आंखों का सफेद हिस्सा लाल क्यों हो जाता है      Publish Date : 26/07/2026

  आंखों का सफेद हिस्सा लाल क्यों हो जाता है

                                                                                                   डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि एक सुबह उठकर आंखें खोली हों और उसके सफेद हिस्से पर रेडनेस आ गई हो? आज हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ0 दिव्यांशु सेंगर आपको बता रहे हैं कि आंखें लाल हो जाने का क्या कारण होता है और इस समस्या से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है।

आंखों का लाल होना उन आम कारणों में से एक है, जिनकी वजह से लोग अधिकतर आंखों के डॉक्टर यानी कि नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास जाते हैं। हालांकि यह अक्सर मामूली जलन की वजह से होता है, लेकिन आंख के सफेद हिस्से (स्क्लेरा) में लालिमा कभी-कभी किसी ऐसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकती है जिसके लिए तुरंत मेडिकल इलाज की जरूरत होती है।

प्यारे लाल शर्मा जिला अस्पताल मेरठ के मेडिकल ऑफिसर और हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ0 दिव्यांशु सेंगर का कहना है कि आंखों में लालिमा तब आती है जब जलन, इन्फेक्शन, एलर्जी या चोट की वजह से स्क्लेरा को ढकने वाली छोटी-छोटी रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं या उनमें सूजन आ जाती है। संभावित कारणों को समझने से लोगों को यह पता चल सकता है कि कब घर पर की जाने वाली देखभाल काफी है और कब इसका प्रोफेशनल इलाज करवाना जरूरी है। अब हम अपने डॉक्टर के बताए अनुसार आंखों के लाल होने के आम कारणों के बारे में बताते हैं।

कंजंक्टिवाइटिस यानी आंख आना

                                 

कंजंक्टिवाइटिस आंखें लाल होने के मुख्य कारणों में से एक है। आपने खुद भी इस समस्या का सामना अपने जीवन में कभी न कभी अवश्य ही किया होगा। जब हमारी आंख के अंदर से फोड़े जैसा उभार आ जाता है और उसमें बहुत दर्द होता है। यह तब होता है जब कंजंक्टिवा यानी आंख के सफेद हिस्से को ढकने वाली पतली पारदर्शी झिल्ली में सूजन आ जाती है।

वायरल कंजंक्टिवाइटिस बहुत तेजी से फैलने वाला एक संक्रमण होता है और यह अक्सर सर्दी-ज़ुकाम आदि की समस्या से जुड़ा होता है। जबकि बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस में आमतौर पर गाढ़ा पीला या हरा डिस्चार्ज होता है। दूसरी ओर, एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस पराग, धूल, पालतू जानवरों की रूसी या प्रदूषण से होता है और इसमें आमतौर पर खुजली, पानी आना और सूजन जैसे लक्षण होते हैं।

ड्राई आई सिंड्रोम

लंबे समय तक स्क्रीन देखने, एयर-कंडीशंड माहौल में रहने, प्रदूषण और उम्र बढ़ने की वजह से ड्राई आई की समस्या तेजी से आम हो गई है। जब आंखें पर्याप्त आंसू नहीं बनाती हैं या आंसू बहुत तेजी से सूख जाते हैं, तो आंख की सतह सूखी और परेशान हो जाती है, जिससे लगातार रेडनेस, जलन, किरकिरापन और देखने में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं होती हैं।

सब-कंजंक्टिवल हेमरेज

आंख के सफेद हिस्से पर चमकीला लाल धब्बा सब-कंजंक्टिवल हेमरेज की वजह से हो सकता है, जो तब होता है जब कंजंक्टिवा के नीचे कोई छोटी रक्त वाहिका फट जाती है। हालांकि यह डरावना लग सकता है, लेकिन आमतौर पर इसमें दर्द नहीं होता और यह नुकसानदायक भी नहीं होता। यह एक से दो हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाता है। यह जोर से खांसने, छींकने, भारी सामान उठाने, आंख रगड़ने या अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों या खून पतला करने वाली दवाएं लेने वाले लोगों में हो सकता है।

