प्रदूषण से बचाव के लिए योगासन      Publish Date : 13/07/2026

         प्रदूषण से बचाव के लिए योगासन

वायु प्रदूषण अब सामान्य समस्या नहीं रही। यह रोजमर्रा का संकट बन चुका है। इससे सांस लेना कठिन हो गया है। इसके कारण आंखों में जलन रहती है। थकान जल्दी होती है। बच्चों और वृद्धों पर इसका असर अधिक पड़ता है। ऐसी स्थिति में शरीर को भीतर से सशक्त (स्वस्थ) रखना आवश्यक है।

                                

योग और प्राणायाम प्रदूषण के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रदूषण के समय शरीर पर कई बुरे प्रभाव पड़ते हैं। इससे फेफड़ों में कफ रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा घटती है। प्रतिरोधक शक्ति कमजोर होती है। नींद और एकाग्रता प्रभावित होती है। इन प्रभावों को संतुलित करने के लिए जमा होता है। शुक्ल नियमित अभ्यास आवश्यक है। ताड़ासन फेफड़ों को फैलाता है। इससे श्वसन क्षमता बढ़ती है। इस आसन को आप सुबह खुले स्थान में करें। भुजंगासन से फेफड़ों में जमी अशुद्ध वायु को बाहर निकालने में सहायता मिलती है।

                                           

सेतु बंधासन श्वसन तंत्र और गर्दन के भाग को सक्रिय करता है। रक्त प्रवाह को सुधरत्ता है। बालासन प्रदूषण के कारण होने वाली थकान को कम करता है। इससे मन शांत रहता है। अनुलोम विलोम फेफड़ों को स्वच्छ करता है। कपाल भाति कफ को बाहर निकालता है। भ्रामरी श्वसन तंत्र को शांत करता है और मन पर पड़े प्रदूषण जन्य तनाव को कम करता है। इसे पांच से सात बार करें। उज्जायी श्वास को नियंत्रित करता है तथा फेफड़ों में गरमाहट बनाए रखता है।