बारिश के मौसम में बढ़ जाता है लेप्टोस्पायरोसिस खतराः लक्षण और कारण      Publish Date : 19/07/2026

         बारिश के मौसम में बढ़ जाता है लेप्टोस्पायरोसिस खतराः लक्षण और कारण

                                                                                                डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

लेप्टोस्पायरोसिस के मामले मानसून के दौरान अधिक संख्या में देखने को मिल सकते हैं। यह संक्रमण जानवरों से इंसानों में फैलता है। दूषित पानी पीने से इस संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ जाता है। इस समस्या का समय रहते ही उपचार कराना बहुत आवश्यक होता है, अन्यथा, यह किडनी, लिवर और फेफड़ों आदि को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

बारिश का मौसम भले ही ठंडक और गर्मी से राहत लेकर आता है। लेकिन, इस मौसम में कई तरह के संक्रामक बीमारियों का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। इस मौसम में डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड के साथ-साथ लेप्टोस्पायरोसिस रोग का खतरा भी बढ़ जाता है। Centres for Disease Control and Prevention के अनुसार, लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो आमतौर पर जानवरों से मानव जाति में फैलता है। ऐसे में यदि इस बीमारी का समय पर उपचार किया जाए, तो यह किडनी, लिवर, ब्रेन और फेफड़ों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

                                 

अकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ0 रमन कुमार बताते हैं कि लेप्टोस्पायरोसिस Leptospira नामक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। यह एक जीनोटिक बीमारी है यानी यह जानवरों से मनुष्य में फैलती है। आमतौर पर चूहे, भैंस, सूअर और अन्य कई जानवर इस बैक्टीरिया के वाहक हो सकते हैं। दरअसल, संक्रमित जानवरों के पेशाब से यह बैक्टीरिया मिट्टी तक पहुंच सकता है और मिट्टी से पानी में पहुंच सकता है। मानसून में गलियों और सड़कों में पानी भरने के कारण इस संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ जाता है।

लेप्टोस्पायरोसिस कैसे फैलता है?

CDC के अनुसार, लेप्टोस्पायरोसिस का संक्रमण कई तरीकों से फैल सकता है। इन कारणों में मुख्य रूप से शामिल हैं-

  • बाढ़ या जलभराव वाले पानी में नंगे पैर चलने से लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ सकता है। इससे खुले घाव या खरोंच के आदि के माध्यम से बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकता है।

  • कई बार पानी में संक्रमित जानवरों का पेशाब मिला होता है, इस दूषित पानी को पीने से भी लेप्टोस्पायरोसिस हो सकता है।

  • दूषित पानी के आंख, नाक या मुंह के संपर्क में आने से लेप्टोस्पायरोसिस रोग हो सकता है।

  • यह बीमारी आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती है।

लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षणः CDC के अनुसार, संक्रमण के 2 से 3 दिनों के भीतर लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं-

  • तेज बुखार आना।

  • सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द होना।

  • ज्यादा ठंड लगना।

  • कमजोरी और थकान महसूस करना।

  • मतली और उल्टी होना।

  • दस्त लगना और पेट दर्द होना।

  • त्वचा या आंखों का पीला पड़ना।

  • त्वचा पर चकत्ते होना।

हालांकि, यह लक्षण डेंगू, मलेरिया या फ्लू जैसे भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए अगर ऐसे लक्षण महसूस हो तो तुरंत ही जांच करवानी चाहिए।

क्या यह जानलेवा हो सकता है?

आमतौर पर अगर बीमारी का समय पर जांच और इलाज किया जाए, तो यह ठीक हो सकता है। लेकिन, कुछ मामलों में यह शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। जैसे-

  • पीलिया हो सकता है।

  • किडनी फेल हो सकती है।

  • लिवर को स्थाई नुकसान पहुंच सकता है।

  • सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।

  • मस्तिष्क की झिल्ली में संक्रमण हो सकता है।

  • सेप्सिस रोग का खतरा हो सकता है।

  • इतना ही नहीं, कुछ गंभीर मामलों में यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।

लेप्टोस्पायरोसिस की जांच कैसे की जाती है?

                                    

लेप्टोस्पायरोसिस की जांच के लिए कुछ टेस्ट कराए जा सकते हैं। इनमें शामिल हैं-

  • ब्लड टेस्ट।

  • PCR टेस्ट।

  • एंटीबॉडी टेस्ट (IgM) आदि।

क्या इसका इलाज संभव है?

CDC के अनुसार, इस बीमारी का इलाज संभव है। इस बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाइयां दे सकते हैं। हालांकि, बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा का सेवन न करें। गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है।

लेप्टोस्पायरोसिस से बचाव कैसे करें?

बारिश के मौसम में कुछ सावधानियां अपनाकर आप संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

  • जलभराव वाले पानी में नंगे पैर न चलें, इससे खतरा कम हो सकता है।

  • अगर पानी में जाना है तो वाटरप्रूफ जूते और दस्ताने पहनें।

  • त्वचा पर कट या घाव हो तो उसे अच्छी तरह ढककर रखें।

  • पीने के लिए हमेशा उबला हुआ और फिल्टर किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करें।

सलाह विशेषः बारिश के मौसम में इस बीमारी का खतरा ज्यादा बना रहता है। इसलिए मानसून में आपको ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। अगर आपको तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी आना, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण महसूस हो तो इनकी अनदेखी बिल्कुल न करें। समय पर जांच और इलाज से इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है और गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।