
स्टैम सेल और जीन थेरेपी जैसी आधुनिक इलाज के लिए बने स्पष्ट नियम Publish Date : 05/07/2026
स्टैम सेल और जीन थेरेपी जैसी आधुनिक इलाज के लिए बने स्पष्ट नियम
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
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सरकार ने किया नियमों में बड़ा बदलाव अब स्टैम सेल और जीन थेरेपी जैसी आधुनिक इलाज को लेकर पहली बार बनाए गए स्पष्ट नियम।
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कैंसर समेत दूसरी गंभीर बीमारियों के इलाज का रास्ता होगा आसान, पहले सीमित थी निगरानी की व्यवस्था।
कैंसर थेलेसीमिया और कई अन्य दुर्लभ जेनेटिक बीमारियों के इलाज में उपयेग की जाने वाली स्टेम सेल थेरेपी और जीन थेरेपी के जैसी आधुनिक तकनीकों पर अब पहले से ज्यादा कड़ी निगरानी रखी जाएगी। केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन कर इन आधुनिक चिकित्सा उत्पादों को केंद्रीय लाइसेंस इम्प्रूविंग अथॉरिटी के दायरे में शामिल कर दिया है। इससे इन उत्पादों के निर्माण और लाइसेंस पर अब केंद्र और राज्य दोनों सरकारें आपस मिलकर निगरानी रखेंगी।
इसका मतलब यह है कि अगर किसी मरीज को ब्लड कैंसर ल्यूकेमिया या लिंफोमा है तो उसका इलाज अब कई जगह सीआरटी सेल थेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकों से किया जाता है। इसी तरह थेलेसेमिया या कुछ अन्य जन्मजात बीमारियों में जिन थेरेपी का इस्तेमाल शुरू किया जा चुका है, वहीं कुछ मरीजों में जानवरों के उत्तकों से बने हार्ट बॉल भी लगाए जाते हैं। ये सभी इलाज बेहद आधुनिक और जटिल हैं, इसलिए सरकार चाहती है कि निर्माण के लिए मरीज तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया पर सख्त निगरानी में रहे।

इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि नई दवाएं तुरंत बाज़ार में आ जाएंगी, बल्कि इसका फायदा यह होगा कि भविष्य में आने वाले आधुनिक इलाज अधिक सुरक्षित। बेहतर गुणवत्ता वाले और तय मानकों के अनुसार मरीजों तक पहुंच सकेंगे, यानी अगर कोई नई जिन थैरेपी या स्टैम सेल आधारित इलाज भारत में आता है तो उसके लिए पहले से स्पष्ट और सख्त निर्माणीय व्यवस्था मौजूद होगी। अब तक, वैक्सीन शो मिलीमीटर से अधिक की आईवी फ्लूड ड्रिप और आरडी एन ए तकनीकी से बनने वाली दवाएँ ही ऐसी श्रेणी में थीं, जिनकी निगरानी केंद्र और राज्य सरकार में मिलकर करते थे, लेकिन स्टैम् सेल जिन थेरेपी और जीनोग्राफ पशु ऊतकों से बने चिकित्सा उत्पाद इस व्यवस्था में शामिल नहीं थे, अब इन आधुनिक उत्पादों को भी उसी श्रेणी में शामिल कर लिया गया है।
इसका मतलब है कि इनके लाइसेंस की जांच ज्यादा सख्ती से होगी-
पूरे देश में एक जैसी गुणवत्ता मानक लागू होंगे। केंद्र और राज्य दोनों मिलकर इनकी निगरानी करेंगे। साथ ही मरीजों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकेगा।
आखिर सरकार ने क्यों किया बदलाव

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार स्टैम सेल्थेरेपी जिन थेरेपी और सीएआरटी सेल्थ थेरेपी जैसी तकनीकी तेजी से विकसित हो रही है और इनका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है चूंकि यह बेहद जटिल और संवेदनशील तकनीकें हैं, इसलिए इन पर सामान दवाओं की तुलना में अधिक नियामकीय निगरानी की जरूरत है, सरकार का कहना है, कि इस बदलाव से मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी पूरे देश में एक समान नियामकीय व्यवस्था लागू होगी और भारत का दवा नियामक ढांचा वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत होगा।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
