
स्वस्थ जीवन में श्री अन्न का पोषणात्मक योगदान Publish Date : 27/07/2026
स्वस्थ जीवन में श्री अन्न का पोषणात्मक योगदान
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
भारत में प्राचीन काल से ही मोटे अनाजों का अपना एक विशेष स्थान रहा है। आज जब दुनिया एक ओर पोषण की कमी (कुपोषण) और दूसरी ओर जीवनशैली जनित रोगों से जूझ रही है, तब श्री अन्न (मोटा अनाज) एक प्रभावशाली समाधान बनकर उभरकर सामने आए हैं। श्री अन्न यानि कि मिलेट्स एक प्रकार का मोटा अनाज होता है, जिसमें कई किस्में शामिल होती हैं।
मोटे अनाजों मे ज्वार (शबर्त), बाजरा, रागी (मडुआ), झंगोरा, बैरी, कंगनी, कुटकी (लघु धान्य), कोदो, चेना (चीना), सामा या सांवा और जौ आदि के जैसे अनाजों की किस्में आती हैं। यह अनाज पोषण से भरपूर होता है और कई बीमारियों से बचाव करता है। श्री अन्न या मिलेट्स न केवल एक पारंपरिक अनाज है, बल्कि आज के समय में यह सुपरफूड के रूप में पहचान बना चुके है। इसका सेवन करके आप कई बीमारियों से बच सकते हैं और अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं। भारत में इसकी बढ़ती खेती और लोकप्रियता इससे प्राप्त स्वास्थ्य लाभों प्रमाण है।
श्री अन्न के पोषण मूल्यः
श्री अन्न में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम, जिंक और विटामिन-बी के जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके साथ ही यह अनाज पाचन में आसान, मधुमेह नियंत्रक और हृदय स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं। रागी जैसे मोटे अनाज में कैल्शियम बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है, जो हमारी हड्डियों के लिए बहुत अधिक लाभदायक होता है, जबकि ज्वार और बाजरा में फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण यह पाचन क्रिया को सुचारू बनाए रखते हैं। देश में उपजाए जाने वाले श्री अन्न की गुणवत्ता के बारे में इस लेख में आवश्यक जानकारी प्रदान की जा रही है।

बाजरा - बाजरा में प्रोटीन, फैटी एसिड, खनिज, विटामिन और रेशा प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। बाजरा के प्रोटीन में आवश्यक अमीनो एसिड उपलब्ध होते हैं विशेष रूप से मिथिओनिन और सिस्टीन आदि। बाजरे को मिलिंग द्वारा संसाधित करने से इसके विरोधी तत्व बाहर निकल जाते हैं जो कि शरीर के लिए भी हानिकारक होते है। बाजरे की उपज क्षमता अन्य श्री अन्नों की अपेक्षा अधिक होती है। बाजरा मोटापा कम करने भी लाभकारी सिद्व होता है। उच्च फाइबर क्षमता के कारण इसे खाने से पेट भराभरा है। इसके साथ ही यह कैल्शियम और फास्फोरस का भी एक अच्छा स्रोत होता है जो कि मानव की हड्डी का सुदृढ़ता प्रदान करने में सहायक होते हैं।
तालिका-1: बाजरा में पाए जाने वाले पोषक ततवों की मात्रा प्रति 100 ग्राम
|
पोषक तत्व |
मात्रा प्रति 100 ग्राम |
|
प्रोटीन |
11.6 ग्राम |
|
कार्बोहाइड्रेट |
65.5 ग्राम |
|
फाईबर |
1.2 ग्राम |
|
कैल्शियम |
42 मिली ग्राम |
|
आयरन |
6.42 मिली ग्राम |
ज्वारः ज्वार एक उच्च कोटि का अन्न है, जिसे जानवरों के लिए चारे के रूप में प्रयोग किया जाता है। ज्वार तथा इससे बनने वाले उत्पादों से अच्छी मात्रा में पोषक ततव प्राप्त होते हैं, जिनका सेवन करने से मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग और शरीर में होने वाली सूजन की सम्भावना को कम करता है। ज्वार में एंटीऑक्सीडेन्ट तत्व भी पाए जाते हैं जो कि मानव की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। हालांकि, ज्वार में कुछ पोषक विरोधी तत्व भी पाए जाते हैं जैसे कि टैनिन,फाइटेट्स आदि, और तकनीकी प्रसंस्करण जैसे ज्वार को भिगोना या उसे अंकुरित करने के माध्यम से इन पोषक विरोधी तत्वों का शमन करने से ज्वार की गुणवत्ता में वृद्वि होती है।
