
क्यों चकराता है सिर जानें इसका सही निदान Publish Date : 28/06/2026
क्यों चकराता है सिर जानें इसका सही निदान
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
क्या आपको अचानक चक्कर महसूस होता है और आप इसे कमजोरी, थकान या कोई अन्य सामान्य बात मानकर टाल देते हैं। अगर आपके साथ बार-बार ऐसा हो रहा है तो यह वर्टिगो के लक्षण भी हो सकते हैं, इसके लिए सतर्कता बरतने और डाक्टर से परामर्श की जरूरत पड़ती है। कई लोग अचानक महसूस करते हैं कि उनके आसपास की चीजें घूम रही हैं या उनका संतुलन बिगड़ रहा है। अक्सर इसे सामान्य चक्कर समझकर अनदेखा कर दिया जाता है, लेकिन कई बार यह वर्टिगो हो सकता है। दरअसल, वर्टिगो कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर के संतुलन तंत्र में समस्याओं का संकेत है। यह समस्या दैनिक जीवन, कामकाज और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। वर्टिगो में व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है जैसे कमरा घूम रहा हो या वह खुद घूम रहा हो। यह स्थिति कुछ सेकेंड से लेकर घंटों तक रह सकती है और इसमें मतली, उल्टी, कान में आवाज, सिरदर्द या फिर चलने में असंतुलन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
वर्टिगो के प्रमुख कारण

वर्टिगो के कई कारण हो सकते हैं। सबसे आम कारण इनर ईयर (आंतरिक कान) में संतुलन बनाने वाली प्रणाली में गड़बड़ी है। इसे बेनाइन पैराक्सिस्मल पोजीशनल वर्टिगो (बीपीपीवी) कहते हैं। इसमें सिर की पोजीशन बदलते ही चक्कर आने लगते हैं।
समस्या के कुछ अन्य सम्भावित कारण:
- कान में संक्रमण।
- मेनियर डिजीज।
- माइग्रेन।
- गर्दन की समस्या।
- सिर में चोट।
- स्ट्रोक या न्यूरोलॉजिकल समस्याएं।
- अत्यधिक तनाव और नींद की कमी।
- ब्लडप्रेशर या शुगर में अचानक बदलाव।
इसके अतिरिक्त कई लोग लंबे समय तक स्क्रीन देखने, अनियमित दिनचर्या और तनावपूर्ण जीवनशैली के कारण चक्कर की समस्या का अनुभव करते हैं। इसलिए हर चक्कर को सामान्य कमजोरी मान लेना सही नहीं है।
कैसे करें बचाव
हालांकि, वर्टिगो से पूरी तरह बचाव हर हाल में संभव नहीं है, लेकिन फिर भी कुछ उपयों को अपनाकर इस जोखिम कम किया जा सकता है:
- नियमित हेल्थ चेकअप कराएं।
- ब्लडप्रेशर और शुगर नियंत्रित रखें।
- पर्याप्त नींद और हाइड्रेशन बनाए रखें।
- तनाव को नियंत्रित करें।
- सिर की चोट से बचें।
- बिना डाक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें।
वर्टिगो को नजरअंदाज करना सही नहीं है। समय पर पहचान, सही इलाज व संतुलित जीवनशैली से अधिकांश लोग सामान्य व सक्रिय जीवन जी सकते हैं।
जीवनशैली की है बड़ी भूमिका
वर्टिगो को नियंत्रित करने में जीवनशैली महत्वपूर्ण है। अनियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद न लेना, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी समस्या को बढ़ा सकते हैं। मरीजों को अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखना चाहिए। पर्याप्त नींद लेना, अचानक सिर या गर्दन की मूवमेंट से बचना और शरीर को हाइड्रेट बनाए रखना बहुत जरूरी है।
जीवनशैली में करें सुधार:
- प्रतिदिन सात से आठ घंटे की नींद का लेना आवश्यक है।
- अचानक खड़े होने या झटके से सिर घुमाने से बचें।
- लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप देखने के बीच नियमित ब्रेक लेते रहना जरूरी है।
- तनाव कम करने के लिए योग और व्यायाम जैसे उपाय प्रभावी हैं।
- नियमित हल्की एक्सरसाइज करना भी पर्याप्त होता है।
- अल्कोहल और धूम्रपान से दूरी बनाना जरूरी है। ऐसे छोटे-छोटे सुधार उपयोगी साबित होंगे।
खानपान में करें बदलाव
कई लोगों को पता नहीं होता कि डाइट भी वर्टिगो को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से जिन लोगों को मेनियर डिजीज या फ्लूइड बैलेंस की समस्या होती है, उनके लिए खानपान महत्वपूर्ण हो जाता है। शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। डिहाइड्रेशन चक्कर बढ़ा सकता है।
- पर्याप्त पानी पिएं, नमक सीमित मात्रा में लें।
- अधिक कैफीन व एनर्जी ड्रिंक्स लेने से बचें।
- संतुलित, हल्का भोजन करने का प्रयास करें।
- भोजन में ताजे फल, हरी सब्जियां लें।
- लंबे समय तक खाली पेट न रहें।
- यदि शुगर लेवल गिरता है, तो भी चक्कर जैसी स्थिति महसूस हो सकती है, इसलिए नियमित समय पर भोजन करना जरूरी है।
वर्टिगो को कैसे करें मैनेज

वर्टिगो का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है। डाक्टर मरीज की हिस्ट्री, लक्षण और जरूरत पड़ने पर जांच के आधार पर उपचार तय करते हैं। कुछ मामलों में दवाएं मदद करती हैं, जबकि बीपीपीवी जैसी स्थिति में विशेष सिर और गर्दन की एक्सरसाइज, जिन्हें वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन एक्सरसाइज कहते हैं, काफी प्रभावी हो सकती हैं। अगर चक्कर बार-बार आ रहे हैं, चलने में असंतुलन हो, बोलने में दिक्कत हो या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करना चाहिए। यह कुछ गंभीर मामलों में न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत भी हो सकता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
