
घर से बाहर निकलते ही छींक आने के कारण एवं उपचार Publish Date : 06/07/2026
घर से बाहर निकलते ही छींक आने के कारण एवं उपचार
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिन्हें घर से बाहर निकलते ही छींकें आना शुरू हो जाती है तो क्या आपको भी घर से बाहर निकलते ही छींक आने की समस्या है- यदि हां, तो ऐसे लोगों में से आप अकेले नहीं है, इस समस्या से हममें से बहुत से लाग परेशान रहते हैं। आज के हमारे प्रस्तुत लेख में हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ और जिला अस्पताल मेरठ के मेडिकल ऑफिसर डॉ0 दिव्यांशु सेंगर आपको बता रहे हैं आखिर कुछ लोगों को घर से बाहर निकलते ही छींकें क्यों आने लगती है?
घर से बाहर निकलते ही क्यों आती है छींकें
हम में से कुछ लोगों को घर से बाहर निकलते ही अचानक छींकें आने लगती है। हालांकि, देखने और सुनने में यह समस्या बहुत आम सी समस्या लग सकती है, लेकिन इसके पीछे शरीर की एक वैज्ञानिक और एलर्जिक प्रतिक्रिया होती है। मेडिकल साइंस के अनुसार, ऐसा नाक की सेंसटिविटी और बाहरी वातावरण में मौजूद एलर्जेंस तत्वों के कारण होता है।
एलर्जिक राइनाइटिस का प्रभाव

डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर का कहना है कि इस समस्या का सबसे बड़ा कारण एलर्जिक राइनाइटिस होता है। इस स्थिति के चलते हमारी नाक की अंदरूनी परत बहुत संवेदनशील हो जाती है और जैसे ही धूल, पराग कण या प्रदूषण नाक के संपर्क में आते हैं, तो ऐसे में हमारा शरीर उन्हें बाहर निकालने के लिए छींक का सहारा लेता है। यही वह कारण है कि हममें से कुछ लोगों को घर से बाहर निकलते ही बार-बार छींक आने लगती है।
तापमान और हवा में बदलाव
घर और बाहर के वातावरण के तापमान में अचानक से होने वाले बदलाव भी छींक आने का कारण बन सकते है। ठंडी या गर्म हवा के लगते ही नाक की रक्त वाहिकाएं उसके प्रति अपनी प्रतिक्रिया देती हैं, जिससे नॉन-एलर्जिक राइनाइटिस ट्रिगर हो जाता है और हमें छींकें आना शुरू हो जाती हैं।
धूल और प्रदूषण भी है कारण
शहरों की हवा में मौजूद धूल और सूक्ष्म कण जैसे PM-2.5 और PM-10 नाक में जलन पैदा करते हैं। ये कण सांस के जरिए शरीर में जाने की कोशिश करते हैं, लेकिन नाक उन्हें रोकने के लिए छींक के रूप में तुरंत प्रतिक्रिया देती है। यही कारण है कि प्रदूषण वाले क्षेत्रों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है।
धूप में छींक आने की समस्या
कुछ लोगों को तेज धूप में बाहर निकलते ही छींक आने लगती है। इस समस्या को चिकित्सीय भाषा में फोटिक स्नीज रिफ्लेक्स या ।ब्भ्व्व् सिंड्रोम भी कहा जाता है। इसमें तेज रोशनी आंखों से जुड़ी नसों को प्रभावित करती है और इसके फलस्वरूप हमारा मस्तिष्क गलत तरीके से छींक का सिग्नल भेज देता है और हमें तुरंत ही छींक आने लगती है।
इम्यून सिस्टम की संवेदनशीलता
जिन लोगों की इम्युनिटी या एलर्जी प्रवृत्ति कुछ अधिक होती है, उनकी नाक सामान्य बदलावों पर भी अधिक रिएक्ट करती है। ऐसे में हल्का सा धूल या मौसम बदलाव भी छींक आने का कारण बन सकता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
