फैटी लीवर की समस्या है तो हो जाएं सावधान समय पर करें इसका उपचार      Publish Date : 16/07/2026

फैटी लीवर की समस्या है तो हो जाएं सावधान समय पर करें इसका उपचार

                                                                                           डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

फैटी लीवर होने पर ज्यादातर लोगों में आरंभिक दशा में कोई लक्षण स्पष्ट दिखाई नहीं देते जिससे इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है अगर थकावट पेट की ऊपरी और दाएं पसली के नीचे किंचित भारीपन और ऐसा की अनुभूति होती है तो फैटी लीवर की स्थिति हो सकती है समय पर इसकी जांच प्रारंभ करके इलाज करना चाहिए।

लिवर अर्थात यकृति शरीर में त्वचा के बाद सबसे बड़ा अंग होता है यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुचारू रखने में असाधारण भूमिका निभाता है हृदय के अतिरिक्त लिवर किडनी अमाशय और नदी तंत्र का ठीक काम करना स्वास्थ्य की गारंटी माना जाता है लीवर के स्वास्थ्य के बारे में प्राय लापरवाही बढ़ती जाती है जिससे फैटी लीवर की समस्या बहुत आम होती जा रही है हैरानी की बात है कि विश्व की लगभग 40% जनसंख्या फैटी लीवर से ग्रसित है फिर भी बड़ी संख्या में लोग इसे लेकर अनभिज्ञ ही रहते हैं।

                                      

क्या है फैटी लिवररू एक स्वस्थ लीवर शरीर में अनेक प्रकार के कार्य करता है इसका प्रारंभिक कार्य है कि रक्त से विजातीय तत्वों को बाहर निकलना उन्हें सम अवस्था में लाना यह कार्बोहाइड्रेट्स व प्रोटीन के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है तथा बिल अथवा पित्ताशय के स्त्राव को भी नियंत्रित करता है लीवर खून की उचित तरलता उसमें रक्त कणों की स्थिति और आवश्यकता पड़ने पर खून के जमाव में सहायता करता है स्वस्थ लवर से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है।

क्या है फैटी लीवर के लक्षण: फैटी लिवर उसे अवस्था को कहते हैं जब लीवर में फैट यानि वासा की मात्रा एक सीमा से अधिक बढ़ने लगती है गंभीर अवस्था में लिवर में सूजन लीवर की कोशिकाओं के सख्त होने जहां तक की सुरक्षित जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है पीलिया जैसी बीमारियों का उत्पन्न होना भी लीवर के प्रभावित होने के लक्षण होते हैं नान एल्कोहलिक लिवर कैंसर जैसे गंभीर रोग का ओरिजिन फैटी लिवर ही माना जाता है।

समस्या को समझे और सतर्क हो जाएरू हमें समझना होगा कि फैटी लीवर जैसी स्थिति एकदम से उत्पन्न नहीं होती बल्कि इसमें वर्षों की लापरवाही जैसे कारण जिम्मेदार होते हैं मोटापा मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल के स्तर का बड़े रहना बाहर भारी तली हुई वस्तुओं का अधिक और लगातार सेवन करना शारीरिक निष्कर्ता तथा अनुवांशिक प्रवृत्ति उनके मुख्य कारण माने जाते हैं फैटी लीवर की एक अन्य स्थिति भी है जो अल्कोहल अथवा मध्य के अधिक मात्रा में और लंबे समय तक सेवन करने से उत्पन्न होती है जो की दुसाध्य होती है।

क्या है उपचार के उपायरू कोई भी अनुभवी चिकित्सक रोगी के पेट को दबाकर इस समस्या के बारे में बता सकता है केवल ग्रेडिंग जानने के लिए लैब टेस्ट की जरूरत पड़ती है अल्ट्रासाउंड फाइब्रो स्कैन तथा रक्त के परीक्षण से फैटी लीवर का भली भांति निदान किया जा सकता है आयुर्वेद ग में फैटी लीवर को या करता है इसके ग्रेड और एक और ग्रेट 2 अवस्था को ठीक करना सम है शुरुआती जीवन शैली को सुधार करने से होती है दूसरा भजन काम करना अल्कोहल का पूर्णता त्याग भरी और ताली खाद वस्तुओं का निषेध तथा सक्रिय जीवन शैली जैसे उपाय करने होते हैं औषधि के साथ अगर इन उपायों पर गौर किया जाए तो इस बीमारी से पूरी तरह मुक्ति प्राप्त की जा सकती है।

