डबल फोर्टिफाइड नमक स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार      Publish Date : 22/07/2026

डबल फोर्टिफाइड नमक स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार

                                                                                              डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

प्राचीन काल में नमक आर्थिक, धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विकास का एक प्रमुख कारक हुआ करता था। उस समय नमक मानव भोजन का आवश्यक हिस्सा नहीं हुआ करता था क्योंकि प्राचीन काल का मानव कच्चा या भुना हुआ मांस खाता था, जिससे वह आवश्यक नमक अपने भोजन से स्वतः प्राप्त कर लेता था इसलिए उसे अलग से नमक के सेवन की आवश्यकता नहीं थी। परंतु जैसे-जैसे लोग शाकाहारी होते गए, नमक उनके दैनिक आहार का एक आवश्यक भाग बन गया और इसे ईश्वर का उपहार माना जाने लगा। नमक ही वह सस्ता खाद्य पदार्थ है जिसकी पहुंच जाति, धर्म, संप्रदाय और देश से परे, हर रसोई तक है।

स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए पोषण वास्थ्य शरीर प्रकृति का उपहार है। मानव विज्ञान में निरंतर नए प्रयोग किए जा रहे हैं। विज्ञान और अनुसंधान मानव स्वास्थ्य को सुरक्षित और संवर्धित करते हुए मानव जीवन को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं। नमक, जो हमारे दैनिक आहार का अभिन्न हिस्सा है, अब केवल स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं रहा। वैज्ञानिकों ने इसे पोषण संवर्धन का माध्यम बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। गुजरात के भावनगर स्थित सीएसआईआर की प्रतिष्ठित प्रयोगशाला केंद्रीय नमक व समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान (सीएसएमसीआरआई) ने इसी क्रम में 'डबल फोर्टिफाइड नमक' विकसित कर स्वास्थ्य क्षेत्र में एक अनूठा नवाचार प्रस्तुत किया है। यह तकनीकी न केवल आयरन और आयोडीन की कमी को दूर करने में सहायक है, बल्कि समाज के व्यापक वर्ग को सस्ती और सरल तकनीक से पोषण उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

मानव स्वास्थ्य में आयरन तथा आयोडीन की भूमिका

                                       

आयरन और आयोडीन मानव शरीर के लिए आवश्यक तत्व हैं। आयोडीन की कमी से शरीर में होने वाले स्वास्थ्य विकारों को आयोडीन अल्पता विकार (आईडीडी)और आयरन की कमी से होने वाली स्वास्थ्य समस्या को वाला आयरन अल्पता एनीमिया (आईडीए) कहा जाता है। आयोडीन की कमी से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। प्रमुख परिणामों में स्थानिक बेंघा रोग (ग्वाइटर), हाइपोथायरॉइडिज्म और अपरिवर्तनीय मानसिकमंदता (क्रेटिनिज्म) शामिल हैं, विशेष रूप से जब गर्भावस्था या प्रारंभिक बचपन के दौरान शरीर में आयोडीन की कमी होती है। शरीर में आयरन की पर्याप्त मात्रा न होने से लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण नहीं हो पाता है जिसके फलस्वरूप शरीर में रक्त की कमी हो जाती है और इसे एनीमिया कहते हैं। एनीमिया के कारण शरीर में थकावट रहती है और मस्तिष्क से लेकर अन्य तंत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। गर्भावस्था में आयरन की कमी माँ तथा उसके बच्चे, दोनों के लिए खतरा पैदा करती है। वैश्विक स्तर पर अरबों लोगों को आयोडीन अल्पता से ग्वाइटर तथा आयरन की कमी से एनीमिया का खतरा रहता है। अधिक जनसंख्या, कम जागरूकता तथा सीमित संसाधनों के कारण भारत में इसकी व्यापकता अधिक है। ऐसा अनुमानित है कि देश में लगभग 60% से अधिक गर्भवती महिलाएं तथा बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं और पूरे दक्षिण एशिया में एनीमिया की वजह से अधिकतम मातृ-मृत्यु अकेले भारत में होती है।

आयरन और आयोडीन की कमियों का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होती है और देश के आर्थिक और सामाजिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। एक आंकड़े के अनुसार पूरे विश्व में 188 करोड़ लोग आयोडीन की कमी तथा 200 करोड़ लोग आयरन की कमी से होनेवाले विकारों के खतरे में हैं। भारत जैसे देश में जहाँ आयोडीन और आयरन की कमी दोनों ही गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याएँ हैं, वहाँ स्थिति और जटिल है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिवार सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5), भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25% पुरुष, 57% महिलाएं और 50% से ज़्यादा बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं।

