मोटापे के चलते बढ़ती इनफर्टिलिटी की समस्या      Publish Date : 25/04/2026

मोटापे के चलते बढ़ती इनफर्टिलिटी की समस्या

                                                                                     डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

"वर्तमान समय के ताजा आंकड़ों की माने तो आज देश की 70 प्रतिशत अधिक शहरी आबादी बढ़ते हुए मोटापे की समस्या को लेकर परेशान है। इसके सम्बन्ध में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि पूरी दुनिया में लगभग एक अरब 20 करोड़ लोग मोटापे और इसके कारण से होने वाली परेशानियों से जूझ रहे हैं। मोटापे के चलते होने इनफर्टिलिटी की समस्या के कारण बहुत से जोड़े संतान सुख से वंचित रह जाते हैं। मोटापे से पीड़ितों की संख्या के मामलों भारत दुनिया में तीसरे नंबर का देश है, जो कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में विभिन्न चुनौतियों को पेश कर रहा है"।

मोटापे से होने वाली समस्त परेशानियों में मेटाबॉलिक सिन्ड्रोम, ऑस्टियोआर्थाराइटिस पैथोलॉजी और साइकोसैक्सुअल डिस्फंक्शन जैसे रोग शामिल हैं, जिनका हमारी सैक्सुअल लाइफ पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और प्रभावित व्यक्ति को न केवल सैक्स बल्कि अपने साथी के प्रति भी अरूचि होने लगती है।

विभिन्न शोधों के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि मोटापे के कारण टेस्टोस्टेरोन (पुरूष सैक्स हार्मोन) का स्तर कम हो जाता है। कम वजन और बीएमआई के चलते इरैक्टाइल डिस्फंशन (एक प्रकार का सैक्सुअल दोष) की स्थिति में काफी सुधार देखा गया है। हालांकि, महिलाओं की तुलना में पुरूष इस समस्या से अधिक प्रभावित होते हैं।

तेजी के साथ बढ़ती इनफर्टिलिटी एक गम्भीर समस्या

                            

दिल्ली में किए गए एक अध्ययन के अनुसार अभी कुछ वर्षों के दौरान बदलती खानपान की आदतें और व्ययायामक के प्रति अरूचि का प्रभाव भी हमारी सैक्सुअल लाइफ पर भी पड़ रहा है। दिल्ली के साथ ही देश के तमाम बड़े शहरों में भी इनफर्टिलिटी के केस बहुत तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। इनमें से 50 से 60 प्रतिशत मामलों के लिए मोटापे को जिम्मेदार माना जाता है। इसका परिणाम यह हुआ कि अपने देश में लगभग 10 प्रतिशत युगल इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे हैं।

मोटापे के कारण होने वाली अन्य परेशानियाँ

  • माना जाता है कि मोटापे के कारण एस्ट्रोजन नामक हॉर्मोन अधिक मात्रा में बनता है, जिसके चलते अन्य हॉर्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं जिसके चलते अण्डे के बनने में बाधाएं आती हैं। अण्ड़ा बनने की पहली और सर्वाधिक महत्वपूर्ण शर्त होती है कि आपके हार्मोन्स संतुलित बने रहें और हॉर्मोन्स के संतुलन को मोटापे को कम करके बहाल किया जा सकता है।
  • महिलाओं में मोटापा बढ़ने के साथ ही उनके पीरियड्स का अनियमित होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। साथ ही ऐग के बनने और उसकी क्वालिटी का ठीक न होना भी एक समस्या है, जो क इनफर्टिलटी का एक बहुत बड़ा कारण होता है। इसके साथ ही वेट अधिक होने के कारण प्रभावित महिला में मिसकैरेज होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसीके साथ प्रेग्नेंसी के दौरान वजन के अधिक बढ़ने से हाई बीपी और ब्लड शुगर लेवल के बढ़ने का खतरा भी बना रहता है।
  • विभिन्न शोधों के परिणाम बताते हैं कि मोटापा और अधिक मात्रा में फैटी फूड्स का सेवन करने से पुरूषों में स्पर्म्स की संख्या और उनकी क्वालिटी खराब होने का कारण भी बन सकता है, जो कि उनके पिता बनने की राह में बाधा उत्पन्न करता है।
  • अधिक मोटापे शरीर में ऐस्ट्रोजन हॉर्मोन का लेवल बढ़ जाता है और इससे महिला की ओवरी में सिस्ट के विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। ओवेरियन सिस्ट के कारण भी सम्बन्धित महिला को माँ बनने में समस्याएं आती हैं। अतः वजन को कम करने से इस समस्या पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है।

स्त्री और पुरूष के मोटापे में भिन्नता:

                         

मोटापे का प्रभाव महिला और पुरूष के मामलों में अलग-अलग होता है। लेकिन जहाँ तक यौन शक्ति का प्रश्न है, मोटापा पुरूषों की तुलना में महिलओं को अधिक प्रभावित करता है। मोटापे के चलते लड़कियों में महावारी शीघ्र आरम्भ हो जाती है और उनमें जावन होने के अन्य लक्षण भी जल्द ही दिखाई देने लगते हैं। मोटापा पीसीओडी (अंडाश्य में गाँठ का होना) का कारण भी बनता है और ऐसी महिलओं में मोटापा बांझपन का कारण भी बन जाता है, जिससे उन्हें गर्भधारण करने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। वहीं पुरूषों में मोटापा टेस्टोस्टेरोन की कमी का कारण बनता है।

अधिक वनज यानि कि ओवरवेट अथवा मोटापा यानि ओबेसिटी की समस्या से ग्रस्त पुरूषों में, सामान्य पुरूषों की अपेक्षा टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन का स्तर काफी कम होता है। इसके साथ ही कई शोध एवं अध्ययनों में सामने आया है कि हाईपरटेंशन जैसी स्थिति, जिसका सम्बन्ध मोटापे से है और यह पुरूषों में शीघ्रपतन की समस्या के लिए भी जिम्मेदार होता है। वहीं महिलाओं में मोटापा उनकी प्रजनन क्षमता (संतान को जन्म देने की क्षमता) को प्रभावित करता है और आत्मविश्वास की कमी के कारण मोटापा उन्हें मानसिक स्तर भी प्रभावित करता है।

मोटापे का निदानः

मोटापे के जैसी समस्या को इसके आरम्भ से ही गम्भीरता से लिया जाना आवश्यक है और एक ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जिससे कि इस समस्या से पीड़ित लोग सजग रहें, चिकित्सक से सलाह लें और मोटापे को किसी रोग की तरह से लेकर ही उसका समुचित उपचार कराएं।

मोटापे के लिए आधुनिक उपचार:

मौजूदा समय में कृत्रिम वीर्य संचालन (ऑर्टिफिशियल इनसेमीनेशन), इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ), भ्रूण प्रत्यारोपण एवं अन्तः कोशिका द्रव्य शुक्राणु इंजेक्शन (आईसीएसआई) के जैसी अनेक तकनीकों की सहायता से निःसंतान दम्पत्ति संतान का सुख प्राप्त कर सकते हैं। इन तकनीकों की सहयता से न केवल प्रजनन दोष वाली महिलाएं बल्कि अधिक आयु वाली महिलाएं भी माँ बनने का सौभाग्य प्राप्त कर सकती हैं और फिर बिलकुल अंत में सैरोगेसी तकनीक तो है ही।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।