रीढ़ की हड्डी में दर्द का उपचार      Publish Date : 28/07/2026

         रीढ़ की हड्डी में दर्द का उपचार

                                                                                                    डॉ0 युवराज चौधरी एवं मुकेश शर्मा

  • रीढ़ की हड्डी अर्थात, स्पाइन में दर्द या फिर कोई दिक्कत हो तो समय पर कराएं उपचार

रीढ़ की हड्डी अर्थात स्पाइन की कुछ गंभीर बीमारियों एवं चोटों का समय पर उचित उपचार और आवश्यक सर्जरी आदि के न कराने पर मरीज को स्थाई पैरालिसिस एवं पेशाब और मल पर नियंत्रण समाप्त होने के जैसी गम्भीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। डॉ॰ युवराज चौधरी ने बताया कि रीढ़ की हड्डी शरीर की सबसे महत्वपूर्ण संरचनाओं में से एक है जो मस्तिष्क और शरीर के विभिन्न अंगों को बीच संदेशों का आदान-प्रदान में सहायता प्रदान करती है।

                                           

जब किसी कारणवश स्पाइनल कार्ड या नसों पर दबाव बनता है तो मरीज को असहनीय, कमर या गर्दन, दर्द, हाथ, पैरों में कमजोरी और सुन्नपन चलने में कठिनाई अथवा लकवा जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि किसी सड़क दुर्घटना, ऊंचाई से गिरना स्टेनोसिस, रीड की हड्डी के ट्यूमर, संक्रमण तथा उम्र के साथ होने वाले स्थायी डिजनरेटिव रोग स्पाइस सर्जरी की जरूरत पड़ने के मुख्य कारण हैं। आधुनिक न्यूरो सर्जरी जैसी तकनीकों की मदद से अब इन समस्याओं का सफलता एवं सुरक्षित उपचार संभव है।

डाक्टर युवराज चौधरी ने बताया कि डिस्कॉमी लेमिनेट, टॉमी, स्पाइनल फ्यूजन वर्थे, ब्रोप्लाइलिस्टी कैफो, प्लास्टिक स्पाइनल ड्यूमर सर्जरी तथा मिनीमली इनवेस्टिस स्पाइनल सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीकों से आज छोटे चीरे के माध्यम से ही सफल ऑपरेशन किए जा सकते हैं, जिनसे मरीज को कम दर्द कम रक्तस्राव, संक्रमण का कम जोखिम तथा शीघ्र स्वस्थ होने का लाभ मिलता है। उन्होंने आगाह किया कि यदि किसी मरीज में पेशाब या मल पर नियंत्रण समाप्त हो जाए, पैरों में तेजी से कमजोरी बढ़े या लकवा आने लगे। रीढ़ की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर हो जाए अथवा स्पाइनल कार्ड पर ट्यूमर या संक्रमण का दबाव बने तो ऐसी स्थितियों में सर्जरी में देरी अत्यंत खतरनाक हो सकती है।

                                     

ऐसे मरीजों को बिना समय गंवाए, तुरंत न्यूरो एवं स्पाइनल सर्जरी से परामर्श लेना अति आवश्यक है। उन्होंने बताया, कि हालांकि, रि मरीज को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। अधिकांश मामलों में उपचार, दवाइयों, फिजियोथेरेपी, जीवनशैली में सुधार तथा अन्य आधुनिक चिकित्सा विधियों से भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है। सर्जरी का निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा मरीज की जांच एम.आर.आई एवं अन्य आवश्यक प्रश्नों के आधार पर लिया जाता है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि लगातार कमर या गर्दन, दर्द या हाथ, पैरों में सुनपन या कमजोरी चलने में कठिनाई अथवा पेशाब और मल पर नियंत्रण में बदलाव जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और उपचार से स्थायी विकलांगता तक गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव हो सकता है।

लेखकः डॉ0 युवराज चौधरी, निदेशक, हंस मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल, कंकर खेड़ा मेरठ।