रिसर्च के परिणाम

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अनुसार, अगर प्री-डायबिटीज वाले लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और अपना वजन कंट्रोल में रखें, तो काफी हद तक टाइप-2 डायबिटीज के खतरों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

वहीं, द लांसेट डायबिटीज एंड एंडोक्राइनोलॉजिस्ट में प्रकाशित कई अध्ययनों ने भी लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन को प्री-डायबिटीज मैनेजमेंट का सबसे प्रभावी तरीका माना है।

विशेष रूप से ध्यान रखें कि प्री-डायबिटीज कोई ऐसी स्थिति नहीं है, जिससे घबराने की जरूरत हो, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी सही नहीं होता है। समय पर जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रित रखकर कई लोग बिना दवा के भी ब्लड शुगर को सामान्य स्तर तक ला सकते हैं। हालांकि, दवा की जरूरत है या नहीं, इसका फैसला हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही होना चाहिए।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।