डबल फोर्टिफाइड नमक की अवधारणा

खाद्य नमक को आयरन और आयोडीन से फोर्टिफाइड करने के लिए एक उपयुक्त माध्यम के रूप में पहचाना गया है। पोषक तत्वों के वितरण के लिए नमक को पसंदीदा माध्यम के रूप में चुनने के पीछे कई कारण हैं जैसे नमक उन कुछ खाद्य वस्तुओं में से एक है जिनका उपभोग समाज के हर वर्ग द्वारा किया जाता है और इसकी खपत पूरे वर्ष लगभग स्थिर रहती है। नमक का उत्पादन आमतौर पर कुछ भौगोलिक क्षेत्रों तक ही सीमित होता है, इसलिए फोर्टिफिकेशन को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त नमक फोर्टिफिकेशन तकनीक का कार्यान्वयन सरल और किफायती है। उपयुक्त फॉर्मूलेशन का उपयोग कर नमक में सूक्ष्म पोषक तत्वों को मिलाने से इसके रंग, स्वाद या गंध पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है तथा महत्वपूर्ण बात यह है कि फोर्टिफाइड खाद्य नमक की गुणवत्ता की निगरानी, उत्पादन और घरेलू स्तर पर की जा सकती है।

वैज्ञानिक चुनौतियाँ और समाधान

हालाँकि, नमक में आयरन (फेरस सल्फेट (FeSO4) के रूप में) और आयोडीन (पोटेशियम आयोडेट (KIO3) के रूप में) का दोहरा फोर्टिफिकेशन करने से कुछ समस्याएं उत्पन्न होती हैं जैसे जब नमक में आयरन और आयोडीन दोनों मिलाए जाते हैं, तो आयोडीन तात्विक आयोडीन में परिवर्तित हो जाता है, जो वाष्पीकरण के माध्यम से आंशिक रूप से नष्ट हो जाता है, और आयरन के फेरस से फेरिक अवस्था में परिवर्तित होने के कारण नमक का एक अप्रिय स्वाद और भूरा या जंग जैसा रंग उत्पन्न हो जाता है, जोकि स्वीकार्य नहीं है।यद्यपि देश में विभिन्न एजेंसियों द्वारा अलग-अलग प्रकार के आयरन व आयोडीन के 'डबल फोर्टिफाइड नमक' तैयार किए गए हैं, जिनमें थोड़ी भिन्न कार्यप्रणाली और संरचनात्मक दृष्टिकोण का उपयोग किया गया है। एफएसएसएआई ने इन तकनीकों को सूचीबद्ध किया है और इनके लिए मानक प्रदान किए हैं। परंतु इन तकनीकों में नमक के रंग, जैव-उपलब्धता और उसकी स्थिरता जैसे मापदंडों से संबंधित समस्याएं हैं।

सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई ने अकार्बनिक मैट्रिक्स यौगिक का उपयोग करके आयोडीन और आयरन से नमक को फोर्टिफाई करने की एक अभिनव प्रक्रिया विकसित की है। यह नवीन प्रक्रिया नमक के सफेद रंग को बनाए रखने और आयरन और आयोडीन की प्रभावी सांद्रता को लंबे समय तक बरकरार रखने में सहायक है, जिससे इसकी शेल्फ-लाइफ बढ़ जाती है। आयरन और आयोडीन का यह नया फोर्टिफिकेशन समझदारी से संशोधित सिंथेटिक हाइड्रोटैल्साइट (Mg&Al)OH) 16CO3-4H2O) का उपयोग करके प्राप्त किया गया है। दो संशोधित हाइड्रोटैल्साइट्स (जैसे [Mg43 Fe(III) (QH),0.6] [C03]0.5 .3H20 and [M84.5 Al2(OH)16] [C03]0.65 [103]0.12 .3H20) के उपयुक्त मिश्रण को खाद्य नमक में मिलाकर 'डबल फोर्टिफाइड नमक' प्राप्त किया जाता है, जिसमें 1000 पीपीएम आयरन और 30-35 पीपीएम आयोडीन होता है। इस तकनीक से तैयार किए गए 'डबल फोर्टिफाइड नमक' की उत्पादन लागत, सूक्ष्म पोषक तत्वों के बिना नमक की तुलना में मात्र कुछ रुपये प्रति किग्रा अधिक है।संस्थान द्वारा विकसित 'डबल फोर्टिफाइड नमक' के आयरन तथा आयोडीन दोनों, पोषक तत्व अत्यधिक वायुमंडलीय परिस्थितियों और उच्च तापमान पर खाना पकाने के दौरान भी स्थिर पाए गए। 5 वर्षों की अवधि में डीएफएस के ऊपर किए गए अध्ययन से पता चला कि इस अवधि में इसमें आयरन या आयोडीन की कोई कमी नहीं हुई और इसके रंग में भी कोई परिवर्तन नहीं देखा गया। इस 'डबल फोर्टिफाइड नमक' को विभिन्न खाद्य पदार्थों (चपाती, दाल, सांभर चावल, सब्जी सलाद, आलू और बैंगन) में मिलाने पर उनके स्वाद और सुगंध में कोई भी परिवर्तन नहीं देखा गया जिसने इस नमक के व्यवहारिक होने का प्रमाण दिया।

