अस्थमा रोग का बढ़ता प्रकोप      Publish Date : 11/05/2026

                 अस्थमा रोग का बढ़ता प्रकोप

                                                                                                                डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

  • भारत में कितने करोड़ लोग हैं अस्थमा से पीड़ित, गलत पहचान के कारण बढ़ रहा है यह संकट।

भारत में अस्थमा से 3 करोड़ से ज्यादा लोग ग्रस्त हैं, जो दुनियाभर पर एक बड़ा बोझ बना हुआ है। सही समय पर पहचान न होने के चलते इस रोग के रोगियों के आंकड़ों में तेजी देखने को मिलती है।

गत 5 मई को दुनियाभर में विश्व अस्थमा दिवस (World Asthma Day) मनाया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अस्थमा एक फेफड़ों की बीमारी है, जो सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। यह बीमारी श्वसन नलिकाओं के आसपास की मांसपेशियों में सूजन और अकड़न के कारण उत्पन्न होती है। इस बीमारी के कारण इस रोग से प्रभावित रोगी का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। खांसी, घरघराहट, सांस फूलना और सीने में जकड़न आदि सभी अस्थमा के लक्षण हो सकते हैं। प्रदूषण और धूल-मिट्टी, अस्थमा के मुख्य कारण माने जाते हैं। भारत में अस्थमा के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है।

भारत में अस्थमा के कितने मरीज हैं?

                                      

एक जनरल में प्रकाशित की गई एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में लगभग 3.5 करोड़ लोग अस्थमा से प्रभावित हैं। भारत में अस्थमा के मामले वैश्विक बोझ का एक बड़ा हिस्सा है जो लगभग 13 प्रतिशत है। वहीं, अस्थमा से होने वाली वैश्विक मौतों में लगभग 42 फीसदी योगदान भारत का है। यह आंकड़ा बताता है कि भारत में अस्थमा की बीमारी सिर्फ मरीजों की संख्या तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह उपचार में कमियों से भी जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

गलत पहचान के कारण बढ़ रहे मौत के आंकड़े: Global Asthma Report के अनुसार, भारत की स्थिति बेहद चिंताजनक है। देश में अस्थमा का अधूरा इलाज, भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। कई मरीजों को समय पर बीमारी का पता नहीं चल पाता है, इसकी वजह से उनकी हालत बिगड़ती है और स्थिति जानलेवा बन जाती है।

  • विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में बड़ी संख्या में मरीजों की सही समय पर पहचान नहीं हो पाती है। कई बार अस्थमा के लक्षण जैसे- खांसी, सांस फूलना या घरघराहट आदि को सामान्य श्वसन रोग समझ लिया जाता है। इससे अस्थमा रोगी के इलाज में देरी होती है और मौतों का आंकड़ा बढ़ता जाता है।
  • यह रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं की असमानता और जागरूकता की कमी की वजह से कई लोग सही इलाज तक नहीं पहुंच पाते हैं।
  • आपको बता दें कि वायु प्रदूषण, धूल, धुआं, घरेलू ईंधन और बदलती जीवनशैली अस्थमा के मुख्य कारण होते हैं, इसलिए अगर आप इन चीजों के संपर्क में ज्यादा रहते हैं तो समय-समय पर फेफड़ों की जांच जरूर कराएं।

मुख्य बिन्दुः

                                   

  • भारत में 3.5 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं।
  • दुनिया में अस्थमा से होने वाली कुल मौतों में करीब 42 प्रतिशत भारत में होती हैं।
  • प्रदूषण, धूम्रपान, धूल-मिट्टी अस्थमा के सबसे अहम कारण माने जाते हैं।

भारत में अस्थमा के मरीजों की संख्या में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। इतना ही नहीं, अस्थमा से हर साल लाखों लोग अपनी जान भी गंवा रहे हैं। इसलिए अस्थमा के लक्षणों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। समय पर पहचान और इलाज से अस्थमा रोगियों की जान बचाई जा सकती है।

 लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।