आयुर्वेदिक में भी है इसका इलाज: आयुर्वेद मनीषियों ने. अनेक एकल औषधियों पर अनुसंधान कर लिवर के रोगों का प्रभावशाली उपचार सुनिश्चित किया है। कुटकी, पुनर्नवा भूमि आमला, कालमेघ, गिलोय, शरपुंखा और भृंगराज जैसी औषधियां फैटी लिवर की प्रशस्त औषधियां मानी जाती हैं। अन्य शास्त्रीय औषधियों में फलत्रिकदि क्वाथ, पुनर्नवादि क्वाथ और त्रिफला मंडूर जैसे योगों का प्रयोग किया जा सकता है। वैद्य रोग की अवस्था जांच कर औषधि की मात्रा तय कर सकते हैं।

मुख्य एलोपैथिक इलाज और प्रबंधन से पा सकते है छुटकारा

फैटी लिवर (Fatty Liver) के एलोपैथिक इलाज में मुख्य रूप से जीवनशैली में बदलाव (lifestyle modifications) शामिल हैं। दवाइयों की ज़रूरत बहुत कम मामलों में पड़ती है, खासकर जब बीमारी बढ़ चुकीहोया कोई संबंधित समस्या (जैसे मधुमेह या उच्च कोलेस्ट्रॉल) हो।

  • जीवनशैली में बदलाव: यह फैटी लिवर के इलाज की नींव है और अधिकांश मामलों में इससे लिवर की स्थिति में सुधार होता है।
  • स्वस्थ आहार: संतुलित और कम वसा वाला भोजन करें, जिसमें फल और सब्जियां शामिल हों। चीनी और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बचें।
  • वजन घटाना: यदि आप मोटे हैं, तो धीरे-धीरे और सुरक्षित रूप से वजन कम करना (लगभग 0.5 से 1 किलोग्राम प्रति सप्ताह) बहुत प्रभावी हो सकता है।
  • नियमित व्यायाम: हफ्ते में कम से कम पांच दिन मध्यम-तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि (जैसे तेज चलना) करें।
  • शराब से परहेज: यदि फैटी लिवर का कारण शराब है (एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज), तो शराब का सेवन पूरी तरह बंद करना ज़रूरी है।
  • अन्य स्वास्थ्य स्थितियों का प्रबंधन: मधुमेह, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियों को नियंत्रित करें, क्योंकि ये लिवर की समस्याओं को बढ़ा सकती हैं।
  • दवाइयाँ: वर्तमान में, फैटी लिवर के लिए बहुत कम विशिष्ट दवाइयाँ उपलब्ध हैं। डॉक्टर कुछ दवाएँ लिख सकते हैं, लेकिन ये आमतौर पर संबंधित समस्याओं या गंभीर मामलों के लिए होती हैं।
  • विटामिन E: कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि विटामिन E (एक एंटीऑक्सीडेंट) सूजन और लिवर में वसा जमाव को कम करने में मदद कर सकता है, खासकर नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (NAFLD/MASLD) वाले लोगों में।
  • मधुमेह की दवाएँ: यदि आपको मधुमेह है, तो डॉक्टर मेटफॉर्मिन या पियोग्लिटाज़ोन जैसी दवाएँ लिख सकते हैं, जो लिवर की स्थिति में भी मदद कर सकती हैं।
  • कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएँ: स्टेटिन जैसी दवाएँ उन रोगियों के लिए प्रभावी साबित हुई हैं जिन्हें फैटी लिवर के साथ उच्च कोलेस्ट्रॉल भी है।
  • नई दवाएँ: हाल ही में कुछ नई दवाइयाँ, जैसे Resmetirom (Rezdiffra) और सेमाग्लूटाइड (Semaglutide), विकसित हुई हैं जो लिवर में वसा और स्कारिंग (Fibrosis) को कम करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन ये हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होतीं।
  • लिवर सपोर्ट सप्लीमेंट्स: डॉक्टर कभी-कभी कुछ सप्लीमेंट्स जैसे L-Ornithine L-Aspartate या Silymarin युक्त दवाएँ (जैसे Reheplyn Tablet या Ursetor Tablet) सुझा सकते हैं, हालांकि इनकी प्रभावकारिता पर अभी भी शोध जारी है।
  • फैटी लिवर के लिए किसी भी दवा या सप्लीमेंट का सेवन करने से पहले, अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। वे आपके लिवर की स्थिति (फाइब्रोसिस के स्तर सहित) का आकलन करने के लिए फाइब्रोस्कैन जैसे परीक्षण करेंगे और उसके अनुसार सही उपचार योजना की सिफारिश करेंगे।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।