तलिका-2: ज्वार में पाए जने वाले पोषण की मात्रा प्रति 100 ग्राम भार
|
पोषक तत्व |
मात्रा प्रति 100 ग्राम |
|
प्रोटीन |
11.4 ग्राम |
|
कार्बोहाइड्रेट |
72.6 ग्राम |
|
फाईबर |
1.6 ग्राम |
|
कैल्शियम |
25 मिली ग्राम |
|
आयरन |
4.1 मिली ग्राम |
रागीः- रागी भारत के प्रमुख मोटे अनाजों में से एक है, जिस मडुआ के नाम से भी जाना जाता है। रागी में महत्वपूर्ण मुख्य पोषक तत्वों के साथ ही साथ अन्य सुक्ष्म पोषक तत्त्व भी पाये जाते है। रागी का सेवन करने से विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याओं से बचा जा सकता है। यह एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर अनाज होता है जो कि मनुष्य में होने वाले हृदय रोग और गठिया जैसी बीमारियों के जोखिम को कम करता है। रागी में एंटीइफ्लेमेंटरी गुण भी पाए जाते है जो कि शरीर में सूजन से संबंधित समस्याओं के लिए उपयोगी माना जाता है। रागी टाईप- 2 डायबिटीज के जोखिम को भी काम करता है। साथ ही यह मोटापे को कम करने में भी सहायता प्रदान करता है। रागी में ट्रिप्टोफैन नामक एमीनो एसिड पाया जाता है जो भूख को कम करता है और वजन को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। कैल्शियम तथा फास्फोरस की मौजूदगी के चलते रागी को शिशु, बढ़ते बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए एवं बुजुर्गों के लिए ण्क आदर्श एवं सेहतमंद खाद्य माना जाता है। इसके अतिरिक्त रागी में एंटी एजिंग गुण भी पाए जाते हैं जिसके काारण यह सूर्य की खतरनाक यू0 वी0 किरणों से होने वाली परेशानियों से भी बचाव करता है और एजिंग की समस्याओं को भी काफी हद तक कम करता है।
तालिका-3: रागी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों की मात्रा प्रति 100 भार
|
पोषक तत्व |
मात्रा प्रति 100 ग्राम |
|
प्रोटीन |
7.3 ग्राम |
|
कार्बोहाइड्रेट |
7.2 ग्राम |
|
फाईबर |
2.6 ग्राम |
|
कैल्शियम |
344 मिली ग्राम |
|
आयरन |
4.32 मिली ग्राम |
कंगनीः कंगनी अनाज छोटे आनाजों की श्रेणी में आता है। कंगनी में मैग्नीशियम, फाईबर, आयरन, फास्फोरस, कैरोटीन, प्रोटीन, काबोहाइड्रेट, कैल्शियम, विटामिन बी, राइबोफ्लेविन तथा थाइमिन आदि तत्व पाए जाते हैं। ये सभी पोषक तत्व मनुष्य के विकास और रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते है। इस अनाज से हम इडली, रोटी, दलिया, बिस्किट, नमकीन, खीर आदि बना सकते हैं।
तालिका-4: कंगनी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों की मात्रा प्रति 100 ग्राम भार
|
पोषक तत्व |
मात्रा प्रति 100 ग्राम |
|
प्रोटीन |
12.30 ग्राम |
|
कार्बोहाइड्रेट |
60.9 ग्राम |
|
फाईबर |
14.0 ग्राम |
|
कैल्शियम |
31 मिली ग्राम |
|
आयरन |
3.20 मिली ग्राम |
साँवाः- साँवा वर्षा ऋतु में उत्पन्न होने वाला एक श्री अन्न है। यह कम अवधि में (2.5 महीने) तैयार हो जाने वाली फसल है। इसका बीज स्लेटी रंग का तथा चमकदार होता है। साँवा में उच्च कोटि का प्रोटीन पाया जाता है। साँवा में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होने की वजह से कोलेस्टाल और उच्च रक्तचाप स्तर को भी कंट्रोल करने में सहायक होता है। इसमें ग्लुटेन नहीं पाया जाता है। गेहूँ के प्रति संवेदनशील व्यक्ति इसका सेवन आसानी से कर सकते हैं।
तालिकाः- साँवा में पाए जाने वाले पाषक तत्वों की मात्रा प्रति 100 ग्राम भार
|
पोषक तत्व |
मात्रा प्रति 100 ग्राम |
|
प्रोटीन |
12.30 ग्राम |
|
कार्बोहाइड्रेट |
60.9 ग्राम |
|
फाईबर |
14.0 ग्राम |
|
कैल्शियम |
31 मिली ग्राम |
|
आयरन |
3.20 मिली ग्राम |

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
