
स्वच्छता से दूर रहेगा मलेरिया Publish Date : 24/05/2026
स्वच्छता से दूर रहेगा मलेरिया
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
मलेरिया मादा एनिफिलीज मच्छरों के काटने से होता है। उसमें पाया जाने वाला प्लाज्मोडियम स्पीसीज एक सूक्ष्म परजीवी है, जो मलेरिया का कारण बनता है। एनिफिलीज प्रजाति के मच्छर आमतौर पर साफ पानी में अंडे देते और पनपते हैं। वहां से निकलकर लोगों को काटते हैं। यदि आसपास किसी को मलेरिया है, तो वहां इसके फैलने का जोखिम अधिक रहता है। मच्छर ही इसे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलाते हैं।
आरंभिक लक्षण

- सर्दी के साथ बुखार सबसे सामान्य लक्षण है।
- सिरदर्द, चक्कर आ रहा है, तो यह मस्तिष्कमलेरिया का लक्षण हो सकता है।
- एक दिन छोड़कर ठंड के साथ बुखार आता है।
- आसपास के इलाके में पहले से ही मलेरिया रहा है, तो इसकी प्रबल आशंका रहती है।
जांच के तरीके: मलेरिया का पता माइक्रोस्कोपी द्वारा रक्त की जांच से लगाया जा सकता है। अगर उसमें परजीवी दिखाई देते हैं तो परीक्षण को पाजिटिव मानते हैं। रैपिड डिटेक्शन टेस्ट से भी इस बीमारी का पता लगाया जाता है।
दो तरह का होता है मलेरिया: मलेरिया में पीवी और पीएफ दो तरह के प्लाज्मोडियम पाए जाते हैं। पीएफ मस्तिष्क मलेरिया की वजह बनता है, जबकि पीवी सामान्य तरह का मलेरिया है। अब पीवी के कई नए लक्षण भी उभर रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में लोग थकान होने पर प्रायः इसके पीछे के कारणों को नहीं जान पाते। शरीर में खून की कमी होने लगती है, क्योंकि परजीवी उसे खत्म कर रहा होता है।
बचाव के लिए करें ये उपाय
- मच्छरों को पनपने से रोकने के उपाय करें।
- आसपास सफाई का विशेष ध्यान रखें। कहीं पानी न जमा होने पाए।
- पीवी और पीएफ के लिए उपचार अलग-अलग होता है।
- यदि 14 दिनों की दवा है, तो उसे पूरा करें, बीच में न छोड़ें। अलग रहें, ताकि दूसरे इसकी चपेट में न आएं।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