कॉन्टैक्ट लेंस से जुड़ी जलन

कॉन्टैक्ट लेंस की साफ-सफाई ठीक से न करने, लंबे समय तक लेंस पहनने, लेंस लगाकर सोने या एक्सपायर हो चुके लेंस सॉल्यूशन का इस्तेमाल करने से जलन और लालिमा हो सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि कॉन्टैक्ट लेंस के गलत इस्तेमाल से कॉर्निया में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, जिसके लिए तुरंत इलाज की जरूरत होती है ताकि हमेशा के लिए नजर न चली जाए।

जब लाल आंखें किसी गंभीर समस्या का संकेत हों

                               

डॉक्टर ने बताया कि आंखों का लाल होना हमेशा मामूली बात नहीं होती। केराटाइटिस (कॉर्निया में सूजन), यूवेइटिस (आंख के अंदर सूजन) और एक्यूट एंगल-क्लोजर ग्लूकोमा जैसी स्थितियों में आंखों के लाल होने के साथ-साथ तेज दर्द, धुंधली नजर, रोशनी से परेशानी, सिरदर्द, जी मिचलाना या रोशनी के चारों ओर घेरे हेलो (Halo Rings) दिखाई दे सकते हैं। इन स्थितियों को आंखों की इमरजेंसी माना जाता है और नजर को हमेशा के लिए नुकसान से बचाने के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञ से तुरंत जांच करवानी चाहिए।

खुद से दवा लेने से बचें

डॉक्टर कहते हैं कि बहुत से लोग डॉक्टर की सलाह के बिना पर्ची के मिलने वाली आई रेडनेस कम करने वाली ड्रॉप्स का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि ये ड्रॉप्स कुछ समय के लिए आंखों को बेहतर दिखा सकती हैं, लेकिन बार-बार इस्तेमाल करने से आंखें फिर से लाल हो सकती हैं और गंभीर अंदरूनी बीमारियां छिपी रह सकती हैं। इसी तरह, बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करने से इन्फेक्शन बढ़ सकता है और सही इलाज में देरी हो सकती है।

आंखों को स्वस्थ रखने के टिप्स

  • आंखों की सही सफाई बनाए रखने से आंखों के लाल होने का खतरा काफी कम हो सकता है।
  • आंखों को छूने से पहले अपने हाथ धोएं, उन्हें रगड़ने से बचें, लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल करते समय 20-20-20 नियम का पालन करें।
  • शरीर में पानी की कमी न होने दें।
  • धूल-मिट्टी वाली जगहों पर सुरक्षात्मक चश्मा पहनें और कॉन्टैक्ट लेंस की सही सफाई का ध्यान रखें।
  • जिन लोगों को किसी खास चीज से एलर्जी है, उन्हें उन चीजों से दूर रहना चाहिए जिनसे एलर्जी बढ़ती है।

नेत्र रोग विशेषज्ञ को कब दिखाएं

अगर आपको ये लक्षण दिखें तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लें-

  • अगर आंखें दो-तीन दिनों से अधिक समय तक लाल रहें।
  • आंख में तेज दर्द या बेचैनी।
  • धुंधली या कमजोर नजर।
  • रोशनी से परेशानी।
  • आंख से गाढ़ा पीला या हरा स्राव निकलना।
  • आंख में चोट लगने या केमिकल के संपर्क में आने के बाद आंखें लाल होना।
  • कॉन्टैक्ट लेंस पहनने के दौरान आंखें लाल होना।

विशेषः हालांकि आंखें लाल होने की आम कारण मामूली इन्फेक्शन, एलर्जी या सूखापन भी हो सकता हैं, लेकिन अगर इसके साथ दर्द, नजर में बदलाव या लगातार लक्षण बने रहें तो इसे कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शुरुआती जांच और समय पर इलाज से इन जटिलताओं को रोका जा सकता है और नजर को बचाया जा सकता है। अगर सामान्य देखभाल के बावजूद आपकी आंखें लाल रहती हैं या लक्षण बिगड़ जाते हैं, तो नेत्र रोग विशेषज्ञ से तुरंत जांच करवाना सबसे सुरक्षित उपाय होता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।