
सिगरेट पीने और तम्बाकू खाने वाले लोगों में निकोटीन की लत क्या होती है Publish Date : 05/06/2026
सिगरेट पीने और तम्बाकू खाने वाले लोगों में निकोटीन की लत क्या होती है?
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
तम्बाकू का सेवन हेल्थ के लिए बेहद नुकसानदायक होता है। तम्बाकू का सेवन करने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होने का जोखिम बढ़ जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में लगभग 26 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तम्बाकू का सेवन करते हैं। आंकड़ों की मानें तो देश में हर 3 में से 1 वयस्क तम्बाकू का सेवन करता है। यही कारण है कि भारत में हर साल 13 लाख से अधिक लोग तम्बाकू से जुड़ी बीमारियों के चलते अपनी जान गवां देते हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से लाखों लोगों की मौत को रोका जा सकता है, इसलिए लोगों में तम्बाकू से होने वाले नुकसानों के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।

ज्यादातर लोगों को लगता है कि तम्बाकू सिर्फ फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता है, जबकि इसे कई अन्य प्रकार के कैंसर और बीमारियों के लिए भी जिम्मेदार माना जाता है। आज हम अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जानते हैं कि तम्बाकू का सेवन करने से कौन-कौन से कैंसर हो सकते हैं और निकोटीन की लत इतनी खतरनाक क्यों होती है?
तम्बाकू खाने से कौन-से कैंसर होते हैं?
- तम्बाकू खाने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ता है।
- तम्बाकू मुंह और जीभ के कैंसर के खतरे को भी बढ़ाता है।
- तम्बाकू खाने से गले के कैंसर का जोखिम ज्यादा बना रहता है।
- मूत्राशय के कैंसर का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।
- तम्बाकू खाने से अग्नाशय और किडनी के कैंसर का रिस्क भी काफी अधिक होता है।
भारत में गुटखा और चबाने वाला तम्बाकू विशेष रूप से खतरनाक साबित हो रहा है और लोगों में मुंह का कैंसर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन लोग शुरुआती लक्षणों जैसे न भरने वाले मुंह के छाले, सफेद धब्बे, जबड़े में जकड़न या निगलने में परेशानी को नजरअंदाज कर देते हैं।
निकोटीन की लत कितनी खतरनाक होती है?
डॉ0 सेंगर बताते हैं कि निकोटीन एक ऐसा तत्व है, जो लोगों को तम्बाकू की गिरफ्त में बनाए रखता है। जैसे-जैसे समय बितता है, तम्बाकू की लत शारीरिक और मानसिक, दोनों के लिए जरूरत बन जाती है। निकोटीन की लत से दिमाग पर गहरा असर पड़ता है। इससे दिमाग में डोपामिन का स्तर बढ़ता है। इससे थोड़ी देर के लिए शरीर को अच्छा महसूस होता है, ऐसे में जब बार-बार इसका सेवन किया जाता है तो इसकी आदत लग जाती है और बिना तम्बाकू का सेवन किए बेचैनी महसूस होने लगती है। निकोटीन की लत कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बनती है। इससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ता है। जैसे-
- ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।
- निकोटीन फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचाता है।
- यह सांस की बीमारी के खतरे को कई गुना बढ़ाता है।
- निकोटीन प्रजनन-तंत्र पर भी बुरा असर डालता है।
आजकल युवाओं के बीच फ्लेवर वाले वेप्स और ई-सिगरेट की लत काफी बढ़ रही है, जो सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आजकल तम्बाकू को लाइफस्टाइल और तनाव कम करने के नाम पर जोड़ा जा रहा है।
तम्बाकू क्यों नहीं छोड़ पाते लोग?

- कई बार दोस्तों के दबाव की वजह से लोग तम्बाकू या सिगरेट का सेवन बंद नहीं कर पाते हैं।
- आजकल कई लोग तनाव या चिंता कम करने के लिए तम्बाकू का सेवन करते हैं। तनाव और चिंता में रहने की वजह से वे तम्बाकू का सेवन करते हैं।
- लंबे समय तक होने वाले नुकसान की जानकारी का अभाव की वजह से भी लोग तम्बाकू का सेवन लगातार करते रहते हैं।
इन लक्षणों की न करें अनदेखी
अगर आप सिगरेट या तम्बाकू का सेवन करते हैं और आपको ये लक्षण महसूस हो तो बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। तुरंत डॉक्टर से मिलें और जांच जरूर कराएं।
- 3 सप्ताह से ज्यादा समय तक लगातार खांसी का बने रहना।
- थूक के साथ खून का आना।
- मुंह में हर वक्त छाले बने रहना।
- आवाज भारी होना या आवाज का बैठ जाना।
- अचानक वजन कम होना।
- निगलने में कठिनाई होना।
- लगातार सीने में दर्द होना।
क्या कैंसर से बचाव संभव है?
कैंसर से काफी हद तक बचाव संभव है। इसके लिए कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी है।
- धूम्रपान और चबाने वाले तम्बाकू से पूरी तरह से दूरी बनाकर रहें।
- पैसिव स्मोकिंग से बचना बहुत जरूरी है। इससे भी कैंसर का खतरा बढ़ता है।
- अगर आप लंबे समय से तम्बाकू का सेवन कर रहे हैं तो समय-समय पर जांच जरूर कराएं।
- स्कूल और परिवार के स्तर पर बच्चों और किशोरों में जागरूकता जरूर फैलाएं।
अच्छी बात यह है कि तम्बाकू छोड़ने के तुरंत बाद शरीर खुद को ठीक करना शुरू कर देता है। कुछ ही महीनों में फेफड़ों की कार्यक्षमता सुधरने लगती है और समय के साथ कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
