ऑटिज्म से जुड़ी कुछ गलत धारणाएं      Publish Date : 21/05/2026

      ऑटिज्म से जुड़ी कुछ गलत धारणाएं

                                                                                                     डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

तमाम जागरूकता अभियानों के उपरांत भी, भारत में ऑटिज्म के बारे लोगों को बहुत ही कम जानकारी उपलब्ध है। जानकारी के कम होने के चलते विभिन्न ऐसी गलत धारणाएं पैदा होती हैं, जो कि इस समस्या की सही पहचान और इसके उपचार में भी बाधा डालती है। हमारे आज के प्रस्तुत लेख में ऑटिज्म से जुड़ी कुछ जरूरी तथ्यों को दिया जा रहा है, तो आपसे अपील है कि आप हमारे इस लेख को पूरा पढ़ें और ऑटिज्म के सम्बन्ध में अपनी जानकारी बढ़ाएं-

चिकित्सकों का मानना है कि ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है उचित थेरेपी और सहयोग से इससे निपटने में सहायता मिलती है। ऑटिज्म बच्चों के संवाद और भावनाओं को व्यक्त करने की क्षमता के साथ ही दुनिया को देखने के उनके नजरिए को भी प्रभावित करता है। इस समस्या से ग्रस्त बच्चों में इसके आरम्भिक लक्षण आरम्भ के दो वर्षों में ही दिखाई देने लगते हैं। हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ और प्यारे लाल शर्मा जिला अस्पताल मेरठ के मेडिकल ऑफिसर डॉ0 दिव्यांशु सेंगर ने बताया कि इस समस्या से ग्रस्त बच्चों का देरी से बोलना, आंखों से सम्पर्क नहीं बना पाना और बच्चे के सोशल इंटरैक्शन में कमी होने के जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। पूर्व की अपेक्षा आज इस समस्या की पहचान अधिक हो रही है। लड़कों में इस समस्या का अनुपात 4ः1 के आसपास देखने में आता है।

                              

ऐसे में समस्या की यह बढ़ोत्तरी केवल मामलों के बढ़ने की नहीं अपितु जागरूकता, समय पर स्क्रीनिंग और लोक-लाज का निरंतर कम होता भय आदि भी एक बड़ा कारण है। इसके बावजूद ऑटिज्म को लेकर विभिन्न प्रकार की भ्रांतियां आज भी हमारे समाज में अभी भी प्रचलित है, जैसे इस समस्या को पालन-पोषण की गलती या टीकों के साथ जोड़ना आदि, जबकि वैज्ञानिक तौर पर यह बात पूरी तरह से गलत पाई गई है। वास्तव में ऑटिज्म कोई बीमारी ही नहीं है कि इसका उपचार किया जाए, बल्कि सही समय पर थेरेपी और सहयोग आदि के माध्यम से समस्या से ग्रस्त बच्चे को आत्मनिर्भर और एक संतुलित जीवन व्यतीत करने में उसकी सहायता की जा सकती है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।