
कैसा है आपका मेटाबॉलिज्म और यह कितना मजबूत है Publish Date : 16/05/2026
कैसा है आपका मेटाबॉलिज्म और यह कितना मजबूत है
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
आज के समय में बार-बार सामने आने वाले शब्द मेटाबॉलिज्म अर्थात चयापचय के समम्बध में आप कितना जानते और समझते हैं। वास्तव में मेटाबॉलिज्म हमारे शरीर की वह कुदरती प्रक्रिया होती है, जो भोजन को ऊर्जा में बदलती है। ऐसे में आंकड़े दिखाते हैं कि गलत खान-पान एवं एक त्रुटिपूर्ण जीवनशैली के चलते हमारी सेहत की यह प्रमुख आधार स्तम्भ भी अब जल्द ही थकने लगा है। इसी के कारण आज हममें से अधिकतर लोग, जो कि बाहर से फिट दिखाई देते है और अभी वह युवावस्था में ही हैं वह भी डायबिटीज और ब्लड़ प्रेशर आदि की समस्या से जूझ रहे हैं।
ऐसे हालातों में हम अपने मेटाबॉलिज्म को किस प्रकार से दुरस्त बनाकर रख सकते हैं, इसके सम्बन्ध में आपको महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर रहे हैं हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ और प्यारे लाल शर्मा, जिला अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ0 दिव्यांशु सेंगर-
दोस्तों वर्तमान समय में डॉक्टरोंके पास ऐसे मरीज बहुत अधिक संख्या में पहुँच रहे हैं जो बाहर से देखने में बिलकुल फिट नजर आते हैं, परन्तु इनकी जांच रिपोर्ट इनका कुछ और ही हाल बता रही हैं। इंडियन काँसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनूसार वर्तमान समय में लगभग 71 प्रतिशत वयस्क लोग मेटाबॉलिक डिसऑर्डर की समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें से भी 45 प्रतिशत लोग तो ऐसे हैं कि जो अहुत मोटे दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन बावजूद इसके वह जीवनशैली से जुड़ी विभिन्न समस्याओं से पीड़ित हैं। आँकड़े बताते हैं कि देश में दस करोड़ से अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित हैं और 13 करोड़ से अधिक लोग प्री-डायबिटीज के स्तर पर हैं। विभिन्न अध्ययनों में देश का लगभग प्रत्येक तीसरा वयस्क फैटी लिवर की समस्या से ग्रस्त है। कहने का अर्थ यह है कि देश की कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ शरीर मेटाबॉलिक बैलेंस (चयापचय संतुलन) बिगड़ना शुरू हो चुका है।
मेटाबॉलिज्म का अर्थ
मेटाबॉलिज्म हमारे शरीर में निरंतर चलने वाली वह प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत भोजन को ऊर्जा में बदला जाता है। हमारे शरीर में बनने वाली इसी ऊर्जा के माध्यम से सांस लेने, दिल धड़कने, दिमाग के काम करने, शरीर के ऊतकों का निर्माण करने, भोजन को रस में बदलने के जैसी समस्त क्रियाएं सुचारू करने के साथ ही दैनिक कार्यों को सम्पन्न करना आदि सुचारू रूप से सम्पन्न होती हैं। आयुर्वेद में इसे अग्नि अर्थात भोजन को अच्छी तरह से पचाने और उसे रस में बदलने की क्षमता से जोड़कर देखा जाता है। इस अग्नि के मन्द पड़ जाने पर पेट में भारीपन, गैस, थकान या सुस्ती आदि महसूस हो सकते हैं। नैचुरोपैथी के अनुसार पाचन, नींद, पानी, धुआँ, चलना-फिरना और शरीर की प्राकृतिक लय यदि संतुलित हैं तो हमारा मेटाबॉलिज्म भी सही प्राकर से कार्य करता है।
