
एआई से बनी पहली वैक्सीन, पशु-जनित संक्रमण में भी है कारगर Publish Date : 01/07/2026
एआई से बनी पहली वैक्सीन, पशु-जनित संक्रमण में भी है कारगर
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की सहायता से एक बिल्कुल नई तरह की वैक्सीन (टीके) विकसित की है। इसे वायरस से सुरक्षा और महामारी रोकथाम के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की शोध टीम के अनुसार, यह पहली बार है जब किसी वैक्सीन के अहम घटक को पूरी तरह से एआई से डिजाइन कर उसका इंसानों पर परीक्षण किया गया है।

इस शोध के नतीजे जर्नल ऑफ इन्फेक्शन में प्रकाशित किए गए हैं। यह वैक्सीन केवल मौजूदा कोरोना वायरस या उसके अलग-अलग तरह वैरिएंट्स के खिलाफ ही नहीं, बल्कि वर्तमान में पशु-जनित कोरोना वायरसों के खिलाफ भी सुरक्षा देने के उद्देश्य से बनाई गई है, जो भविष्य में नई महामारी की वजह बन सकते हैं। हालांकि, इस वैक्सीन का परिक्षण अभी अपने शुरुआती चरण में ही है, लेकिन टीम पहले से ही फ्लू और इबोला से निपट सकने वाली अलग-अलग वैक्सीन विकसित कर रही है। शोधकर्ताओं का कहना है कि वैक्सीन हमारे शरीर को संक्रमण की पहचान करना सिखाती हैं, जिससे संक्रमण से लड़ने की हमारी संभावना काफी बढ़ जाती है।
एआई से ऐसे बनी सुपर-एंटीजन वैक्सीन
वायरस निगरानी कार्यक्रमों के दौरान कई कोरोना वायरसों के पहचाने गए आनुवंशिक कोड एकत्र किए गए। इसके बाद इन सभी का विश्लेषण एआई के द्वारा किया गया और उसके आधार पर एक विशेष सुपर-एंटीजन डिजाइन किया। एआई से तैयार यह सुपर-एंटीजन प्रतिरक्षा प्रणाली को पूरे कोरोना वायरस परिवार के खिलाफ प्रशिक्षित करने के लिए बनाया गया है, ताकि वायरस में बदलाव होने या किसी नए वायरस के जानवरों से इंसानों में आने पर भी पूरी सुरक्षा बनी रहे।
वैक्सीन को नियमित अपडेट करना भी जरूरीः इस वैक्सीन को विकसित करने वाली कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की टीम का कहना है कि कुछ वायरस अपना रूप बदलने में माहिर होते हैं, इसलिए जल्द ही वैक्सीन की प्रभावशीलता कम हो सकती है। यही वजह है कि कोविड और मौसमी फ्लू की वैक्सीन को नियमित तौर से अपडेट करते रहना भी जरूरी होता है। विवि के प्रोफेसर जोनाथन हीनी कहते हैं, शोधकर्ता हमेशा से ही वायरस के पीछे भागते रहे हैं।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
