
प्रोस्टेट कैंसर के मिथक: बचाव का सही तरीका Publish Date : 08/06/2026
प्रोस्टेट कैंसर के मिथक: बचाव का सही तरीका
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों और इलाज से जुड़े मिथक समय पर जांच और उपचार में अवरोध पैदा कर सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि प्रोस्टेट की गंभीर होती समस्या को लेकर हर स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जाए। प्रोस्टेट कैंसर भारतीय पुरुषों में तीसरा सबसे आम कैंसर है। आमतौर इसका पता 65 साल की उम्र के आसपास चलता है। हर 125 पुरुषों में से एक को प्रोस्टेट कैंसर की आशंका रहती है। प्रोस्टेट कैंसर पर अक्सर खुलकर चर्चा नहीं होती। कुछ लोग मानते हैं कि जब तक दर्द या स्पष्ट लक्षण न हों, तब तक चिंता की जरूरत नहीं है। इससे इलाज में देरी हो सकती है।
प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षण
प्रोस्टेट कैंसर अक्सर चुपके से पनपता है। प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षणों में पेशाब करने में दिक्कत, पेल्विक हिस्से में दर्द, पेशाब में खून आना, बार-बार पेशाब आना, या पेशाब का बहाव शुरू करने या उसे बनाए रखने में कठिनाई शामिल हो सकती है।

मिथक 1: अगर में स्वस्थ महसूस करता हूं तो मुझे प्रोस्टेट कैंसर नहीं हो सकता।
सच्चाईः प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण तब दिखते हैं जब बीमारी आगे बढ़ चुकी होती है। नियमित स्क्रीनिंग का अभाव बीमारी को गंभीर बनाता है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को डाक्टर से सलाह लेकर नियमित जांच करानी चाहिए, ताकि इलाज संभव हो सके।
मिथक 2: प्रोस्टेट कैंसर होने पर इलाज दर्दनाक होता है।
सच्चाईः आज के समय में प्रोस्टेट कैंसर का इलाज बेहतर और पर्सनलाइज्ड हो चुका है। हर मरीज को एक जैसे इलाज की जरूरत नहीं होती। यह उम्र, बीमारी की स्टेज, सामान्य स्वास्थ्य और मरीज की प्राथमिकताओं के आधार पर तय होता है। यहां तक कि उन्नत (मेटास्टेटिक) स्टेज में भी कई मामलों में हार्मोनल थेरेपी और नई लक्षित (टार्गेटेड) दवाओं से इलाज संभव है, जिसमें कीमोथेरेपी की जरूरत भी नहीं पड़ती।
मिथक 3: अगर कैंसर फैल गया तो कुछ नहीं किया जा सकता।
सच्चाईः कैंसर का एडवांस स्टेज अंत नहीं है। जब प्रोस्टेट कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है, तब भी इलाज के कई विकल्प उपलब्ध होते हैं। नई और आधुनिक थेरेपी बीमारी की गति को धीमा कर सकती हैं, लक्षणों को कम कर सकती हैं और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में मदद करती हैं। आज कई मरीजों के लिए एडवांस प्रोस्टेट कैंसर एक दीर्घकालिक (क्रानिक) बीमारी की तरह मैनेज किया जा रहा है, जिसमें समय-समय पर इलाज को मरीज को जरूरत के अनुसार बदला जाता है।
कब मिलें डाक्टर से
50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को नियमित रूप से प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग करवाने और अपने डाक्टर से परामर्श करना चाहिए-विशेष रूप से जब पेशाब में खून दिखाई दे, क्योंकि यह प्रोस्टेट कैंसर का एक आम लक्षण है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