हम मेटाबॉलिज्म की ओर तब तक ध्यान नहीं देते हैं जब तक कि वजन के बढ़ने, कमजोरी, थकान का अनुभव, गैस, नींद की गड़बड़ी अथवा बार-बार लगने वाली भूख आदि के जैसी समस्याएं हमारे सामने नहीं आने लगती हैं। यदि यह लक्षण दिखाई भी देते हैं तो भी इन्हें अक्सर सामान्य मान कर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जानकार बताते हैं कि मेटाबॉलिज्म केवल मोटापे या पतलेपन से जुड़ा ही मामला नहीं है, बल्कि इसका सम्बन्ध ऊर्जा, हॉर्मोन, पाचन, उम्र और हमारी रोजमर्रा की आदतों से जुड़ा होता है।
आयुर्वेद के अनुसार, विपरीत प्रकृति वाले आहारों का सेवन करने से हमारे पाचन तंत्र को हानि पहुँचती है। जैसे खटटे फलों का दूध के साथ सेवन करना, मीठे ठण्ड़े पेय और नमकीन आदि वस्तुओं को एक साथ खाने से हमारे पाचन तंत्र पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इससे हमारे शरीर में विषाक्त तत्वों का स्तर बढ़ जाता है। लम्बे समय तक भूख के नहीं लगने के बाद भी खाना खाना, देर तक भूखे रहना, जल्दी-जल्दी भोजन करना, स्क्रीन को देखते हुए भोजन करना या देर रात को गरिष्ठ भोजन का सेवन करने के जैसी आदतें हमारे पाचन तंत्र पर दबाव डालती हैं। अतः ऐसी आदतों पर समय रहते ही ध्यान देना बहुत आवश्यक है।
‘‘भारत में इस समय लगभग 71 प्रतिशत वयस्क किसी न किसी रूप में मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। यहाँ तक कि इससे पतले लोगों में भी फैटी लिवर और मधुमेह आद का जोखिम बढ़ता जा रहा है।’’
बच्चे भी शिकार है, तो महिलाएं हैं अधिक प्रभावित
विशेषज्ञों के अनुसार 8 से 10 वर्ष के बच्चों में भी बढ़ती प्यास, जल्द ही थकना, पेट का निकलना और ब्लड शुगर के मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। देर रात तक जगना, स्क्रीन पर अधिक समय व्यतीत करना और अनियमित तरीके से भोजन करना आदि इस समस्या के बड़े कारण है। इसके साथ ही पुरूषों की अपेक्षा महिलाओं में मेटाबॉलिक सिन्ड्रोम के मामले अधिक संख्या में देखने को मिलते हैं।
समस्या के प्रमुख कारणः
- अनियमित खान-पान अथवा लम्बे समय तक भूखा रहना।
- लम्बे समय तक बैठ कर काम करना और शारीरिक सक्रियता की कमी।
- नींद का पूरा नहीं हो पाना और तनाव की अधिकता।
- बहुत अधिक मीठा, तला-भुना या प्रसंस्कृत भोजन का अधिक सेवन करना।
- दवाओं का अत्याधिक सेवन करना आदि।
मेटाबॉलिज्म में सुधार करने के लिए कुछ टिप्सः
एक अच्छे मेटाबॉलिज्म के लिए शरीर की एक भरोसेमंद लय का मिलना जरूरी है। हमारे शरीर की अपनी एक जैविक घड़ी होती है। इसलिए प्रातः और दिन के समय किया गया भोजन, ऊर्जा में अच्छी तरह से परिवर्तित होता है। जबकि रात में भारी भोजन का सेवन करने से सुस्ती, अम्लता और नींद में बाधा उत्पन्न होती है।
क्या करना चाहिए
डचित समय पर ही भोजन करने को प्राथमिकता प्रदान करने का प्रयास करें। पहले फाइबर और प्रोटीन युक्त पदार्थ और इसके बाद वेटी खाना खाने से ब्लड शुगर संतुलित रहती है।
दुश्मन नहीं है कार्बोहाइड्रेट
काबोहाईड्रेट ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत होता है। साबुत अनाज और कार्बोहाईड्रेट के प्राकृतिक स्रोत स्थिर ऊर्जा प्रदान करते हैं।
क्या करना चाहिए
कार्बोहाईड्रेट के सेहतमंद विकल्पों का चयन करें। साबुत अनाज को अपनी आहार प्रणाली में शामिल करें। ज्वार, बाजरा, रागी एवं दाल आदि हमारे शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा पदान करते हैं अतः इनका सेवन अधिक मात्रा में करें। अधिक मैदा युक्त चीजें और जंक फूड के अतिरिक्त प्रोसेस्ड भोजन से भी यथासम्भव बचकर रहें।
