
क्या होता है, ‘जोन आउट होना? और यह कितना खतरनाक है? Publish Date : 30/05/2026
क्या होता है, ‘जोन आउट होना? और यह कितना खतरनाक है?
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
जब कोई भी व्यक्ति कोई काम करते हुए खो जाता हैं और फिर भूल जाते हैं कि क्या कर रहे थे, तो इसी समस्या को जोन आउट कहा जाता है। अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जानते हैं कि यह मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित करता है।
जोन आउट का दिमाग पर क्या प्रभाव पड़ता हैः क्या आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति को देखा है या खुद महसूस किया है कि खाना खाते हुए आप कहीं खो से जाते हैं और किसी एक चीज पर नजर टिकाकर जोन आउट हो जाते हैं? ऐसा केवल खाना खाते समय नहीं, बल्कि कई काम करते समय महसूस हो सकता है। फिर कुछ देर बाद अचानक एहसास होता है कि खाना खत्म भी हो गया और स्वाद तक याद नहीं रहा। इसे जोन आउट होना कहते हैं।

पहली बार में यह बहुत नॉर्मल लग सकता है, लेकिन अगर ऐसा बार-बार होने लगे तो समझ जाएं कि यह मानसिक थकान और भावनात्मक दबाव का संकेत हो सकता है। इस विषय पर साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी के अनुसार “जोन आउट होने का मतलब है कि एक व्यक्ति कुछ समय के लिए मानसिक रूप से अपने आसपास की चीजों से कट जाता है। वह फिजीकली तो वहां मौजूद होता है लेकिन उसका ध्यान, इमोशन्स और सोच किसी दूसरी जगह उलझी हुई है।”अब हम इस विषय पर थोड़ा विस्तार से बात करते हैं।
ऑटो मोड पर चला जाता है दिमाग
डॉक्टर बताते हैं कि आजकल की जिंदगी में लोगों का दिमाग शायद ही कभी पूरी तरह शांत हो पाता है। क्योंकि खाना खाते समय भी लोग काम के बारे में सोच रहे होते हैं, मोबाइल चला रहे होते हैं या किसी चिंता में डूबे रहते हैं। इसे धीरे-धीरे दिमाग का लगातार ऑटो मोड पर डालना कहा जाता है। कई लोग इसे सिर्फ ध्यान भटकना समझते हैं, लेकिन इसके पीछे मानसिक कारण भी हो सकते हैं।
अगर या कोई भी व्यकित जरूरत से ज्यादा सोचता है, स्ट्रेस में रहता है, उस पर मेंटल और इमोशनल दबाव डाला जाता है, उसकी नींद पूरी नहीं हो रही होती है, अकेलापन या भीतर दबा हुआ तनाव महसूस करता है, हर समय स्क्रीन और मोबाइल में उलझे रहता है आदि अनेक कारण हो सकते हैं। ऐसे में कई बार दिमाग खुद को कुछ समय के लिए आसपास की चीजों से अलग कर लेता है।
क्या यह खतरनाक है?

डॉक्टर बताते हैं कि हर बार जोन आउट होना खतरनाक नहीं होता, क्योंकि कभी-कभी किसी सोच में खो जाना या कुछ मिनट के लिए ध्यान भटक जाना, यह सब बहुत ही नॉर्मल बातें हैं। लेकिन अगर यह बहुत ज्यादा होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जैसे-
- बातचीत के बीच बार-बार खो जाना।
- लोगों की बातें सुनकर भी समझ न पाना।
- खाना खाते या काम करते समय बार-बार मानसिक रूप से गायब हो जाना।
- छोटी-छोटी चीजें भूलने लगना।
- हर समय खालीपन या डिस्कनेक्ट महसूस होना।
- तो यह मानसिक तनाव या भावनात्मक थकावट का संकेत हो सकता है।
डॉक्टर सेंगर कहते हैं कि आजकल लोग अपने शरीर को तो आराम देने की कोशिश करते हैं, लेकिन दिमाग को आराम देना भूल जाते हैं। लगातार भागती जिंदगी, सोशल मीडिया का दबाव और हर समय उपलब्ध रहने की आदत दिमाग को थका देती हैं।
इससे बाहर कैसे निकलें?
आप डॉक्टर की बताई इन टिप्स को फॉलो कर इस समस्या से बच सकते हैं-
- खाना खाते समय सिर्फ खाने पर ध्यान दें।
- मोबाइल और स्क्रीन से थोड़ी दूरी बनाएं।
- पर्याप्त नींद लें।
- अपने मन की बातें दबाकर न रखें।
- दिन में कुछ समय बिना किसी शोर और स्क्रीन के बिताएं।
- जरूरत महसूस हो तो मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करें।
मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं हमेशा तेज आवाज में नहीं आतीं। कई बार ये ऐसे छोटे संकेतों के द्वारा सामने आती हैं, जिन्हें हम अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसलिए अगर आपका मन बार-बार खुद को दुनिया से कटा हुआ महसूस कर रहा है, तो उसे समझना और समय रहते ध्यान देना जरूरी होता है।
हालांकि, हम में से बहुत लोगों को यह पता ही नहीं होता है, लेकिन रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजें हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इसी में जोनआउट होना भी शामिल, और अगर यह समस्या अधिक बढ़ जाए को कई कामों को बिगाड़ सकती है और मेंटल पीस को खराब कर सकती हैं और आपकी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
