
मेनोपॉज से भी होती है चिंता-अवसाद और भूलने की समस्या Publish Date : 27/05/2026
मेनोपॉज से भी होती है चिंता-अवसाद और भूलने की समस्या
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) महिलाओं के मस्तिष्क की संरचना में अहम बदलाव से जुड़ा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि मेनोपॉज के बाद मस्तिष्क के उन क्षेत्रों में ग्रे मैटर की मात्रा घट जाती है, जो याददाश्त और भावनात्मक नियंत्रण से जुड़े हैं। इसके साथ ही महिलाओं में चिंता, अवसाद और नींद से संबंधित समस्याएं भी बढ़ती देखी गईं।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज की यह वैज्ञानिक स्टडी जर्नल साइकोलॉजिकल मेडिसिन में प्रकाशित हुई है। यूके बायोबैंक के आंकड़ों पर आधारित यह अब तक का सबसे बड़ा विश्लेषण है। इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने यूके बायोबैंक के तहत लगभग 1 लाख 25 हजार महिलाओं के डाटा का विश्लेषण किया। प्रतिभागियों को तीन समूहों में बांटा गया। वे महिलाएं जो अभी मेनोपॉज में नहीं पहुंची थीं, वे जो मेनोपॉज के बाद थीं और कभी एचआरटी (हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी) नहीं ली, और वे जो मेनोपॉज के बाद एचआरटी ले चुकी थीं।

महिलाओं से मेनोपॉज के लक्षणों, मानसिक स्वास्थ्य, नींद के पैटर्न और समग्र स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्न पूछे गए। कुछ प्रतिभागियों ने याददाश्त और प्रतिक्रिया समय से जुड़े संज्ञानात्मक परीक्षण भी पूरे किए। करीब 11 हजार महिलाओं के एमआरआई स्कैन किए गए, जिससेशोधकर्ताओं को मस्तिष्क की संरचना में अंतर देखने का मौका मिला। अध्ययन में औसतन मेनोपॉज की उम्र लगभग 49.5 वर्ष पाई गई। एचआरटी लेने वाली महिलाओं ने आमतौर पर करीब 49 वर्ष की उम्र में इलाज शुरू किया था।
उदासी महसूस करती है महिलाएं
रिसर्च में यह भी सामने आया कि जिन महिलाओं का मेनोपॉज हो चुका था, ये मानसिक तनाव से ज्यादा जूझ रही थीं। ऐसी महिलाएं चिंता, बेचैनी और उदासी महसूस होने पर डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेने ज्यादा जाती थीं, जबकि मेनोपॉज से पहले की महिलाओं में में यह यह प्रवृत्ति कम थी। सर्वे में उन्होंने खुद भी बताया कि वे ज्यादा उदास महसूस करती हैं, और इन्हें डिप्रेशन की दवाएं दिए जाने की संभावना भी ज्यादा पाई गई। आसान शब्दों में कहें तो मेनोपॉज के बाद कई महिलाओं के लिए भावनात्मक संतुलन बनाए रखना पहले की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
सक्रिय जीवनशैली और नियमित व्यायाम जरूरी: यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के डिपार्टमेंट ऑफ साइकियाट्री की डॉ. क्रिस्टेल लैंगली ने कहा कि लगभग हर महिला को मेनोपॉज से गुजरना पड़ता है और यह एक जीवन बदल देने वाली घटना हो सकती है, चाहे वे एचआरटी लें या नहीं। उन्होंने बताया कि इस दौर में नियमित व्यायाम, सक्रिय जीवनशैली और संतुलित आहार बेहद जरूरी है, ताकि इसके कुछ नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके।
- डॉ. लैंगली के मुताबिक समाज को मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति भी ज्यादा संवेदनशील होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला संघर्ष कर रही है तो मदद मांगने में झिझक नहीं होनी चाहिए।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
