
हड्डी का क्षय रोग और इसका पारंपरिक उपचार Publish Date : 10/07/2026
हड्डी का क्षय रोग और इसका पारंपरिक उपचार
डॉ0 युवराज चौधरी एवं मुकेश शर्मा
क्षयरोग या टीबी एक अत्यंत संक्रामक रोग है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस बैक्टीरिया के कारण होता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2022 में टीबी से कुल 1.3 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई है, जिसमें एचआईवी से पीड़ित 1,67,000 लोग भी शामिल है। दुनिया भर में कोविड-19 के बाद टीबी दूसरा प्रमुख संक्रामक रोग है और इससे कई लोग प्रभावित भी होते हैं।
मुख्य रूप से टीबी फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन कई मामलों में देखा गया है कि यह रोग शरीर के दूसरे अंगों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। जब टीबी फैलता है, तो उसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी ट्यूबरक्लोसिस (ईपीटीबी) कहा जाता है। इसका संबंध हड्डी और जोड़ों से भी है, जिसे हड्डी का क्षय रोग भी कहा जाता है। आज की अपनी इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से हम जानगें हड्डी के टीबी के प्रकार, कारण, इलाज और रोकथाम क्या है? इसके अतिरिक्त यदि हड्डियों के क्षय रोग के संबंध में आपको कोई भी समस्या या संक्षय है, तो हम आपको सलाह देंगे कि आप हमारे श्वसन चिकित्सक से सलाह लें।
हड्डी के टीबी के प्रकार

हड्डी का क्षय रोग अलग-अलग प्रकार के होते हैं। रोग के प्रकार के आधार पर इलाज की योजना बनाई जाती है। हड्डी के क्षय रोग के प्रकारों को नीचे बताया गया है -
- रीढ़ की हड्डी का क्षय रोग।
- कूल्हे के जोड़ का क्षय रोग।
- कोहनी का क्षय रोग।
- घुटने के जोड़ का क्षय रोग।
- टखने के जोड़ का क्षय रोग।
- शरीर के ऊपरी भाग का क्षय रोग।
हड्डी की टीबी के कारण
हड्डी का क्षय रोग तब होता है, जब टीबी फेफड़ों के बाहर फैल जाता है। आमतौर पर टीबी हवा के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। टीबी के इलाज के दौरान यह संक्रमण फेफड़ों या लिम्फ नोड्स से रक्त के माध्यम से हड्डियों, रीढ़ या जोड़ों में फैल सकता है। इसके अतिरिक्त किसी क्षय रोग से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी बोन टीबी का भी खतरा अधिक होता है।
सरल भाषा में कहा जाए तो हड्डी के क्षय रोग का कारण माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस बैक्टीरिया है। आमतौर पर यह बैक्टीरिया फेफड़ों को संक्रमित करता है और उसी के माध्यम से हड्डियों और जोड़ों सहित शरीर के अन्य भाग में फैल जाता है। यह रोग रीढ़ की हड्डी में भी फैल सकता है। दुर्लभ मामलों में, बोन टीबी एटिपिकल माइकोबैक्टीरिया या नॉन-ट्यूबरकुलस माइकोबैक्टीरिया के संक्रमण के कारण भी हो सकता है।
हड्डी के क्षय रोग के लक्षण
सामान्यतः किसी भी रोग के शुरू होने पर उसके लक्षण उत्पन्न होते हैं। हमारे अयुर्वेदिक विशेषज्ञ का मानना है कि टीबी के शुरुआती मामलों में लक्षण थोड़े कम ही दिखते हैं। रोगी लक्षण का सामना तब करते हैं जब स्थिति थोड़ी सी गंभीर हो जाती है। शुरुआत में रोगी को किसी भी प्रकार का दर्द नहीं होता है, लेकिन वह निम्नलिखित लक्षणों का सामना करते हैं -
- थकान और बुखार आना।
- रात में पसीना आना।
- अचानक वजन कम होना।
- जोड़ों और पीठ में गंभीर दर्द।
- कलाई और कोहनियों में दर्द।
- हड्डियों में किसी भी प्रकार की समस्या महसूस होना।
- मस्तिष्क संबंधित समस्याएं।
- तंत्रिका संबंधी समस्याएं।
- स्पाइन टीबी।
- कार्पल टनल सिंड्रोम।
हड्डी की टीबी का उपचार और रोकथाम

हड्डी की टीबी के कारण रोगी को बहुत सारे नकारात्मक प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। प्रारंभिक चरण में हड्डी के क्षय रोग के इलाज के लिए दवाओं और डाइट प्लान का सहारा लिया जाता है। निम्नलिखित इलाज के विकल्पों की सहायता से डॉक्टर हड्डी के टीबी का इलाज करते हैं -
सर्जरीः गंभीर मामलों में सर्जरी की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए स्पाइनल टीबी के मामलों में लैमिनेक्टॉमी का सुझाव दिया जाता है। इस सर्जरी में स्पाइनल कॉर्ड पर अतिरिक्त दबाव को कम किया जाता है।
दवाएं: दवाएं टीबी के इलाज का पहला चरण है। इलाज के लिए अलग-अलग दवाओं का कोर्स दिया जाता है। रिफैम्पिसिन, एथेमब्युटोल, आइसोनियाज़िड और पाइरेज़िनमाइड वह दवाएं हैं जिनका सुझाव डॉक्टर सामान्यतः देते हैं।
एमडीआर-ट्रीटमेंटः इस प्रक्रिया में एंटी ट्यूबरकुलर दवाओं के संयोजन का प्रयोग किया जाता है। हड्डी के क्षय रोग के इलाज के लिए यह प्रक्रिया सबसे उत्तम है।
डॉट्स ट्रीटमेंटः इस प्रक्रिया को अंग्रेजी भाषा में डायरेक्टली ऑब्ज़र्व्ड थेरेपी शार्टटर्म कोर्सेज कहा जाता है। टीबी के रोगी अपने दवाओं को समय पर ले सकें इसी प्रकार इस ट्रीटमेंट को डिजाइन किया गया है।
इलाज के साथ कुछ सावधानियां है, जिनका खास ख्याल रखने की आवश्यकता होती है। यह सावधानियां टीबी से बचाव में बहुत मदद करते हैं। निम्नलिखित तरीकों से टीबी से रोकथाम संभव है -
- खांसते समय मुंह या नाक को ढंके: सार्वजनिक स्थानों पर मास्क लगाकर रहें और इधर-उधर थूकने से बचें।
- चाय, कॉफी और सोडा जैसे कैफीन युक्त पदार्थ आपके लिए हानिकारक हो सकते हैं।
- प्रोसेस्ड फूड और तले हुए भोजन से उचित दूरी बना कर रखें। बोन टीबी के मामले में यह रोकथाम बहुत ज्यादा जरूरी है।
- तम्बाकू, शराब का अत्यधिक सेवन बोन टीबी के लिए अधिक हानिकारक है। हड्डी के क्षय रोग के मामले में यह सबसे ज्यादा हानिकारक साबित हो सकता है।
- चिकन, प्याज, और उच्च सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थों के सेवन को बंद करें।

लेखकः डॉ0 युवराज चौधरी, निदेशक, हंस मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल, कंकर खेड़ा मेरठ।
