लंबी यात्रा के दौरान पैरों में ब्लड क्लॉट्स का बनना      Publish Date : 24/06/2026

लंबी यात्रा के दौरान पैरों में ब्लड क्लॉट्स का बनना

                                                                                                 डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

क्या आपको भी ट्रैवल के दौरान पैरों के आसपास खून के थक्के बनने लगते हैं? अगर हां, तो इस स्थिति को लेकर थोड़ा सतर्क हो जाइए। आज के अपने इस लेख में हम अपने डॉक्टर से इस समस्या के बारे में अच्छी तरह से समझते हैं-

लंबी दूरी की फ्लाइट, बस या ट्रेन से ट्रैवल करना, अब काफी कॉमन बात हो चुकी है। हालांकि, लगातार कई घंटों तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से शरीर में कुछ परेशानियां भी होने लगती हैं, जिसमें खून के थक्के बनने के जोखिम भी शामिल होता हैं। इस स्थिति को चिकत्सीय की भाषा में डीप वेन थ्रॉम्बोसिस या डीवीटी के रूप में जाना जाता है।

                                  

प्यारे लाल शर्मा, जिला अस्पताल, मेरठ के मेडिकल ऑफिसर डॉ0 दिव्यांशु सेंगर कहते हैं कि डीवीटी की स्थिति तब बनतती है, जब पैरों की गहरी नसों में खून का थक्का बन जाता है। अगर यह थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है, तो गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए लंबे समय तक यात्रा करने वाले लोगों को इस खतरे के बारे में जानकारी होना बहुत आवश्यक है।

ट्रैवल के दौरान खून के थक्के क्यों बनते हैं?

सामान्य परिस्थितियों में पैरों की मांसपेशियां चलने-फिरने के दौरान खून को दिल की ओर वापस भेजने में मदद करती हैं। लेकिन जब कोई व्यक्ति कई घंटों तक लगातार बैठा रहता है, तो पैरों में ब्लड फ्लो धीमा पड़ जाता है।

Blood Clot

ब्लड का यह धीमा फ्लो नसों में जमाव पैदा करता है, जिससे थक्का बनने की संभावना बढ़ जाती है। विशेष रूप से फ्लाइट में कम जगह, सीमित गतिविधि और कुछ मामलों में शरीर में पानी की कमी भी इस जोखिम को बढ़ा सकती है।

किन लोगों को होता है अधिक खतरा?

डॉक्टर सेंगर का कहना है कि हर यात्री में डीवीटी नहीं बनती, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जाता है, जैसे-

1. 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग।

2. मोटापे से प्रभावित व्यक्ति।

3. गर्भवती महिलाएं।

4. हाल ही में सर्जरी करवाने वाले मरीज।

5. कैंसर से प्रभावित लोग।

6. धूम्रपान करने वाले लोग।

7. हॉर्मोनल दवाओं का सेवन करने वाली महिलाएं।

8. पहले से ही डीवीटी या खून के थक्के की समस्या से प्रभावित लोग, इत्यादि।

इन समूहों में यात्रा से पहले अतिरिक्त सावधानी बरतना महत्वपूर्ण माना जाता है।

पैरों में खून का थक्का बनने के लक्षण

                                  

डीवीटी के लक्षण हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देते। फिर भी कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इसमें कुछ लक्षण शामिल हैं-

पैरों में दर्द

1. एक पैर में सूजन का आना।

2. पैर में दर्द या भारीपन होना।

3. त्वचा का लाल या गर्म महसूस होना।

4. चलने पर दर्द का बढ़ना।

अगर यह थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाता है, तो सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या अचानक चक्कर आने जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता ली जानी चाहिए।

ट्रैवल में होने वाली इस परेशानी को कम करने के उपाय

अच्छी बात यह है कि कुछ आसान उपाय अपनाकर डीवीटी के खतरे को काफी हद तक कम किया जाता है।

  • हर 1 से 2 घंटे में उठकर थोड़ा चलना-फिरना।
  • सीट पर बैठे-बैठे पैरों को हिलाना।
  • टखनों को घुमाने वाली एक्सरसाइज करना।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीना।
  • बहुत तंग कपड़े पहनने से बचना।
  • लंबी यात्रा से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना, यदि कोई जोखिम कारक मौजूद हो, इत्यादि।

कुछ उच्च जोखिम वाले लोगों को कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहनने की सलाह भी दी जाती है, जिससे पैरों में रक्त प्रवाह बेहतर बनाए रखा जा सकता है।

ध्यान रखें कि ट्रैवल के दौरान थोड़ी-सी शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त पानी का सेवन और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद करता है। सुरक्षित यात्रा का मतलब सिर्फ मंजिल तक पहुंचना नहीं, बल्कि पूरे सफर के दौरान स्वास्थ्य की रक्षा करना भी माना जाता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।