
ब्लड टेस्ट से अल्जाइमर रोग का पहले पता लगाना सम्भव Publish Date : 11/06/2026
ब्लड टेस्ट से अल्जाइमर रोग का पहले पता लगाना सम्भव
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
अभी हाल में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, खून की जांच से अल्जाइमर रोग के लक्षण प्रकट होने से दशकों पहले ही इसके संकेतों की पहचान की जा सकती है। यह बात प्यारे लाल शर्मा, जिला अस्पताल मेरठ के मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर ने कही है। उन्होंने बताया कि मस्तिष्क में टाऊ, प्रोटीन जैसे बायोमार्कर का उच्च स्तर, बौद्धिक क्षमता में गिरावट और तेजी से हो रही कमी का संकेत देता है। यह न्यूरो डिजेनेरेटिव स्थिति धीरे धीरे याददाश्त और सोचने समझने की प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है और अंततः रोजमर्रा के कामकाज में बाधा डालने लगती है। इस बीमारी की शुरुआत मस्तिष्क में एमीलाइड बीटा ए प्रोटीन के प्लॉक और फास्फो राइलेटेड टाउ प्रोटीन के उलझे हुए गुच्छों के जमा होने से होती है।

एमिलाइड और टाउ प्रोटीन सामान का कामकाज के लिए बहुत अधक महत्वपूर्ण है, लेकिन संशय होने पर विषाक्त साबित हो सकते हैं और न्यूरान की मृत्यु का कारण भी बन सकते हैं। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा कि खून में एमएलए बीटा और टाउ प्रोटीन के स्तर को मापना इन प्रोटीनों में होने वाले परिवर्तनों को ट्रैक करने का एक तरीका है। शोधकर्ताओं के द्वारा गया कि इसका उपयोग अल्जाइमर रोग का पता लगाने के लिए भी किया जा सकता है।
इस शोध में अमेरिका के 1350 ऐसे वयस्कों के खून में ए 42 ए 40 और टाउ प्रेाटीन 217 जैसे बायोमार्कर के लेवल को मापा गया जिन्हें डिमेशिया नहीं था और जिनकी औसत उम्र 61 साल थी, इनमें से 6 प्रतिशत व्यस्कों में अल्जाइमर रोग से जुड़े ए और टाउ के स्टैंडर्ड हाईकट ऑफ़ लेवल पाए गए। इस प्रकार लोगों को सचेत रहना चाहिए और समय पर खून की जाँच कर जाकर अल्जाइमर की संकेतों का पता चला कर इलाज करना प्रारंभ करें।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