डबल फोर्टिफाइड नमक के समुदाय-आधारित प्रभावकारिता परीक्षण में बिना किसी दुष्प्रभाव के मनुष्यों के रक्त सीरम में आयरन और आयोडीन की मात्र में सुधार की पुष्टि। विकसित 'डबल फोर्टिफाइड नमक' का नियामक प्राधिकारणों के नियमानुसार विषाक्तता, पूर्व-नैदानिक, नैदानिक तथा सामुदायिक तुलनात्मक अध्ययन भी किया गया है, प्राप्त परिणामों से निष्कर्ष निकला कि कि 'डबल फोर्टिफाइड नमक' आयरन और आयोडीन का एक प्रभावी स्रोत है और इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं। 300 से अधिक स्वयंसेवकों पर किए गए 10 महीने के परीक्षण में संस्थान द्वारा विकसित 'डबल फोर्टिफाइड नमक' ने हीमोग्लोबिन मान में 85% सकारात्मक प्रभाव दिखाया और आयोडीन संकेतकों में भी सुधार हुआ। यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि बाजार में उपलब्ध साधारण आयोडीन युक्त नमक और आयरन-युक्त नमक (इस अध्ययन के लिए तुलनात्मक मूल्यांकन हेतु नियंत्रण के रूप में लिया गया) ने क्रमशः 200% और 50% सकारात्मक प्रभाव दिखाया, जो सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई द्वारा नवाचारी तकनीक से विकसित 'डबल फोर्टिफाइड नमक' की उपयोगिता को प्रमाणित करता है। अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली ने भी सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई 'डबल फोर्टिफाइड नमक' तकनीक को मान्यता दी है। खाद्य पदार्थों के लिए किसी भी उपयुक्त सामग्री को एफएसएसएआई से अनुमोदन प्राप्त करने के लिए कई नियामक मानदंडों का पालन करना आवश्यक है। इनमें से एक महत्वपूर्ण मानदंड खाद्य सामग्री की सुरक्षा है, जिसके लिए आमतौर पर कई पूर्व-नैदानिक नियामक अध्ययन किए जाते हैं। खाद्य सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में अनुसंधान करने के लिए संस्थान के प्रयासों की एफएसएसएआई, नई दिल्ली (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय) के पोषण एवं सुदृढ़ीकरण संबंधी वैज्ञानिक पैनल द्वारा सराहना की गई है और आगे की अनुमोदन प्रक्रिया प्रगति पर है।

इस 'डबल फोर्टिफाइड नमक' निर्माण की तकनीक बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) द्वारा सुरक्षित है। इस तकनीक को अमेरीका सहित कई देशों के पेटेंट हासिल हैं। डबल फोर्टिफाइड नमक ऐसा नवाचार है जिसने पोषण विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ा है। यह केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य की दिशा में क्रांतिकारी कदम है। आयरन और आयोडीन की कमी को एक साथ दूर करने वाला यह यह डबल फोर्टिफाइड नमक स्वस्थ भारत मिशन में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए भारत जैसे विकासशील देश में स्वास्थ्य सुधार का सशक्त साधन बन सकता है।

डबल फोर्टिफाइड नमक की विशेषता

  • इसमें Fe के रूप में आयरन मिलाया गया है, जो आयरन का अधिक स्थिर रूप है और सफेद रंग का होता है।
  • यह नवाचार नमक के सफेद रंग को बरकरार रखने और आयोडीन और आयरन की प्रभावी सांद्रता को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है, जिससे इसकी शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है। यह बेहतर मुक्त-प्रवाह (फ्री-फ्लो) वाला और देखने में सुरुचिपूर्ण है।
  • इसकी निर्माण प्रक्रिया आसानी से मापनीय और लागत प्रभावी है।
  • इस नमक से मैग्नीशियम का अतिरिक्त पोषण मिलता है जो शरीर के लिए आवश्यक एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है और मधुमेह को रोकने में मदद करता है। इस नमक को स्वाद और बनावट से समझौता किए बिना उपयोग किया जा सकता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।