
पांच वर्ष में रक्तदाताओं में मिला 6 गुना मलेरिया संक्रमण Publish Date : 09/05/2026
पांच वर्ष में रक्तदाताओं में मिला 6 गुना मलेरिया संक्रमण
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
रक्तदान करने वालों में मलेरिया का संक्रमण भले ही बेहद कम हो, लेकिन पिछले पांच वर्ष में यह छह गुना बढ़ चुका है। रक्तदाताओं में मलेरिया का संक्रमण बढ़ा है लेकिन खून चढ़ने की वजह से होने वाले मलेरिया के मामलों की पहचान और रिपोर्टिंग दोनों ही न के बराबर हैं। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की अगुवाई में हुए राष्ट्रीय सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया है। इसे वॉक्स सैंगुइनिस पत्रिका मंट मार्च के अंक में प्रकाशित किया गया है।
यह सर्वेक्षण वर्ष 2025 में मई से सितंबर के बीच देश भर के 262 केंद्रों पर किया गया। इन केंद्रों में पिछले पांच वर्ष के दौरान 92,75,688 यूनिट खून की जांच की गई। खून की जांच में मलेरिया के संक्रमित मामलों की जानकारी ली गई। इसमें देखा गया कि वर्ष 2020 में मलेरिया संक्रमण की दर प्रति एक लाख यूनिट पर 3.4 थी जो वर्ष 2024 में 22 पहुंच गई। यह आंकड़ा रक्तदाताओं में मलेरिया के बढ़ते प्रसार की ओर इशारा करता है।
सर्वेक्षण में शामिल 256 (97.7 फीसदी)
केंद्रों ने सभी रक्तदान नमूनों की नियमित मलेरिया जांच होने की बात कही। इन केंद्रों में एंटीजन रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) का उपयोग सबसे आम था, जिसका प्रयोग 256 में से 228 (89.1 फीसदी) केंद्रों ने किया। सर्वेक्षण में यह भी पता चला कि सिर्फ आठ केंद्रों (3.1 फीसदी) ने ही खून चढ़ाने से फैलने वाले मलेरिया (टीटीएम) के मामलों को दर्ज किया।
बाह्य गुणवत्ता मूल्यांकन (ईक्यूए) और हीमोविजिलेंस को मजबूत करना जरूरी
देश में मलेरिया उन्मूलन के लिए सुरक्षित रक्त की आपूर्ति जरूरी है। इसके लिए जरूरी है कि ब्लड बैंकों में बाह्य गुणवत्ता मूल्यांकन (ईक्यूए) और हीमोविजिलेंस की व्यवस्था हो। बाह्य गुणवत्ता मूल्यांकन में किसी दूसरे पक्ष को जांचे हुए नमूनों को दोबारा जांचने के लिए कहा जाता है। वहीं हीमोविजिलेंस में उस व्यक्ति की मॉनीटरिंग की जाती है, जिसे खून चढ़ाया गया होता है।
देश में हर साल मलेरिया के 20 लाख मामले
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक देश में हर साल मलेरिया के करीब 20 लाख मामले सामने आते हैं। विश्व में होने वाले मलेरिया के कुल मामलों में 0.70 फीसदी अपने देश में होते हैं। वहीं मलेरिया से होने वाली कुल मौतों में अपने देश का प्रतिशत 0.60 फीसदी है।
मलेरिया का कारंण

मलेरिया एक गंभीर बीमारी है जो मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है, जो प्लाज्मोडियम परजीवी को फैलाता है। संक्रमित मच्छर के काटने पर यह परजीवी मानव रक्त में प्रवेश कर जाता है।
बचाव
- मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करना।
- रुके हुए पानी को भरा न रहने देना।
- मच्छरदानी का इस्तेमाल करना।
- मच्छर भगाने वाली क्रीम या स्प्रे का उपयोग करना।
लक्षण
कंपकंपी के साथ तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक पसीना आना, थकान, मितली और उल्टी।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