सही वसा शरीर की आवश्यकताः
वसा हमारे दिमाग, हॉर्मोन, कोशिकाओं और विभिन्न अंगों की सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक है। वसा की सहायता से हमारा शरीर जरूरी विटमिन्स और पोषक तत्वों का अवशोषण करने में सक्षम होता है।
क्या करना चाहिए
- मेवे, बीज, जैतून का तेल, अखरोट, अलसी, मछली आदि के रूप में मिलने वाली वसा शरीर के लिए अच्छी मानी जाती है। घी, मक्खन, नारयिल का तेल और रेड मीट आदि का सेवन सीमित मात्रा में ही करें, क्योंकि इनका अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर में कालेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ सकती है।
- बार-बार गरम किए गए तेल से बने भोजन और बहुत अधिक तले हुए भोजन से बचें। बिस्किट, केक, पेस्ट्री एवं फ्रोजन फूड्स का सेवन भी कम मात्रा में ही करें।
गलत धारणाओं में न फंसे
मिथकः शारीरिक रूप से पतले लोगों को मेटाबॉलिक समस्याएं नहीं आती हैं।
सत्यः सामान्य वजन वाले लोगों में भी वसा, हॉर्मोन और शर्करा के सतर में असंतुलन हो सकता है। शारीरिक गतिविधियाँ, तनाव, नींद एवं भोजन की खराब आदतें कम आयु और कम वजन वाले लोगों के मेटाबॉलिज्म को नुकसान पहुँचाती है।
मिथकः कम मात्रा में भोजन करना मेटाबॉलिज्म के लिए अच्छा है।
सत्यः बहुत कम मात्रा में भोजन करने से शरीर में कम ऊर्जा के बनने से दुर्बलता और पोषण में कमी हो जाती है।
मिथकः केवल व्यायाम करने से ठीक हो जाता है। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा आद के अतिरिक्त भी हमारे शरीर सूक्ष्म तत्वों की आवश्यकता होती है।
सत्यः भोजन, नींद, तनाव और दिनचर्या मेटाबॉलिज्म के आवश्यक घटक होते हैं। अतः इन सभी पर भी ध्यान देना अयक होता है।
अच्छी नींद का लेना भी बहुत जरूरी
जब हमारी नींद पूरी नहीं हो पाती है, तो हमारे शारीर के अन्दर तनाव को बढ़ाने वाले हॉर्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जिससे शरीर का पूरा पैटर्न बदल सकता है और अधिक मीठा एवं तला हुआ भोजन करने की इच्छा बढ़ सकती है।
लगातार और तनाव की समस्या होने से वजन का बढ़ना और शाुगर के असंतुलन के जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
क्या करना चाहिए
- अच्छी एवं गुणवत्तापूर्ण नींद में कभी भी कोई समझौता नहीं करना चाहिए और इसके लिए अपनी जीवनशैली में व्यापक सुधार करें।
- यदि किसी व्यक्ति को अनिंद्रा की समस्या है तो उसे इसका तुरंत ही उपचार करवाना चाहिए।
प्रतिदिन करें व्यायामः
नियमित रूप से व्यायाम करते रहने से वजन काबू में रहता है और नई मांसपेशियां बनती हैं। व्यायाम करने से हमारी मांसपेशियाँ मजबूत बनती हैं और मांसपेशियाँ जितनी मजबूत होती हैं हमारा शरीर भी उतने ही बेहतर ढंग से ऊर्जा का व्यय कर पाता है। इसके साथ ही नियमित व्यायाम करने से बल्ड शुगर लेवल संतुलित बनाए रखने में भी सहायता प्राप्त होती है।
क्या करना चाहिए
- प्रातः काल के समय हल्की धूप एवं खुली हवा में टहलना अच्छा माना जाता है। इसके साथ ही हर बार भोजन करने के उपरांत कुछ समय तक घूमना लाभकारी सिद्व होता है।
- स्ट्रैच करने वाले व्यायाम को प्राथमिकता दें। इसके अतिरिक्त सीढ़ियाँ चढ़ना, खड़े होकर ही मीटिंग या फोन पर बात करने जैसी क्रिया करने से शरीर सक्रिय होता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
